अखिलेश प्रकरण पर विधानसभा में जमकर हंगामा...दूसरे दिन भी बाधित रही सदन की कार्यवाही

अखिलेश प्रकरण पर विधानसभा में जमकर हंगामा...दूसरे दिन भी बाधित रही सदन की कार्यवाही

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को प्रयागराज जाने से रोके जाने को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा और विधान परिषद के बजट सत्र की कार्यवाही बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी बाधित रही।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस ने एकजुटता का परिचय देते हुए जोरदार हंगामा किया और सरकार के कदम को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार अपनी अक्षमता को छिपाने के लिये लोकतंत्र का गला घोटने को अमादा है। श्री अखिलेश यादव को हवाई अड्डे पर रोके जाने के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया और उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे लिखे गये। सदस्यों ने इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किये जाने और सपा कार्यकर्ताओं पर लगाये गये मुकदमों को वापस लेने के साथ मामले की न्यायिक जांच की मांग की। विधानसभा का प्रश्नकाल विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया जबकि 1220 बजे तक सदन के दोबारा शुरू होने पर सपा के नरेन्द्र वर्मा ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के वार्षिकोत्सव में भाग लेने के लिये श्री यादव ने 12 फरवरी को प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित किया था लेकिन कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने की सूचना पर वह अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि के कार्यक्रम में जाने के लिये हवाई अड्डा रवाना हुये जहां एडीएम स्तर के अधिकारी ने उन्हे जहाज में सवार होने से रोक दिया। श्री वर्मा ने कहा कि उक्त अधिकारी इस संबंध में कोई भी सरकारी दस्तावेज दिखाने में अक्षम रहा था। श्री यादव के हवाई अड्डा रवाना होने से पहले जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उनसे घर में मुलाकात कर सरकार की मंशा से अवगत करा सकते थे, लेकिन छोटे स्तर के अधिकारी जहाज की सीढियों पर दीवार बन कर खड़ा हो गया, जो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री का सरासर अपमान है। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार के निर्देश पर प्रयागराज समेत राज्य के अन्य जिलों में घटना के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और नेताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया जिससे सांसद धर्मेन्द्र यादव समेत कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये। बसपा विधानमंडल के नेता लालजी वर्मा ने सपा सदस्य के तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि छात्रसंघ के शपथ ग्रहण समारोह में किसी राजनीतिक हस्ती का भाग लेना एक सामान्य घटना है। फिर भी अगर सरकार को इसमें कोई आपत्ति थी तो वह 27 दिसम्बर 2018 को सपा प्रमुख द्वारा दिये गये प्रस्तावित कार्यक्रम को निरस्त कर सकती थी। वास्तव में श्री यादव को रोकना सरकार की हिटलरशाही रवैये को दर्शाता है, जिसका हर स्तर पर विरोध किया जायेगा। उन्होने कहा कि पूर्व सांसद धर्मेन्द्र यादव के साथ पुलिस कर्मियों ने मारपीट की, जबकि सपा विधायक संग्राम सिंह को पुलिसकर्मियों ने लात घूसों ने पीटा। पुलिस की बर्बरता का आलम यह था कि एक कार्यकर्ता के नाखून खींच लिये गये। उन्होने घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले में दोषी प्रयागराज के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर देना चाहिये जबकि सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ सभी मामले वापस लेने की जरूरत है। सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सपा अध्यक्ष का मकसद प्रयागराज में अराजकता फैलाना था जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति को नुकसान पहुंच सकता था। अराजकता और भय का वातावरण फैलाने की किसी भी कोशिश को सरकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होने कहा कि यदि सपा कार्यकर्ता फिर से ऐसे अप्रिय हालात पैदा करते है तो उनके खिलाफ पहली की तुलना में और सख्त कार्रवाई करने में सरकार हरगिज नहीं हिचकेगी। श्री खन्ना का जवाब सुनते ही विपक्षी सदस्य भड़क गये और शोरशराबा करते हुये सदन की वेल पर आ गये। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बार बार उन्हे अपनी सीट पर बैठने की अपील की जिसे अनसुना कर दिया गया। आखिरकार 1240 बजे सदन की कार्यवाही एक बार फिर आंधे घंटे के लिये स्थगित करनी पड़ी। 1310 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो कांग्रेस के लल्लू सिंह ने सरकार पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुये दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई मांग की।

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