बच्चों को व्यवहार कुशल बनाना हमारी जिम्मेवारी

बच्चों को व्यवहार कुशल बनाना हमारी जिम्मेवारी

आज की व्यस्तता भरी जिंदगी में काम-काज वाले माता-पिता खासकर अपने बच्चों के लिए समय नहीं निकाल पाते। बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए माता-पिता को थोड़ा टाइम अपने बच्चों के लिए अवश्य निकालना चाहिए, ऐसा बाल मनोवैज्ञानिकों का कहना है। बहुत से माता-पिता बच्चों को समय न दे कर उनकी हर मांग पूरी करते हैं जो बहुत गलत है।
माता-पिता बच्चों को समय न देकर उनकी इच्छा पूर्ति के लिए कीमती सामान, कपड़े, खिलौने और पैसा तक देते हैं। उन्हें अपनी मनमर्जी करने की छूट दी जाती है। वे चाहते हैं कि उनकी कोई बात नहीं टाली जानी चाहिए। बच्चे की हर बात मानने से बच्चों को लगता है कि सारा संसार उनके कदमों में हेै। ऐसे में बच्चे बिगड़ जाते हैं। बिगड़े बच्चे बड़े होकर असफल और कुंठित वयस्क के रूप में आते है। यह बच्चे जीवन में कभी खुश नहीं रह सकते।
बच्चों के बिगडऩे के लक्षण:-
- बच्चा जरूरत और इच्छा में अंतर समझ नहीं पाता।
- बच्चा अपनी मनमर्जी करता है।
- वह हर बात में विरोध करने लगता है।
- उसकी बात न मानने पर वह भड़क जाता है।
- बहुत ज्यादा और बेतुकी बात करता है।
- वह किसी भी नियम का पालन नहीं करता।
- जिद्दी और चिड़चिड़ा हो जाता है।
बिगड़े हुए बच्चे जीवन के कई रास्तों और मंजिलों को पाने में नाकाम होते हैं, क्योंकि वे:-
- जीवन में सही-गलत का निर्णय नहीं ले पाते।
- वे अपने उत्तरदायित्व और कर्तव्य को नहीं समझ पाते।
- समय का सही प्रयोग नहीं कर पाते।
- अजीब या अनुचित व्यवहार करते हैं।
- मुश्किल परिस्थितियों में आसानी से हार मान लेते हैं।
- दूसरे लोगों के साथ मिलकर काम नहीं करना चाहते।
बच्चों को सुशील व सभ्य ऐसे बनाएं:-
- बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सीमाएं निर्धारित करें और उसका पालन कराएं।
- बच्चों की हर इच्छा की पूर्ति करना जरूरी नहीं। कुछ खास अवसरों पर ही उपहार दें।
- बच्चों के चिल्लाने और बेकार की जिद पर ध्यान न दें। उनके अनुचित व्यवहार पर गौर न करें। जिद छोड़ देने पर उन्हें प्यार करें। उनके बीते हुए व्यवहार की बात न करें।
- बच्चों को शुरू से ही बचत की आदत सिखाएं। घर के कामों में मदद करना तथा बड़ों की सहायता करना सिखाएं।
- बच्चों का सही मार्गदर्शन करें तथा उन्हें किताब, खिलौने आदि देखकर समय का सही प्रयोग करना सिखाएं। साथ ही खिलौने और सामान दूसरों के साथ बांटना सिखाएं।
- आपका जरूरी काम खत्म होने तक उसे प्रतीक्षा करन सिखाएं। इस तरह बच्चे को सहनशील बनाएं।
- बच्चे की तुलना भाई-बहनों व अन्य बच्चों से न करें। गलत बातों को अस्वीकार करते हुए न घबराएं।
- सबसे जरूरी अपने बच्चों के लिए स्वयं आदर्श बनें। उनसे ऐसा व्यवहार करें जैसा व्यवहार आप उनसे उम्मीद करते हैं।
इन बातों पर ध्यान दें:-
- दुकानों या बाजार में बच्चा कोई खिलौना मांगता है तो यह न कहें कि अभी दिला देंगे। इसके बजाय यह कहें कि बाद में तुम्हें दिला देंगे।
- यदि बच्चा पढ़ नहीं रहा या पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा रहा है तो यह न कहें कि पढ़ाई नहीं करोगे तो सजा मिलेगी बल्कि यह कहें कि तुम पढ़ाई शुरू करो। समय पर हम तुम्हारी सहायता करेंगे।
- यह तुमने क्या गलत काम किया? हम तुमसे बात नहीं करेंगे। ऐसा कहने की बजाय यह कहें कि तुम्हें अपने किये पर पछतावा होना चाहिए और कोशिश करो कि गलती न दोहराओं।
- यह काम मत करो, हम तुम्हें मिठाई देंगे, यह न कहें बल्कि यह कहें कि तुम्हारे अच्छे काम के लिए हम तुम्हें उपहार देंगे।
- गोपाल थापा

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