किटी क्लब - फैशन या जरूरत

किटी क्लब - फैशन या जरूरत

आजकल नौकरी-व्यवसाय के सिलसिले में लोगों का घर के बाहर जाना आम हो गया है। पुरूष तो दिन भर काम में व्यस्त रहते हैं और महिलाएं घर में अकेली। ऐसे में महिलाओं के लिए किटी क्लब समय बिताने का अच्छा साधन सिद्ध होते हैं। शहरों में इनकी बाढ़-सी आई हुई है।

किटी क्लब से जुडऩा फैशन और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। पहले संयुक्त परिवार होते थे। घर की औरतें काम समेटकर फुर्सत का समय एक साथ गपशप, मनोरंजन में बिताती थीं परंतु अब विखंडित परिवार, टीवी का बढ़ता प्रकोप, कामकाजी महिलाओं का बढ़ता अनुपात, बच्चों की पढ़ाई, आत्म केंद्रित होने की प्रवृत्ति, दूरियां, भागदौड़ की जिंदगी के कारण यह संभव ही नहीं हो पाता कि रोज-रोज किसी के घर मिलने जाया जाए। अत: किटी क्लबों में महीने में एक बार या दो-तीन बार तरह-तरह के लोगों से मिलने के साथ ही साथ मनोरंजन भी हो जाता है।

किटी क्लब की स्थापना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की रचनात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देना और मनोरंजन करना है। जब एक सा शौक रखने वाले ( जैसे लेखन क्लब, रिव्यू क्लब, साहित्यिक क्लब, गार्डन क्लब, किचिन क्लब, व्यावसायिक क्लब ) लोग क्लब का गठन करते हैं तो ऐसे क्लबों में बहुत कुछ सीखने को तो मिलता ही है, साथ ही ज्ञान की अभिवृद्धि होती है। किटी क्लब का महत्त्व निम्न कारणों से है:

० किटी क्लबों में विभिन्न परिवारों की हम उम्र महिलाएं होती हैं जिनसे बहुत कुछ सीखा और समझा जा सकता है।

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० जगह-जगह बदली वाली नौकरियों में रहने वाले लोगों के लिए साथी बनाने का एक अच्छा माध्यम है।

० महिलाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्राप्त होता है।

० घर की चार दीवारी, बच्चों के झंझटों से दूर कुछ देर के लिए अपनी हमजोलियों से मुलाकात उनमें ताजगी व स्फूर्ति ला देती है।

० कई किटी क्लब में महिलाएं बचत के रूप में कुछ रूपए इकटठे करती हैं। बढ़ती महंगाई में जब उन्हें एक साथ एकमुश्त रकम मिलती है तब वे मनचाही वस्तु खरीद लेती हैं।

० समय-समय पर होने वाले उत्सवों, त्योहारों को मिल-जुलकर मनाने से आनंद और खुशी मिलती है।

० अलग जाति, प्रांत के लोगों से उनके व्यवहार, पहनावे आदि के बारे में जानकारी मिलती है।

० इनमें खेले जाने वाले खेल महिलाओं को बीते दिनों की याद ताजा करा देते हैं।

० तरह-तरह के लोगों से जान-पहचान, दोस्ती होती है न कि सीमित दायरे में एक ही तरह के व्यवसाय वालों से।

परंतु हर सिक्के के दो पहलू हैं। यही बात किटी क्लबों के साथ है। बहुत सी महिलाएं अपने नाम, पद, पैसे का दुरूपयोग कर इनको परनिंदा, दिखावा, फैशन का अखाड़ा बनाकर इनका हुलिया ही बिगाड़ देती हैं, तो कई दिखावे व होड़ के कारण घर की अर्थव्यवस्था तहस-नहस कर देती हैं।

- नरेन्द्र देवांगन

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