अर्थतंत्र में समुद्र मंथन जारी, अमृत बाहर आने तक रिजर्व बैंक नीलकंठ की भूमिका निभाने का तैयार: गर्वनर पटेल

अर्थतंत्र में समुद्र मंथन जारी, अमृत बाहर आने तक रिजर्व बैंक नीलकंठ की भूमिका निभाने का तैयार: गर्वनर पटेल

गांधीनगर। रिजर्व बैंक के गर्वनर डा. ऊर्जित पटेल ने आज बैंकों के विनियामक शक्तियों को पूरी तरह से स्वामित्व निष्पक्ष (ऑनरशिप न्यूट्रल) किये जाने की वकालत करते हुए कहा कि बैंकों में घोटालों की घटनाओं से उन्हें भी गुस्सा आता है। डा. पटेल ने यह भी कहा कि देश के आधुनिक अर्थतंत्र में फिलहाल एक तरह से समुद्र मंथन जैसी प्रक्रिया जारी है और अमृत के बाहर निकलने तक किसी को विषपान करने वाले नीलकंठ की भूमिका भी निभानी होगी। उन्होने आज यहां गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में बैंक की विनियामक शक्तियों को स्वामित्व निष्पक्ष होना चाहिए विषय पर एक विशेष व्याख्यान के दौरान देश में बैंको विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों के विनियमन से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डा. पटेल ने बैंकों में धोखाधड़ी और घोटालों पर रोक के लिए तीन उपाय मजबूत प्रणालियों जांच/निगरानी/कानूनी रूकावट प्रणाली, बाजार अनुशासन प्रणाली और विनियामक अनुशासन प्रणाली की जरूरत बतायी। उन्होंने बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट में भी बदलाव की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि इसके जरिये विनियामक शक्तियों को पूरी तरह से स्वामित्व निष्पक्ष बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक से जुड़े लोग और वह खुद बैंकिंग क्षेत्र की धोखाधड़ी और घोटालों से गुस्सा, तकलीफ और दर्द महसूस करते हैं। डा. पटेल ने कहा कि रिजर्व बैंक ने गत 12 फरवरी को अनुपयोज्य आस्तियों यानी एनपीए को की पहचान और इनका समाधान करने के लिए जो व्यापक विनियामक कदमों की घोषणा की है वे आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था के समुद्र मंथन की तरह हैं। यह जब तक पूरा नहीं हो जाता और इसमें जब तक अमृत बाहर नहीं आ जाता तब तक निकलने वाले विष का पान करने के लिए हमे नीलकंठ की भूमिका निभाने का कर्तव्य पालन भी करना होगा। मै उम्मीद करता हूं कि अधिक से अधिक बैंक इस मंथन में असुरों नहीं बल्कि देवताओं के साथ रहेंगे।

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