उप्र में धूमधाम के साथ हुई गोवर्धन की पूजा

उप्र में धूमधाम के साथ हुई गोवर्धन की पूजा

लखनऊ। भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा समेत पूरे उत्तर प्रदेश में गुरूवार को पूरे धूमधाम से गोवर्धन पूजा की गयी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्रदेव का घमंड तोड़ा था और गोकुल के लोगों की रक्षा की थी। गोवर्धन का त्योहार प्रदेश में पूरे धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर गोवर्धन पूजन हुआ। इस दौरान अन्नकूट का 56 भोग लगाया गया। जब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ग्रामीणों की रक्षा की तब उन्हें 56 तरह के अन्नकूट का भोग लगाया गया। गोवर्धन पूजा श्री कृष्ण की नगरी मथुरा, भगवान राम की नगरी अयोध्या, शिव की नगरी वाराणसी, संगमनगरी प्रयागराज, पौराणिक नगरी चित्रकूट, मुजफ्फरनगर, जौनपुर, बरेली तथा लखनऊ समेत प्रदेश की सभी हिस्सों में धूमधाम से की गयी। दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट पर्व की परम्परा मुख्यतया ब्रज और अयोध्या में प्रचलित है। ब्रज मंडल में अन्नकूट की परंपरा गोवर्धन पर्वत से अनुप्राणित है। ब्रजवासी भगवान कृष्ण के समय से ही गोवर्धन को भगवान विष्णु का प्रतीक मानकर इस पर्वत की पूजा करते है और पूजा के उपरांत गोवर्धन को भांति भांति के व्यंजनो का भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में वितरित करते है। मान्यता है कि लंका विजय कर राम के वापस अयोध्या आने की $खुशी में कार्तिक अमावास्या को दीपावली मनाई गई और अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आने पर उनकी महिमा महत्ता के अनुरूप भोज भंडारा का आयोजन स्वाभाविक था। इसके पीछे यह अवधारणा भी थी कि युद्ध की आपातकालीन परस्थितियों से लेकर वन जीवन के दौरान भगवान राम को राजशी पकवान से वंचित रहना पड़ा होगा। इसकी भरपाई के लिए उन्हें कई तरह के व्यंजन परोसे गए। तभी से यह परम्परा रामनगरी में अक्षुण्ण है।

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मथुरा में देश के कोने कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं के गोवर्धन परिक्रमा और पूजन से गिर्राज तलहटी में भक्ति रस की गंगा प्रवाहित हुई। रंग बिरंगी वेशभूषा में मैं तो गोवर्धन को जाऊं मेरे वीर नाय माने मेरो मनुआ-ए-छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है गोवर्धन महराज जैसे लोकगीत गाते हुए तीर्थयात्रियों द्वारा की जा रही परिक्रमा से जहां एक ओर भक्ति नृत्य कर उठी वहीं पूरा परिक्रमा मार्ग रंगबिरंगी माला का ऐसा रूप ले चुका था जिसका हर पुष्प दूसरे पुष्प से अलग था। अधिकांश तीर्थयात्री ठढ़ेसुरी परिक्रमा कर रहे थे, वहीं दर्जनों तीर्थयात्री दूध की धार की परिक्रमा कर रहे थे। मुकुट मुखारबिन्द मंदिर के सेवायत अर्जुन पुजारी ने बताया कि छह संतों ने तो आज कम से कम तीन परिक्रमा यानी 69 किलोमीटर की दूरी तय करने का संकल्प लिया। धार्मिक संगठनों द्वारा इस अवसर पर तीर्थयात्रियों के लिए पलक पांवड़े बिछा दिए गए थे। उनके द्वारा जगह जगह भंडारे लगाए गए, जहां पर विभिन्न प्रकार के व्यंजन परिक्रमार्थियों को परोसे जा रहे थे। मान्यताओं के अनुसार द्वापर में अपनी पूजा न किये जाने से कुपित इन्द्र ने जब अपने संवर्तक मेघों से ब्रज को डुबोने का आदेश दिया था उस समय श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी तथा श्यामसुन्दर के इस कार्य से प्रसन्न सुरभि गाय ने उनका दुग्धाभिषेक किया था। इसी परंपरा का निर्वहन आज दानघाटी मंदिर, गिर्राज मुकुट मुखारबिन्द मंदिर, गिर्राज मुखारबिन्द मंदिर समेत गोवर्धन के 24 से अधिक मंदिरों में कई मन दूध से गिर्राज का अभिषेक किया गया।

