क्या यही मेरे भारत की पहचान है..

क्या यही मेरे भारत की पहचान है..

धोखेबाजो का हर एक जगह मान है

क्या यही मेरे भारत की पहचान है||

जिसकी कोई इज्जत है ना मान है

जिसके पास सब ऐशो -आराम है

हर गुनाह का जो जग मे गुनाहगार है

काले धन से भरे जिसके भंडार है

कोई धर्म नही उसका बस;शैतान है

क्या यही मेरे भारत की पहचान है

झूठ के दम पर पैसा कमाता है जो

माल जनता का घर बैठ खाता है जो

लूट कर देश घर को सजाता है जो

ओर पब्लिक मे थोडा लुटाता है जो

आज उसका ये हमपर जो अहसान है

क्या यही मेरे भारत की पहचान है

जिसकी शह पर अपराध को बल मिले

रौंदकर जो फर्ज को अपने पैरो तले

जिसके आंतक से दुनियां डरने लगे

गर्भ मे कत्ल बच्चो का करने लगे

कितना कातिल बना आज इंसान है

क्या यही मेरे भारत की पहचान है

छोटे छोटे सुमन सब कुचलने लगे

आँख मे आँसू सबकी ढलने लगे

कतरे कतरे लहू के बिखरने लगे

नन्हे नन्हे परो को कतरने लगे

आज धरती सारी बनी शमशान है

क्या यही मेरे भारत की पहचान है

देश पर जो मिटे वो भी इंसान थे

दुशमनो के लिये एक तूफान थे

हिंदवासी की जो दुनियां मे शान है

वो भगत सिंह की कुर्बानी का अहसान है

आज घबराया सा दुश्मन परेशान है

हाँ यही मेरे भारत का सम्मान है

-सुमन प्रभा

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