कविता

कविता

वो जो वो हंस करके बात करते हैं,
मौहब्बत की खैरात करते हैं।
हम तो बस, उनके दीवाने हैं,
उनके लिए सजते-संवरते हैं।
तुमसे मिलना अच्छा लगता है,
मिलके बात करना अच्छा लगता है।
कम से कम झूठ तो न बोला करो यार,
तुम पे यकीन करना अच्छा लगता है।
चलो आज उनसे मुलाकात करेंगे,
उनकी सुनेंगे और बात करेंगे।
सुनते हैं बातें यार की वो, करते हैं आजकल,
हम भी उनको देखेंगे उनसे ही बनेंगे।
सुनते हैं उसने किसी से दिल को लगाया है,
इसलिए दुनिया में उनको सताया है।

मुहब्बत के दुश्मन अपनों में और गैरों में भी हैं,
इसीलिए उसने खुद को पत्थर बनाया है।
मैं उनकी आंखों से शराब पिया करता था,
उनकी याद में हंसता था रोया करता था।
एक दिन ऐसा हुआ वो मेरे दिल में रहने लगा,
वो भी क्या करता परेशान रहा करता था।
उनको देखता हूं और खुद को भूल जाता हूं,
ये सच है बिल्कुल मैं उनकी कसम खाता हूं।
वैसे तो सारे जहान में जलवा ही उनका है,
मैं तो उनके हुस्न को रब का उजाला कहता हूं।
चला यार उनके हुस्न की चर्चा करें,
उनकी कशिस और उनके जुनून की चर्चा करें।
वो 'हक' और पाकीजगी की बात अक्सर करते हैं,
हम भी उन जैसे बने, और सादगी रखा करें।
- नरेन्द्र बन्धु-भू.पू. लेखपाल

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