नजदीकियां क्यों बन जाती हैं दूरियां

नजदीकियां क्यों बन जाती हैं दूरियां

सामाजिक मान-मर्यादाओं की खातिर सिर्फ संबंधों को मजबूरी में ढोना दांपत्य जीवन का सही मतलब नहीं है। सही मतलब है प्रेम संबंधों का भरपूर आनंद लेना। पति-पत्नी अपने स्वाभिमान को सुरक्षित रखकर और भावनाओं की कद्र कर प्रेम-पूर्वक वैवाहिक जीवन बिता सकते हैं और उम्र के अंतिम पड़ाव तक खुशहाल व आदर्श दांपत्य की मिसाल कायम कर सकते हैं।
पति-पत्नी के बीच बढ़ती हुई दूरियों के कारणों में मुख्य कारण है पति द्वारा पत्नी की भावनाओं से खिलवाड़ करना।
अधिकतर पुरूष बिस्तर पर औरत को एक प्यारी गुडिय़ा जैसा खिलौना मात्र समझकर खेल लेते हैं क्योंकि वे समझते हैं कि औरत कुदरत की दी हुई एक अद्भुत गुडिय़ा है जो सिर्फ उनके लिये ही बनी है। जब खेल कर मन भर जाता है तो उसके पश्चात लम्बी चादर तान कर सो जाते हैं। न वे औरत की भावना को समझते हैं, न ही औरत की इच्छा-अनिच्छा को समझने की कोशिश करते हैं और न वे प्रेम-प्रसंग, मनुहार या वार्तालाप करते हैं। बस उन्हें तो अपनी 'काम-पिपासा' को शांत करने से मतलब होता है। मजबूरन औरतें बिस्तर पर ठंडापन ही प्रदर्शित कर पाती हैं।
'शुरू-शुरू में मेरी भी कुछ इच्छा, चाहत और उमंगें थीं जिन्हें मैं पूरा करना चाहती थी मगर कर नहीं पाती थी। सोचती थी कि आप प्यार से पूछेंगे मगर आपने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि मैं क्या चाहती हूं। बस आते ही शुरू हो जाते थे। कई दिनों तक यह देखती रही। आखिर मैंने ही अपनी इच्छा का दम घोंट लिया। जैसा आप चाहते थे, वैसा होने लगा। मैंने कभी विरोध नहीं किया।'
आखिर औरतें बिस्तर पर अपनी इच्छा अनिच्छा व्यक्त क्यों नहीं कर पाती। पति की इच्छा का सम्मान करते हुए वे बिस्तर पर पड़ी रहती हैं और पति उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते रहते हैं। शुरू-शुरू में तो पति को पत्नी की इस आदत पर हैरानी नहीं होती मगर जब उसका यौन जीवन सामान्य और सही ढर्रे पर आता है तो पत्नी का असहयोग उसे अखरने लगता है।
इस तरह की भावनाओं के मूल में औरतों को मिले संस्कार होते हैं। इसी कारण ही वे इच्छा के विरूद्ध भी पति के लिए बिस्तर पर हमेशा तैयार रहती मिलती हैं। यह इसका एक कारण है मगर सच्चाई कुछ और भी है।
औरत के दिमाग में आदमी की सोच का डर बैठा रहता है। इसी सोच के चलते ही वह बिस्तर पर चुप रहती है। वह कहना बहुत कुछ चाहती है, पर कह नहीं पाती।
वे आदमी की दोहरी दिमागी सोच से वाकिफ होती हैं। यह जानती है कि यदि उसने बिस्तर पर कुछ इच्छा-शक्ति, चाहत या भावना प्रकट की, तो उसे दूसरे मायनों में लिया जाएगा। उसे पतिता, कुलटा और बदचलन समझकर शक की निगाह से देखा जाएगा। यदि वह चुप रही तो उसे शर्मीली समझ लिया जाएगा। ज्यादा कुछ हुआ तो गंवार कह दिया जाएगा।
यही कारण है कि कई पत्नियां पति की इच्छा देखकर अपना व्यवहार बना लेती हैं। यदि यौन जीवन में पति-पत्नी की दखलअंदाजी नहीं चाहता तो पत्नी अपनी इच्छा को दबाकर पति की मरजी के मुताबिक चलने लगती है। पति जैसा चाहता है, वैसा ही करने देती है।
ऐसे में एक समय ऐसा आता है, जब पति पत्नी से ऊब जाता है। ऐसी दशा में पत्नी से उसका झगड़ा या फिर मनमुटाव हो जाता है। अक्सर वह पत्नी को ठंडी मान कर दूसरी जगह संबंध बना लेता है।
यदि पति समझदार होता है तो पत्नी से बातचीत करता है, उसे अपने भरोसे में लेकर प्यार व मनुहार से उसके दिल की बात जान लेता है। तब पत्नी के अनुरूप आचरण करके अपना यौन जीवन सुखमय बना लेता है।
औरत एक नदी की तरह होती है और धीरे-धीरे ही शांत होती है जबकि आदमी तूफान की तरह होता है जो जल्दी आकर जल्दी चला जाता है।
यदि पति पत्नी जरा भी समझदारी, विश्वास, आपसी तालमेल, भावनाओं व प्यार से काम लें तो आपसी संबंध जीवन भर आपको खुशियां देते रहेंगे। दंपतियों के बीच बढ़ती दूरियों को नजदीकियों में बदलने के कुछ महत्त्वपूर्ण टिप्स की ओर ध्यान दें।
- बिस्तर पर शांत मन से, शोख अदाओं से प्यार करें और मनुहार करें। एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करते हुए प्यार का खेल खेलें। दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखें।
- बिस्तर पर समझदारी के साथ ताल से ताल मिलाकर पहल करें। किसी प्रकार की जल्दबाजी न करें।
- बिस्तर पर समझदारी से एक साथ दूसरे की इच्छा अनिच्छा जानने की कोशिश करें। किसी प्रकार की परेशानियां हों तो आपस में किसी प्रकार का दुराव छिपाव न करें। दोनों का आचरण एक खुली किताब की तरह होना चाहिए। दुराव-छिपाव से शक पैदा होते हैं और दिल में शक हो तो प्यार का अर्थ नहीं रहता।
- बिस्तर पर एक-दूसरे को सम्पूर्ण समर्पण के साथ सम्पूर्ण संतुष्टि दें। किसी एक की असंतुष्टि झगड़े या मनमुटाव का कारण होती हैं।
- यदि दैनिक कार्यक्रमों के क्रम में थकान का अनुभव करें तो किसी अनुभवी डॉक्टर से सलाह लें।
- आर्थिक तंगी हो तो एक-दूसरे पर ताना न कसें। संभव हो तो एक-दूसरे की फरमाइशों को पूरा करें किंतु बिस्तर पर प्यार के वक्त कभी भी बेवजह फरमाइशें न रखें जो तत्काल पूरी न हो सकती हों।
इस तरह पति पत्नी की भावनाओं से न खेंले अपितु पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे को मित्र समझें तो हर हाल में उनका जीवन खुशहाल होगा और दूरियां नजदीकियां बन जायेंगी।
- विद्या भूषण शर्मा

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