पुनर्विवाह - एक महत्त्वपूर्ण फैसला

पुनर्विवाह - एक महत्त्वपूर्ण फैसला

तलाक लेकर अपने दुखद दांपत्य को अलविदा कहकर कमला ने चैन की सांस ली। अपने कड़वे अनुभव की वजह से शादी नाम की खूबसूरत और स्थाई संस्था से उसका विश्वास उठ चुका था। अब वह बस अपनी नौकरी के साथ अकेले रहकर खुश रहना चाहती थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। साल बीतते-बीतते उसे तन्हाई खलने लगी। कहीं जाती तो आसपास हंसते- खिलखिलाते जोड़ों और किलकारियां मारते बच्चों को देखकर उदास हो जाती।

इस बीच कमला के मनमोहक व्यक्तित्व से प्रभावित होकर कई पुरूषों ने उसके सामने पुनर्विवाह का प्रस्ताव रखा। माता-पिता ने भी बहुत समझाया, सहेलियां भी समझातीं कि सब पुरूष एक जैसे नहीं होते और न ही सब जगह परिस्थितियां एक सी होती हैं लेकिन वह अपने अतीत की कसैली पीड़ादायक यादों से उबर नहीं पा रही थी। बार-बार यही सोचती कि कहीं इस विवाह के बाद भी वैसा ही हुआ तो? पहली शादी में भी तो शुरू-शुरू में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था लेकिन कुछ दिनों बाद ही सब कुछ बिखरने लगा था।

इस तरह की कशमकश और अंतद्र्वंद्व प्रत्येक उस महिला तथा पुरूष के मन में पैदा होते हैं जो तलाक, वैधव्य अथवा विधुरता के बाद पुनर्विवाह की सोचते हैं। तलाक अथवा कम उम्र में जीवनसाथी की मृत्यु के बाद बाकी जीवन का एक बड़ा हिस्सा अकेले गुजारने का फैसला नितांत निजी होता है। कुछ लोग अकेले ही जीवन गुजारना पसंद करते हैं और वे कमोबेश अपने फैसले से संतुष्ट भी रहते हैं किंतु कुछ को बिना किसी साथी के जीवन गुजारना कठिन दिखाई देता है और वे फिर से घर बसाना चाहते हैं। एक प्रसिद्ध लेखिका कहती हैं, 'जिंदगी में सबको दूसरा मौका जरूर मिलना चाहिए और जब यह सामने हो तो इसे फौरन लपक लेना चाहिए।

वास्तव में जिंदगी में यदि एक बार विवाह असफल होता है अथवा असमय ही जीवन साथी का साथ छूट जाता है तो प्रत्येक व्यक्ति को हक है कि वह दोबारा विवाह करके नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करें।

समझौते और समन्वय से ही वैवाहिक जीवन सफल होता है किंतु पुनर्विवाह में इनका महत्त्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि पहली बार विवाह करने पर जहां एक दूसरे के बहुत से अवगुण तथा कमियां दांपत्य के प्रारंभिक खुमार, दैहिक आकर्षण तथा सैक्स के नए-नए अनुभवों के बीच काफी हद तक दब जाती हैं, वहीं पुनर्विवाह के मामले में इस तरह की गुंजाइश कम ही रहती है।

साथ ही, पहली बार विवाह करने पर लोग यही आशा करते हैं कि उनका विवाह सफल और स्थाई रहेगा, इसलिए वे उसे सफल और टिकाऊ बनाए रखने के लिए बराबर प्रयत्नशील भी रहते हैं किंतु दोबारा विवाह करते समय पहले विवाह के कड़वे अनुभव अथवा उससे जुड़ी यादें उन्हें अक्सर पूर्वाग्रही बना देती हैं और वे अपने साथी की प्रत्येक गतिविधि को संदेह के घेरे में रखने लगते हैं। अत: यदि आप दोबारा घर बसाने जा रही हैं, तो अपने भावी वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए पहले से तैयारी जरूरी है।

- अधिकतर पुनर्विवाह स्वेच्छा से न करके जरूरत अथवा मजबूरीवश किए जाते हैं, अत: विवाह से पहले यह अवश्य जांच लें कि आप एक दूसरे की जरूरतों के अनुसार योग्य हैं अथवा नहीं। मसलन, यदि आप बेऔलाद हैं और किसी बच्चे के पिता से शादी करने जा रही हैं तो अपनी मां की भूमिका के लिए अपने आपको तैयार पाती हैं या नहीं।

- आप जिनसे शादी करने जा रही हैं, उनके भी बच्चे हैं और आपके भी तो एक दूसरे के बच्चों की सहमति लेना जरूरी है।

- आप जिनसे पुनर्विवाह करने जा रही हैं, वे तलाकशुदा हैं तो पहले विवाह की असफलता के कारणों की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। यदि पति की कमियों की वजह से पत्नी ने तलाक की पहल की है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। यदि पत्नी की कमियों की वजह से पति ने तलाक दिया है तो आप उनकी पूर्व पत्नी की कमियों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। देखिए, कहीं आप में भी वही सब कमियां तो नहीं हैं।

- यदि आप दोनों तलाकशुदा हैं तो एक दूसरे के तलाक पर कागजी कार्यवाही की पूरी जांच-पड़ताल कर लें। कानून के दायरे में हर पहलू जायज हो, तभी विवाह की सहमति दें।

- यह सच है कि दूसरी शादी को कामयाब बनाने के लिए बहुत मेहनत तथा गंभीरता से प्रयास करने पड़ते हैं क्योंकि पुनर्विवाह में सिर्फ दो व्यक्ति ही नहीं जुड़ते बल्कि उनके साथ उनका पहला वैवाहिक अतीत भी जुड़ता है। अत: वैवाहिक जीवन की दूसरी पारी की शुरूआत ठोस धरातल पर करने के लिए आपको बहुत समझदारी से काम लेना होगा। कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। अत: यदि आप तलाकशुदा हैं तो अपनी पिछली असफलताओं से सबक लेकर नई जिंदगी में बहुत संभल-संभल कर कदम रखें।

- एक दूसरे के पहले विवाह की असफलताओं के कारणों को जानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करें। पिछली गलतियों को फिर से दोहराने की भूल न करें।

- यदि आप विधवा अथवा विधुर हैं तो ध्यान रहे कि आपके वर्तमान जीवन के बीच आपका अतीत कहीं भी न आए। हालांकि यह मुश्किल है कि जिस साथी के साथ आपने जीवन के इतने साल गुजारे हैं, उसका जिक्र भी न आए किंतु यदि ऐसा होता है, तो एक दूसरे की यादों के प्रति सम्मान तथा सद्भावना बनाए रखें।

- यदि आपका पहला दांपत्य जीवन सुखमय था तो उन सफल नुस्खों का प्रयोग अपने वर्तमान जीवन में अवश्य करें।

- यदि पुनर्विवाह के समय एक दूसरे के बच्चे भी हैं तो परस्पर एक दूसरे के बच्चों को समझने और स्वीकार करने का समय दें। एकदम से उनसे एक ईमानदार मां अथवा पिता की भूमिका की उम्मीद न पालें।

- पुनर्विवाह को लेकर कोई अपराध बोध न पालें और अपने आपको बेचारा या बेचारी बनाकर न पेश करें। आत्मविश्वास और एकदूसरे का विश्वास बनाए रखें।

- नरेंद्र देवांगन

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