Read latest updates about "कविता" - Page 1

  • क्रांतिकारी संत

    गुरुदेवश्री! आपने तो बहुत बडी क्रांति की है फिर एक बार, शायद आज तक की सबसे बडी क्रांति।। जन्म के वक्त भी क्रांति की थी आपने, मां समेत बिना किसी को पता चले ही इस दुनिया में पदार्पण किया था आपने। जन्म से लेकर आखिरी सांस तक कितनी क्रांतिया की हैं आपने, यह शायद आप भी नहीं जानते गुरुवर! ...

  • गजल

    मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था खाहिश-ए-खलीक इजहार करना चाहा था धुएं सी उड़ा दी आरजू पल में यार ने मेरे तेरा इस्तिकबाल शानदार करना चाहा था भले लोगों की बातें समझ न आईं वक्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तेरे काम आ सकूं इरादा था बस इतना सा तअल्लुक आपसे आबदार करना...

  • कविता: राखी का अटूट रिश्ता

    भाई और बहन हो जाओ तैयार, लो आ गया राखी का त्यौहार। ठंडी बारिश की बूँदे, सावन की सौंधी महक। भाई के आने की उम्मीद बहना को लगी है कसक। राखी और मिठाई से सजा होगा पूजन थाल, अक्षत रोली सोहेगा प्यारे भाई के भाल। अटूट रेशमी धागे से कलाई पे चमक आ जाएगी, भाई को कभी न भूलने का वचन अमर कर जाएगी। छोटे...

  • नारी की गरिमा

    (1) नारी के इंगित में सृजन और प्रलय दोनों हैं। (2) नारी स्नेह से प्रज्ज्वलित दीपशिखा है। (3) नारी ही मंझधार और मंझधार की पतवार है। (4) नारी सत्यम् शिवम् सुंदरम् की त्रिवेणी है। (5) नारी का रहस्य और आकर्षण सभी के लिये पहेली है। (6) नारी स्वाभिमान की अमर कला है। (7) नारी की झंकार...

  • कविताः मूंछें

    दादाजी की तगड़ी मूंछें, पापाजी की खिचड़ी मूंछें।पर अपने भैया हैं ऐसे,जिनकी बिगड़ी-बिगड़ी मूंछें।।दादा इन पर ताव दे रहे,पापा इनमें चाव ले रहे।लेकिन अपने भैया देखो,है मूंछों के भाव ले रहे।।काली और सफेद हैं मूंछें,प्यारी-प्यारी न्यारी मूंछें।असरदार और रोबदार हैं,हमारी और तुम्हारी...

  • कविता

    वो जो वो हंस करके बात करते हैं,मौहब्बत की खैरात करते हैं।हम तो बस, उनके दीवाने हैं,उनके लिए सजते-संवरते हैं।तुमसे मिलना अच्छा लगता है,मिलके बात करना अच्छा लगता है।कम से कम झूठ तो न बोला करो यार,तुम पे यकीन करना अच्छा लगता है।चलो आज उनसे मुलाकात करेंगे,उनकी सुनेंगे और बात करेंगे।सुनते हैं बातें यार...

  • कविता: परपीडऩ

    कई लोगों को दूसरों को तकलीफ पहुंचा कर विचित्र प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है!उनके पास इसका कोई कारण नहीं होताकोई रंजिश, कोई दुश्मनी, कोई लाग डांटदूर दूर तक किसी भी वजह का अस्तित्व नहीं होता!वे ऐसा क्यों करते हैं इसका कारण तो शायदमनोचिकित्सकों को भी बताने में कठिनाई हो!शायद ऐसी उनकी...

  • कविता: औरत

    पीड़ा जीवन भर सहती है, औरत जब तक भी रहती है।औरत जब पैदा होती है,तब से मरने तक रोती है।ये आंसू नियति रही सर्वथा,जीवन ही सारा व्यर्थ अन्यथा।मां के आंचल में खिलती है,पीड़ा जीवन भर सहती है।औरत जब तक भी रहती है।पलती है बाबुल के घर में,परिणय तक रहती पीहर में।छूटे बाबुल का आंगन पर,कब होता कोई...

  • गौ मां

    गोकुल कान्हा का धाम न होता। जग में गौ मां का नाम न होता,.. अमृत मंथन से निकली गौ माते,धर्मशास्त्र हैं यह बात बताते।पूजी जाती है गाय युगों से,संस्कृति यही भारत की सदियों से।धर्म में भी ऐसा काम न होता,गोकुल कान्हा का धाम न होता।जग में गौ मां का नाम न होता,.. दूध दही घी माखन खाते...

  • रेल का सफर

    जंगल, जंगल छुक - छुक करती, चल दी अब रेल! शहर - शहर और गाँव - गाँव, व्हिसल बजाती रेल! पर्वत , नदिया , नाले और भाग रहे खेल के मैदान! ! घूम रहे तेजी से सब कुछ, जैसे सर्कस के दरम्यान! मूंगफली और गरम समोसे , यह वड़े पाव का खेल ! छुक- छुक करती मैराथन जैसी , दौड़ी जाती रेल ! ! कोहरे की...

  • होली में

    ले ढेरों सौगात साथ में आयी प्यारी होली,फूली नहीं समाती बिल्कुलअब बच्चों की टोली।पकते तरह-तरह के ढेरों मनभावन पकवान,खाते और खिलाते सब मिल भर मीठी मुसकान।उड़ा फुहारें रंग - बिरंगीसबको सब नहलाते,मिलते हैं जब गलेराम-भरत की याद दिलाते।नाहक बुरा मान जो लेताउससे बचकर रहते,हंसी-खुशी की घडिय़ों...

  • बाल कविता: खाना-खाना

    सोच कर देखें कि आप खाना खाते हैं या निगलते हैं ?कई लोग जल्दी जल्दी खाते हैंवे खाना खाते नहीं, भकोसते हैं.खाना खाने का भी एक सलीका हैहर कौर को 32 बार चबाना है.जल्दी जल्दी खाने से वजऩ बढ़ता है।शरीर कई रोगों का शिकार होता है।मनुष्य भोजन का स्वाद नहीं ले पाता।न ही वह खाने का आनन्द उठाता है।वह...

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