पतली कमर-सौंदर्य की द्योतक

पतली कमर-सौंदर्य की द्योतक

नारी शरीर का एक विशेष अनुपात है। यदि अनुपात ठीक हो तो वह उर्वशी या मेनका, रम्भा से कम नहीं लगती। यदि यहीं अनुपात बिगड़ जाए तो नारी तो वह रहती है परन्तु शरीर का अनुपात बिगड़ जाने पर सुंंदरता और लावण्य कम हो जाता है।

जो हम खाते हैं, वह हमारे शरीर के विकास में सहायता करता है। यदि ज्यादा खा लें तो अतिरिक्त वसा पेट के नीचे परत बना लेती है और कमर का आकार बढ़ जाता है। इससे नारी सौंदर्य में कुछ कमी आ जाती है। इसे ठीक स्थिति में रखना ही तपस्या है जो व्यायाम एवं भोजन पर नियंत्रण द्वारा होता है इससे शरीर का अनुपात सही रहता है।

नारी शरीर में यौवनावस्था 13 साल में आ जाती है। एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन हारमोन, मासिक धर्म के साथ पैदा होना शुरू हो जाते हैं। इससे वक्ष उन्नत होते हैं, नितम्ब अपना आकार लेते हैं। जांघों पर वसा आती है परन्तु कमर पतली ही रहती है। इसका आकार 36, 26, 36 सही है। विश्व का पतली कमर का रिकार्ड 13 इंच है। पतली कमर सौन्दर्य का प्रतीक है। पतली कमर चाल को मस्तानी बना देती है।

पुरूष शरीर एवं मादा शरीर में आधारभूत अंतर यह है कि पुरूष में कंधे पुष्ट होते हैं, छाती चौड़ी पर नितम्ब भारी नहीं होते। स्त्रियों में प्राय: प्रसव के बाद कमर मोटी हो जाती है। इसको व्यायाम द्वारा या उपवास द्वारा पतली हालत में लाया जा सकता है।

- तैलीय, चिकनाई, तली वस्तुएं कम प्रयोग करें। मीट, अण्डा, मछली त्यागें।

- कमर का व्यायाम और कमर की नियमित मालिश करें। प्रात: व्यायाम, सैर और जागिंग करें।

- रात्रि को भोजन न करें। शरीर में इकटठी हुई ऊर्जा को जलाएं। यह केवल व्यायाम व भोजन कंट्रोल द्वारा हो सकता है।

- रस्सी कूदें, नृत्य करें, नाचें। तकिया छोटा व पतला लें ताकि रक्त संचार ठीक रहे।

यदि आप भी छरहरी दिखना चाहती हैं तो कमर को कमरा मत बनने दें। पेट को ढलकने न दें। वक्ष और पेट का अनुपात ठीक रखें। खानपान पर नियंत्रण रखें। शादी ब्याह में जाकर खाने का लालच मत करें। जीवन लंबा नहीं, सुन्दर होना चाहिए। शरीर की सुंदरता के साथ-साथ मन मस्तिष्क भी सुन्दर बनाएं।

-विजेन्द्र कोहली गुरदासपुरी

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