आज की नारी-मैं मनचली

आज की नारी-मैं मनचली

मैं उधर ही चलूंगी जिधर मेरा मन ले जाए। मैं वहीं करूंगी जो मेरा मन करेगा। यह है आज की स्त्री का साहसिक निर्णय। अब उसे किसी के दबाव में रहना मंजूर नहीं।
प्यार किया तो डरना क्या? वो खुल के अपने प्रेम का इजहार करती है। अपने मन को मार कर माता पिता की इच्छाओं के आगे अपने प्रेम की बलि चढ़ाना उसे मंजूर नहीं। अब वो मीरा का ये भजन 'मने चाकर राखो जीÓ पति के आगे नहीं गाती बल्कि बांहों में बांहें डाल जीवन भर साथ निभाने का वादा जरूर करती है और यही उम्मीद वो अपने लाइफ पार्टनर से भी करती है।
सेक्सी पुरूष पसंद हैं:- अपनी पसंद नापसंद को अहमियत देकर उसकी अहमियत जताना और मनवाना भी उसे खूब आता है। उसे मेट्रोसैक्सुअल पुरूष ही ज्यादा पसंद हैं। ऐसे पुरूष जो मेट्रो सिटीज़ के कलचर से वाकिफ हों, अपनी इमेज को लेकर जो कांशियस हों और जिनके पास खर्चने के लिए ढेर सा पैसा हो, जो ब्रांडेड चीजों का शौक रखते हों और उन्हें अफोर्ड कर सकते हों, जो औरत की साइकॉलोजी को समझने की अक्ल रखते हों। रफ टफ दबंग टाइप होने के साथ ही जिनमें इमोशनल कोशियंट भी कम न हो यानी कि दूसरे की भावनाओं को भी समझते हों। ये सब क्वालिटीज जिनमें हों, वे ही पुरूष उनकी कसौटी पर खरे उतर सकते हैं।
तुम ही देवता हो! नो-नो:- अब वो ऐसा बिलकुल नहीं सोचती क्योंकि वो बराबरी करती पुरूष के मुकाबले में खड़ी है। हर फील्ड, हर जगह उसने अपने को प्रूव करके दिखाया है। वो यह बात अच्छी तरह समझ गई है कि पुरूष के जीवन में उसकी कितनी अहमियत है। ऐसा नहीं कि उसके प्यार में कमी आई है। आज भी वो प्रेम की खातिर जान कुर्बान करने को तैय्यार मिलेगी लेकिन अपनी स्वीट विल से, किसी मजबूरी के दबाव में आकर नहीं।
शिक्षा से आई जागरूकता:- बाहर कदम निकले, एक्सपोजर हुआ, दुनियां वालों से इंटरएक्शन होने लगा तो अच्छे बुरे की समझ विकसित हुई। आर्थिक स्वतंत्रता से उसमें आत्मनिर्भरता आई। पति भी कुछ लिबरल हुए, उसके टेलेंट की कद्र भी करने लगे और साथ ही देने लगे पूरा सपोर्ट। इस तरह पंखों ने उड़ान भरी। अपने आसपास के वातावरण से लेकर दुनिया जहान के बारे में उसकी सोच को एक नई दिशा मिली। ग्लोबलाइजेशन के दौर में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की मदद से उसमें भी जागरूकता आ गई। परम्परा के नाम पर जो भी अतार्किक, ऊलजलूल उसे डिमॉरलाइज करने वाले रिवाज थे, उन्हें उसने सिरे से खारिज कर अपनी जिन्दगी अपनी ही शर्तों पर जीने का मन बना लिया।
गृहकार्यों में अकेले नहीं जूझती:- जागरूकता आने से उसे यह फायदा हुआ कि गृहकार्यों में पति की मदद लेते हुए अब उसे अपराध बोध महसूस नहीं होता। उसे इस बात का अच्छी तरह अहसास है कि वो भी इंसान है। पति उसे गृहकार्यों में मदद कर उस पर कोई अहसान नहीं करते। सामाजिक दबाव आज भी कम नहीं है इस बात को लेकर कि पति का गृहकार्य करना उसके लिए शर्मिंदगी का बायस है। सही गलत की पहचान ने ही उसे उनकी बातों को नजर अंदाज करने का साहस दिया है।
बिस्तर में भी बोल्ड:- अपनी दैहिक जरूरतों को स्वीकारती वो पति के साथ पहल करने में झिझक महसूस नहीं करती। अब वो उतनी ही मुखर है जितना उसका साथी। अब वो अपनी इच्छाओं को मारकर घुटन भरी, डिप्रेस्ड जिन्दगी जीने को तैय्यार नहीं। खुशी मौजमस्ती पर उसका भी उतना ही अधिकार है जितना कि पुरूष का, वो यह मानकर चलने लगी है।
अपने प्रति और अपने रिश्तों को लेकर वो ईमानदार है:- उसके अदम्य साहस ने ही उसे पारदर्शिता बख्शी है जिसके चलते वो एसर्टिव है और साथ ही उतनी ही ईमानदार भी। उसमें आत्मविश्वास है भरपूर। इसी से उसे साथी से सम्मान भी मिलने लगा है।
- उषा जैन 'शीरीं'

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