केजरीवाल ने करोड़ों लोगों को गंदा पानी पिला अस्पतालों के चक्कर लगवाए: कीर्ति आज़ाद

केजरीवाल ने करोड़ों लोगों को गंदा पानी पिला अस्पतालों के चक्कर लगवाए: कीर्ति आज़ाद


नयी दिल्ली दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष कीर्ति आज़ाद ने आरोप लगाया है कि खुद दिल्ली जल विभाग संभाल रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 13 प्रतिशत परिवारों को मुफ्त पानी तो दिया लेकिन पूरी दिल्ली को पांच वर्षों तक गंदा पानी पिलाया और करोड़ों लोगों को अस्पतालों और डिस्पेंसरीज़ के चक्कर लगवाए।

श्री आजाद ने कहा कि लगातार एक महीने तक गंदा पानी पीने से लोगों को कैंसर तक हो सकता है और श्री केजरीवाल मुफ्त पानी के नाम पर लोगों को जहर पिला रहे हैं। आम आदमी पार्टी की तरफ से 2015 के घोषणापत्र में किए गए 70 सूत्रीय वादों में साफ जल के अधिकार कानून की बात की गयी थी जो सिर्फ जुमला निकला।

उन्होंने 20 हज़ार लीटर लाइफलाइन मुफ्त पानी देने के दावे पर कहा कि 2011 की जनगणना अनुसार दिल्ली में 33.41 लाख परिवार थे और 2019 में इस परिवार की संख्या लगभग 42 लाख होने का अनुमान है। दिल्ली सरकार के इस वर्ष के प्रथम क्वार्टर के आउटपुट-आउटकम रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में केवल 5.5 लाख परिवार ही हर महीना इस योजना का लाभ ले पा रहे हैं, जो दिल्ली के कुल परिवार का 13 फीसदी है।

श्री आजाद ने कहा कि घोषणापत्र में किए वादे के अनुसार 20 हज़ार लीटर लाइफलाइन मुफ्त पानी सभी को मुहैया कराने का वादा किया गया था। इस योजना पर सरकार लगभग 37.68 करोड़ रुपये प्रति महीना सब्सिडी के रूप में खर्च कर रही लेकिन इस योजना में सबसे गरीब परिवारों को लक्षित नहीं किया गया है।

उन्होंने साफ 'जल का अधिकार' देने के वादे को जुमला बताते हुए कहा कि लगभग पांच साल हो चुके है और इस वादे को पूरा करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड एक्ट में संसोधन का वादा केजरीवाल सरकार भूल गयी है। सत्तर में 67 सीट जीतने वाली पार्टी तो जब चाहती तब दिल्ली विधानसभा से यह संसोधन पास करा सकती थी। साफ 'जल का अधिकार' को अगर कानूनी दर्जा दे दिया गया होता तो दिल्ली जल बोर्ड विभाग संभाल रहे अरविंद केजरीवाल आज खुद जेल में होते। हाल ही में बीआईएस की तरफ से जारी रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित पानी दिल्ली के लोगों को मिल रहा है, दिल्ली का पानी सभी 19 मानकों पर विफल रहा।

श्री आज़ाद ने प्रजा फ़ाउंडेशन की तरफ से नवम्बर में जारी रिपोर्ट के हवाले से बताया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरीज़ में पिछले पांच वर्षों में डायरिया के 27.71 लाख, टाइफ़ाइड के 2.80 लाख व कोलेरा के 21 हज़ार मामले सामने आए।

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