पति की महिला-मित्र व आप

पति की महिला-मित्र व आप

हम भारतीय कहीं न कहीं रूढिय़ों से जुड़े हुए हैं। महिलाएं तो आधुनिक होने के बाद भी अपने भीतर वही पुरानी मानसिकता लिए बैठी हैं। नियति और मोक्ष एक ही संस्थान में कार्यरत हैं। एक दिन किसी कारणवश नियति को उसके घर जाना पड़ा। मोक्ष की पत्नी पहले से ही नियति से परिचित थी। उसने बहुत स्नेह व सम्मान से उसकी आवभगत की। आज नियति मोक्ष की ही नहीं, उसकी पत्नी की भी अच्छी मित्र है। दूसरी ओर मोहन और ऋतु को देखें। वे दोनों एक ही मुहल्ले में रहते हैं, उनकी दूर की रिश्तेदारी भी है किन्तु वे एक-दूसरे से अधिक बात नहीं करते। कभी जरूरी हो तो मतलब की ही बात करते हैं। मोहन की शादी के बाद किसी ने उसकी पत्नी से उन दोनों के विषय में न जाने क्या कुछ कह दिया कि पत्नी बिना मतलब घर में बवाल-मचा बैठी। ऐसी स्थिति-कभी भी किसी के साथ आ सकती है, अत: जरूरी है कि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए। सबसे पहले तो जरूरी है कि पति-पत्नी में विश्वास की डोर मजबूत हो। पति बाहर काम करते हैं, किसी से विचार मेल खा जाएं या कोई मन को भा जाए तो मित्रता होना स्वाभाविक ही होता है। पति की महिला मित्र को ले कर किसी तरह का बावेला न मचाएं अपितु उससे स्नेहपूर्वक व्यवहार करें। उससे मेल जोल बढ़ा कर उसे समझें। महिला मित्र का यही अर्थ नहीं होता कि वह आपके पति को आपसे छीनना अथवा दूर ले जाना चाहती है। आखिर उसका अपना भी घर-परिवार होता है, अत: पहले उसे समझने का प्रयास करें। रूढि़वादी मानसिकता से बाहर निकलें। हो सके तो स्वयं भी उसकी मित्र बन जाएं। इस तरह पारिवारिक मित्र होने पर उसे भी रिश्ते की गरिमा का अहसास रहेगा। संभव है आपके पति की अपेक्षा वह आपकी ही अच्छी मित्र बन जाए या आपको अपनी अच्छी मित्र मान ले। बातचीत हमेशा सद्भावनापूर्ण ढंग से करें। यदि किसी तरह का गुस्सा हो तो भी गुस्सा प्रकट न करें बल्कि शिकवा करें क्योंकि समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है। वार-त्योहार पर पति के साथ उसके घर जाएं, उसके घर-परिवार वालों से मिलें। कभी-कभी उन्हें अपने घर आमंत्रित करें। इस तरह दो परिवार एक दूसरे से परिचित होंगे और किसी तरह के अनिष्ट की भी आशंका नहीं रहेगी। यकीन मानिए, आप अपने इस व्यवहार से पति की भी प्रिया बन जाएंगी।
- कुसुम लता

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