मथुरा में सबसे मनोहारी क्षण वह था जब सुबह तमाम विदेशी कृष्ण भक्त एवं विदेशी महिलाओं का समूह अपने सिर पर व्यंजनों की टोकरी रखकर भक्ति संगीत के मध्य गिर्राज के पूजन के लिए अपने आध्यात्मिक गुरू नरसिंह महाराज के नेतृत्व में शोभायात्रा के रूप में चला तथा गिर्राज महराज का एक घंटे से अधिक देर तक पूजन कर गौड़ीय मठ गोवर्धन वापस आया। इन भक्तों ने गौड़ीय मठ में आयोजित भंडारे में भी भाग लिया। मंदिरों में आनेवाले तीर्थयात्रियों में सकड़ी प्रसाद का वितरण हुआ तो गोवर्धन के अन्य मंदिरों में सकड़ी और असकड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। कुल मिलाकर गोवर्धन में भक्ति रस की वर्षा ऐसी हुई कि परिक्रमार्थी भावविभोर हो गए। जिलाधिकारी ने बताया कि तीर्थयात्रियों को गोवर्धन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त बसें भी चलाई गई थी। यातायात को व्यवस्थित करने के कारण जाम जैसी कोई समस्या नहीं हुई। उन्होंने बताया कि कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। प्राचीन धार्मिक नगरी वाराणसी में गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनायी गई। चाकचौबंद इंतजाम के बीच जगह-जगह भगवान श्री कृष्ण के जीवन पर आधारित भव्य झांकियां निकाली गईं, जिनमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

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गोवर्धन पूजा समिति की ओर से लहुराबीर से खिड़किया घाट तक गाजे-बाजे के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। इस दौरान कलाकारों ने श्री कृष्ण के विभिन्न रुपों की मनमोहक छवि पेश करने का प्रयास किया। यदुवंशियों एवं अन्य श्रद्धालुओं ने कौशल का भी प्रदर्शन किया गया। भगवान श्री कृष्ण की मनमोहक छवि देखने के लिए शोभा यात्रा मार्गों के आसपास महिलाएं एवं बच्चे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु का सैलाब उमड़ पड़ा। पुलिस की ओर से शोभा यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा एवं यातायात के पुख्ता इंतजाम किये थे। चित्रकूट में अन्नकूट गोवर्धन पूजा का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। मंदिरों में छप्पन भोग का प्रसाद लगाया गया। सवेरे से कीर्तन और राम नाम धुन के साथ अन्नकूट का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जानकीकुंड आश्रम अनुसुइया आश्रम बड़ी गुफा प्रमोद वन आमोद वन गुप्त गोदावरी में अन्नकूट का पर्व साधु संतों ने बड़े ही धूमधाम से मनाया और जगह जगह भंडारा हुआ। अन्नकूट के अवसर पर आश्रमों में देश और विदेश के भी श्रद्धालु एकत्रित हुए। जौनपुर में आदि गंगा- गोमती के पावन तट सूरजघाट पर स्थित प्राचीन मठ में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया। सूरजघाट के महंथ बाबा नरसिंह दास ने बताया कि दीपावली के दूसरे दिन यहां पर अन्नकूट पर्व परंपरानुसार महोत्सव के रूप में मनाया जाता है, यहां पर भगवान को भोग लगाने के लिए छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाये गए। छप्पन प्रकार के व्यंजनों से भगवन श्रीराम, माता सीता, भगवान श्रीकृष्ण व राधारानी को भोग लगाने के पश्चात महाप्रसाद के रूप में मठ पर आये साधू-संतो के साथ भक्तजनो को दिया गया। छप्पन प्रकार के व्यंजनों का प्रसाद ग्रहण कर लोग अपने घरों को प्रस्थान किये। उन्होंने कहा कि यहां पर यह परंपरा 1970 से चली आ रही है । इसके साथ ही जौनपुर नगर के बारीनाथ मठ पर महंथ जनसंत योगी देवनाथ ने भगवान गोवर्धन की विधि विधान से पूजा की। इस अवसर पर गोवर से बनाये गए गोवर्धन की लोगो ने परिक्रमा की।

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