सीआईए को लादेन का पता बताने वाले डॉक्टर के मामले की आज होगी सुनवाई

सीआईए को लादेन का पता बताने वाले डॉक्टर के मामले की आज होगी सुनवाई

इस्लामाबाद। अल कायदा आंतकवादी संगठन प्रमुख ओसामा बिन लादेन का पता बताने वाले पाकिस्तानी चिकित्सक शकील आफरीदी के मामले की आज पेशावर कोर्ट में सुनवाई होगी। बीबीसी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार पेशावर कोर्ट में शकी आफरीदी मामले की सुनवाई होगी और यह पहली बार होगा कि सुनवाई खुली अदालत में होगी। डॉ आफरीदी पर कभी भी उस अभियान में शामिल होने का औपचारिक तौर पर कोई आरोप नहीं लगा है लेकिन उन पर शुरू से ही शक किया जाता रहा था। अमेरिकी सरकार के इस खुलासे कि वह सीआईए के लिए काम करता था के बाद उनकी मुसीबतें बढ़ गईं थी। डॉ आफरीदी ने हमेशा यही कहा है कि उनके साथ मुकदमे के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। डॉ आफरीदी की गिरफ्तारी से अमेरिका पाकिस्तान से काफी खफा था और उन्होंने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में 33 मिलियन डालर की प्रतिवर्ष कटौती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंंप ने कहा था कि अगर वह राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो दो मिनट के भीतर डॉ आफरीदी को जेल से रिहा करा देंगे लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ है। डॉ आफरीदी को अमेरिका में हीरो माना जाता है लेकिन पाकिस्तान में कई लोग उसे गद्दार मानते हैं कि उसकी वजह से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपमान झेलना पड़ा था। डॉ आफरीदी खैबर पख्तूनखवा जिले में शीर्ष चिकित्सक था और उन्होंने अमेरिका समर्थित अनेक टीकाकरण कार्यक्रमों की निगरानी की है और ये काफी सफल भी रहे हैं। अमेरिकी मैरीन फोर्सेज ने लादेन को तीन मई 2011 को एक गुप्त अभियान में मार गिराया था और पाकिस्तानी सेना को इसकी भनक भी नहीं हुई थी। इसके 20 दिन बाद 23 मई को डॉ आफरीदी को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया था। डॉ आफरीदी ने 1990 में खैबर मेडिकल कालेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और उनकी पत्नी एबटाबाद के सरकारी स्कूल में ङ्क्षप्रसिपल थी लेकिन डॉ आफरीदी की गिरफ्तारी के बाद पूरा परिवार अज्ञात ठिकाने पर चला गया और उनके बारे में अभी किसी को कोई जानकारी नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने जनवरी 2012 को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था कि डॉ आफरीदी ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए काम किया था। पाकिस्तानी जांच के अनुसार जिस समय सीआईए ने जब डॉ आफरीदी को भर्ती किया था जो उसे खुद भी पता नहीं था कि उस अभियान का टारगेट कौन है। डॉ आफरीदी को 23 मई 2012 को लश्कर-ए-इस्लाम की आर्थिक मदद करने के आरोप में दोषी करार देते हुए जेल में डाल दिया गया था और 33 वर्ष की सजा सुनाई गई थी लेकिन बाद में उसकी अपील पर इस सजा को कम करते हुए 23 वर्ष कर दिया गया था।

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