कविता पानी

कविता पानी

बरखा-रानी, बरखा-रानी।

देखो बरसा कितना पानी।।

बादल भैय्या उमड़-घुमड़कर,

बरस गये हैं खूब।

जिधर देखिये कीचड़-कीचड़,

नहीं खिली है धूप।।

धरती हो गई धानी।

देखो बरसा कितना पानी।।1।।

जल से देखो भर गये,

सारे ताल तलैया।।

नदी-नहरें-नाले सारे,

भूखी-सूखी गैया।।

भीगे राजा-रानी।

देखो बरसा कितना पानी।।2।।

नई तरंगें-नई उमंगें,

नई-नई ये राहें

नई रोशनी पाकर हमने,

नई बनायी चाहें।।

हमें हुई है हैरानी।

देखो बरसा कितना पानी।।3।। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

स्कूल

जहां सुधरे अपनी भूल।

मेरा प्यारा सा स्कूल।।

जहां हमारे दोस्त सभी,

पढ़ते-हंसते-गाते।

नई किताबें, नई कापियां,

नई उम्मीदें पाते।।

यहां बने हैं कई रूल।

मेरा प्यारा सा स्कूल।।1।।

नई कल्पना, नई क्लास,

नये विषय का इतिहास।

नये सुअवसर नये सपने,

नया सत्र यह नया सुवास।।

मौसम कितना है कूल।

मेरा प्यारा सा स्कूल।।2।।

नये गुरू जी की शिक्षा,

समझ रहा है हर बच्चा।

बस्तेजी को संग में लेकर,

शुरू हुई अब वही परीक्षा।।

खिले हुए हैं सारे फूल।

मेरा प्यारा सा स्कूल।।3।।

- दुर्गाप्रसाद शुक्ल 'आजाद'

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