होली में

होली में

ले ढेरों सौगात साथ में
आयी प्यारी होली,
फूली नहीं समाती बिल्कुल
अब बच्चों की टोली।
पकते तरह-तरह के ढेरों
मनभावन पकवान,
खाते और खिलाते सब मिल
भर मीठी मुसकान।
उड़ा फुहारें रंग - बिरंगी
सबको सब नहलाते,
मिलते हैं जब गले
राम-भरत की याद दिलाते।
नाहक बुरा मान जो लेता
उससे बचकर रहते,
हंसी-खुशी की घडिय़ों में
संताप न झूठे सहते।
होली में
सबके जी को सहज अघाती
होली की ये हंसी-ठिठोली।
घर में पकते हैं ढेरों-से
सबके मन भावन पकवान,
कौन आज कितना खाता है-
करना लगता कठिन बखान।
धैर्य-बांध टूटा बूढ़े का
मिले देख बच्चों की टोली
गली-गली में जागे डेंके,
हारमोनियम, ढोलक, झाल,
सहज भाव से आपस में सब
खूब मिलाते हैं सुर-ताल।
कल तक रहे पराये-से जो
वे ही आज बने हमजोली।
प्यार भरे इस मधुरिम क्षण को
रखना मन में खूब संभाल,
जीवन के हर जटिल मोड़ पर
बने रहोगे नित खुशहाल।
हर सपना साकार करो तुम
देख रही जो आंखें भोली।
- रामसागर 'सदन'

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