भगोड़े माल्या को नहीं सताती देश की याद...कहा- भारत में याद करने जैसा कुछ भी नहीं है

भगोड़े माल्या को नहीं सताती देश की याद...कहा- भारत में याद करने जैसा कुछ भी नहीं है

सिल्वरटोन/ब्रिटेन। स्वदेश से दूर रहने वाले लोगों को अक्सर अपने सरजमीं की याद सताती रहती है, लेकिन बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाकर फरार हुए शराब कारोबारी विजय माल्या को अपने देश भारत में याद करने लायक कुछ भी नहीं दिखता है। शानोशौकत से भरी अपनी जिंदगी का दिखावा करने के लिए मशहूर रहे फॉर्मूला वन टीम फोर्स इंडिया के मालिक 61 वर्षीय विजय माल्या ने ब्रिटिश ग्रांड प्री में यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भारत की याद आती है, उसने कहा, बिल्कुल नहीं। याद करने जैसा कुछ भी नहीं है। बार-बार अदालत के चक्कर लगाने और यात्रा पर लगे प्रतिबंध के बावजूद आरामतलबी से जिंदगी गुजार रहे माल्या ने कहा कि वह अपनी मेहनत के फल का आनंद ले रहा है और तरह-तरह के खेलों का लुत्फ उठा रहा है। माल्या की डायरी में रॉयल एस्कॉट में घुड़दौड़, विंबलडन टेनिस चैपिंयनशिप और चैंपियंस ट्रॉफी क्रिकेट जैसे खेलों का नाम दर्ज है। माल्या ने कहा कि मेरा नजदीकी परिवार लंदन या अमेरिका में है। भारत में मेरा कोई परिवार नहीं है। जहां तक मेरे सौतेले भाई-बहनों की बात है, वे सभी ब्रिटिश नागरिक हैं। इसी कारण पारिवारिक रूप से मेरे याद करने लायक भारत में कुछ नहीं है। भारत माल्या के प्रत्यार्पण के लिए 1.4 अरब डॉलर से अधिक राशि की मांग कर रहा है। प्रशासन के अनुसार यह भारी भरकम राशि माल्या के दिवालिया हो चुके किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े कई रिणों का नतीजा है। माल्या ने खुद पर लगे इन आरापों से इनकार किया है। ब्रिटेन में 1992 से रह रहे माल्या के मुताबिक यह उसके खिलाफ साजिश है, जो पिछले कुछ समय से जारी है। माल्या ने कहा कि ऐसा नहीं है कि मैं भावनात्मक रूप से उतार-चढाव नहीं महसूस करता हूं। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। वास्तव में मुझे इसकी खुशी है कि यह मामला एक ब्रिटिश अदालत में चल रहा है। हमें इंतजार करना चाहिए और इसके फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए। माल्या के प्रत्यार्पण की सुनवाई चार दिसंबर तय की गयी है। मामले के निपटारे तक माल्या ब्रिटेन से बाहर नहीं जा सकता है, लेकिन उसे इससे कोई दिक्कत भी नहीं है। माल्या ने एक दशक पहले जॉर्डन की एक टीम को खरीदा था और उसे फोर्स इंडिया नाम दिया था। माल्या के अनुसार सही व्यक्ति का चयन और सही कार्यसंस्कृति के साथ उन्हें प्रोत्साहित करते रहना-संयोग या भाग्य नहीं है। यह प्रदर्शन है। मैं अब अपने 1० साल की मेहनत की कमाई का आनंद उठा रहा हूं।

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