हैदराबाद के दोहरे बम विस्फोट मामले में दो को फांसी...एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई

हैदराबाद के दोहरे बम विस्फोट मामले में दो को फांसी...एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई

हैदराबाद। हैदराबाद की एक अदालत ने गोकुल चाट और लुम्बिनी पार्क विस्फोट मामले में इंडियन मुजाहिदीन के दो आतंकवादियों को सोमवार को फांसी और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने शहर में हुए दोहरे बम विस्फोट मामले में आतंकवादी अनीक शफीक सैयद और मौहम्मद अकबर इस्माइल चौधरी को फांसी और कुछ आरोपियों को दिल्ली में शरण देने के दोषी तारिक अंजुम को आजीवन कारावास की सजा सुनायी। वर्ष 2007 में हुए इन विस्फोटों में 42 लोगों की मौत हो गयी और 50 घायल हो गये थे। अदालत ने चार सितम्बर को पुणे स्थित कम्प्यूटर सेंटर के मालिक 36 वर्षीय अनीक शफीक सयीद और मोबाइल फोन रिपेयर करने वाले पुणे के ही 35 वर्षीय मोहम्मद अकबर इस्माइल चौधरी को दोषी ठहराया था। हैदराबाद के गोकुल चाट और लुम्बिनी पार्क में 25 अगस्त 2007 को विस्फोट की ये घटनायें हुई थीं। अनीक को सचिवालय के सामने लुम्बिनी पार्क में बम रखने और अकबर को दिलसुखनगर में बम रखने का दोषी ठहराया गया। तारिक को अभियुक्तों को दिल्ली में शरण देने का दोषी पाया गया। इस मामले के दो अन्य आरोपी फारुक शरफुद्दीन और मोहम्मद सादिक इसरार शैक को साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया। तीन अन्य आरोपी इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक रियाज भटकल, उसका भाई इकबाल भटकल और आमिर खान फरार हैं। हैदराबाद में सचिवालय से कुछ मीटर दूर लुम्बिनी पार्क में लेजर शो सभागार और गोकुल चाट केन्द्र में 25 अगस्त 2007 को एक साथ विस्फोट किये गये थे। चेरापल्ली केन्द्रीय कारागार में स्थापित विशेष अदालत में दोनों पक्षों की ओर से इस मामले की सात अगस्त को जिरह पूरी हुई थी। कारागार के अंदर एक कक्ष में स्थापित की गई, यह विशेष अदालत नामपल्ली अदालत से जून में हस्तांतरित की गयी थी। तेलंगाना पुलिस की खुफिया शाखा ने इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध अदालत में तीन आरोप पत्र दाखिल किये थे। मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) की अदालत ने अगस्त 2013 को चार आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय किये थे। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज किये गये थे। दिलसुखनगर में पैदल पुल के नीचे एक बम पाया गया था जिसमें विस्फोट नहीं हुआ था। आरोपियों को महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते ने अक्टूबर 2008 में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें गुजरात पुलिस के हवाले किया गया। आरोपियों को यहां चेरापल्ली केन्द्रीय कारागार में रखा गया। आरोपियों के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई के दौरान 170 गवाहों से जिरह की गयी। इस मामले में अदालत के आज आने वाले फैसले के मद्देनजर हैदराबाद के सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे।

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