कामकाजी अभिभावक-बच्चे क्या सोचते हैं?

कामकाजी अभिभावक-बच्चे क्या सोचते हैं?

पारिवारिक जीवन में इधर नाटकीय बदलाव आ गया है। पहले स्थिति यह थी कि पिता ऑफिस जाते थे और मां घर बार संभालती थी लेकिन अब तो ज्यादातर परिवारों में माता-पिता दोनों ही नौकरी पर जाते हैं व बच्चे अपना अधिकतम समय माता पिता की गैरहाजिरी में गुजारते हैं। इस तरह के बच्चों के मन में अनेक सवाल उठते होंगे? इन सब के बारे में हमने कुछ बच्चों से बात की। उन बच्चों ने हमें अपनी समस्याएं बताई व सुझाव भी दिए। प्रस्तुत हैं बच्चों द्वारा दिए गए सुझाव।

सान्या ने कहा उसके पिता बहुत ज्यादा होशियार व प्रतिभाशाली हैं। वे किसी भी मुश्किल को बहुत अच्छी तरह से हल कर देते हैं पर वह जब भी उनसे कुछ पूछने जाती है तो वह हमेशा यही कहते हैं कि क्या तुम देख नहीं रही हो कि मैं काम कर रहा हूं। मुझे तंग मत करो, बाद में आना। ऐसी स्थिति में बच्चे अपने आपको उपेक्षित महसूस करने लगते हैं। जब आप काम से लौटते हैं तो बच्चों को उम्मीद होती है कि उनकी तरफ ध्यान देंगे, उन्हें प्यार करेंगे। छुट्टी वाले दिन उन्हें कहीं बाहर ले कर जाएंगे।

16 वर्षीय ऋतु का कहना है कि यदि माता-पिता अपने बच्चों के साथ अच्छे संबंध की अपेक्षा रखते हैं तो उन्हें चाहिए कि वे बच्चों से बातचीत करने के लिए हमेशा तैयार रहें। बच्चों की बातें गौर से सुनें। कुछ का कहना है कि जब वे अपने अभिभावकों से अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करना चाहते हैं, उन्हें बताना चाहते हैं कि उन्हें कब डर लगता है तो उनकी बातों को फालतू कहा गया। बच्चों की बातों व प्रश्नों का हमेशा उत्तर देते रहेंगे तो उसे भावनात्मक सुरक्षा महसूस होगी और उसके व आपके संबंध और गहरे होंगे।

कुछ बच्चों ने घर में अकेले रहने में डर का अनुभव बताया, अत: घर की सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। बच्चे को हर परिस्थिति से निबटना सिखायें, जैसे, 'क्या करोगे तुम अगर घर में अकेले हो और यदि कोई अनजान आदमी दरवाजे पर आ जाए? या चाबी खो जाए। बचाव का इंतजाम पहले से ही कर लेना घर की सुरक्षा का सबसे अच्छा उपाय हैं। धुआं होने पर बजने वाला अलार्म या स्मोक डिटेक्टर तो प्रत्येक घर में लगा ही होना चाहिए। डुप्लीकेट चाबी पड़ोसी के पास छोड़ जाएं।

आपका बच्चा जब घर में अकेला होता है तो उसके पास आपसे व अन्य किसी से संपर्क रखने का साधन मात्र फोन ही होता है, अत: बच्चे को अपने ऑफिस के फोन नंबर, किसी खास व्यक्ति या सगे संबंधी के फोन नंबर अवश्य लिखवा दें जिससे आवश्यकता पडऩे पर वह उनसे संपर्क कर सके। आपातकालीन सहायता वाले फोन नंबर भी बच्चे को जरूर लिखवाएं। फोन पर बात करने का तरीका भी समझा देना चाहिए ताकि अनजान व्यक्ति को यह न पता चले कि वह घर में अकेला है।

आप अगर बच्चे को यह समझा देंगे कि हर स्थिति से बचाव की व्यवस्था आपने कर रखी है तो घर में अकेले रहने के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा। अगर माता इन सब बातों में आवश्यकताओं पर ध्यान दें तो अपने व्यवस्था के साथ-साथ अपने बच्चे के प्रति भी अपना दायित्व बखूबी निभा सकते हैं।

- शैली माथुर

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