नारी की गरिमा

नारी की गरिमा

(1) नारी के इंगित में सृजन और प्रलय दोनों हैं।

(2) नारी स्नेह से प्रज्ज्वलित दीपशिखा है।

(3) नारी ही मंझधार और मंझधार की पतवार है।

(4) नारी सत्यम् शिवम् सुंदरम् की त्रिवेणी है।

(5) नारी का रहस्य और आकर्षण सभी के लिये पहेली है।

(6) नारी स्वाभिमान की अमर कला है।

(7) नारी की झंकार में विश्व के सारे स्वर हैं।

(8) नारी के रूप की मधुरता कभी फीकी नहीं पड़ती।

(9) नारी काव्य की अभिव्यक्ति है।

(10) सृष्टि का उश्वम कामिनी ही है और वही कला को जन्म देती है।

- अंजलि गंगल

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