क्रांतिकारी संत

क्रांतिकारी संत

गुरुदेवश्री! आपने तो बहुत बडी

क्रांति की है फिर एक बार,

शायद आज तक की सबसे बडी क्रांति।।

जन्म के वक्त भी क्रांति की थी आपने,

मां समेत बिना किसी को पता चले ही

इस दुनिया में पदार्पण किया था आपने।

जन्म से लेकर आखिरी सांस तक कितनी क्रांतिया की हैं आपने,

यह शायद आप भी नहीं जानते गुरुवर!

लेकिन हम जानते हैं सब कुछ,

आपके हर पग पर क्रांति हुआ करती थी,

आप विहार करते थे तब भी

और आप स्थानापन्न रहते थे तब भी।

लेकिन इस बार तो आपने

कमाल ही कर दिया गुरुवर!

सल्लेखना या संथारा का मतलब

खुद अपनी ख्याति से ही

दुनिया को बता दिया आपने।

दवा और दुआओं के उपचार

खत्म होने पर ही

सल्लेखना ली जाती है,

यह जिनवाणी का मर्म

अपनी जान की बाजी लगाकर ही दुनियाभर को बता दिया आपने।

और संथारा को आत्मघात कहने वालों का मुंह,

सदा सदा के लिये बंद कर दिया है आपने

और फिर एक बार 'क्रांतिकारी संत' होने की प्रतीति दी है आपने।

जय हो क्रांतिकारी राष्ट्र संत मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज की।

- आदि कुमार भगवंतराव बंड,

नागपुर/शिकागो [अमेरिका ]

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