गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में भाजपा की करारी हार...यूपी को आया 'बुआ-भतीजे' का साथ पसंद

गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में भाजपा की करारी हार...यूपी को आया बुआ-भतीजे का साथ पसंद

गोरखपुर/फूलपुर। उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर भाजपा को करारी हार का सामना करना पडा। ये दोनों सीटें समाजवादी पार्टी ने भाजपा से छीन ली हैं। गोरखपुर व फूलपुर की जनता ने 'बुआ-भतीजे' की जोडी पर अपनी मुहर लगाकर सपा प्रत्याशियों को जीत दिलाई है, जिससे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिये सपा-बसपा का गठबंधन होने की प्रबल सम्भावना बन गई है। भाजपा का गढ माने जाने वाली गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रवीण निषाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी भारतीय जनता पार्टी के उपेन्द्र शुक्ल को 21881 मतों से पराजित किया, जबकि फूलपुर लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के ही नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी भारतीय जनता पार्टी के कौशलेन्द्र पटेल को 59460 मतों से पराजित किया।
गोरखपुर निर्वाचन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सपा को 456513 मत मिले जबकि भाजपा को 434632 वोट प्राप्त हुए। सपा को यहां से पहली बार जीत हासिल हुई है। कांग्रेस उम्मीदवार डा. सुरहिता करीम 18844 मतों से तीसरे स्थान पर रहे। गोरखपुर से इन तीन पार्टी उम्मीदवारों सहित कुल 10 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। इस संसदीय क्षेत्र में कुल 19 लाख 14 हजार मतदाता थे, जिसमें 47.74 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां से लगातार पांच बार सांसद चुने गए थें और उनके पहले दो बार योगी के गुरू महंत अवेद्यनाथ यहां से सांसद थे। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के बाद उनके इस्तीफे से खाली हुई इस लोकसभा सीट पर उपचुनाव कराए गए है। सपा उम्मीदवार को बहुजन समाज पार्टी, पीस पार्टी और निषाद पार्टी का समर्थन हासिल था। श्री योगी के समर्थक राजेन्द्र सिंह कहते हैं कि गोरक्षपीठ से उम्मीदवार नहीं होने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा। इस सीट पर दस बार गोरक्षपीठाधीश्वर चुनाव जीत चुके हैं। वर्ष 1967 में तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर मंहत दिग्विजय नाथ ने जीत हासिल की थी। उनके निधन से 1971 में यहां उपचुनाव हुआ और मंहत अवैद्यनाथ विजयी रहे। वर्ष 1989 में वह हिन्दू महासभा के टिकट पर संसद पहुंचे, लेकिन 1991 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। वर्ष 1996 में भी महंत अवैद्यनाथ सांसद बने। वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ ने पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वह 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी जीते। उनके मुख्यमंत्री बने एक वर्ष भी नहीं हुए थे कि उन्हीं के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर भाजपा चुनाव हार गयी। वर्ष 2014 में योगी आदित्यनाथ को पांच लाख 39 हजार 127 वोट मिले थे। उन्होंने सपा की राजमती निषाद से तीन लाख 12 हजार 783 मतों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। उपचुनाव में मिली हार से श्री योगी के विरोधी कहने लगे हैं, 'मुख्यमंत्री अग्निपरीक्षा में फेल हुए हैं। जनता ने उन्हें नकार दिया है। श्री योगी को आत्ममंथन करना चाहिये।' जानकारों की माने तो गोरखपुर के उपचुनाव में दलित, पिछडे और मुस्लिम सपा उम्मीदवार के पक्ष में लामबंद हुए हैं। गोरखपुर में गोरक्षपीठ मंदिर के प्रति लोगों में काफी आस्था है। भाजपा उम्मीदवार मंदिर का नहीं होने की वजह से हिन्दू जातियों में बंटे। ज्यादातर जातियों ने सपा का समर्थन किया। भाजपा के वोटर अपेक्षाकृत शहरी अधिक होते हैं। वे वोट डालने कम निकले। दूसरी ओर योगी सरकार में शामिल सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि करीब 50 फीसदी आबादी (पिछड़ों) की उपेक्षा हो रही है। ऐसे में रिजल्ट तो यही आना था। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री और सत्तारुढ भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष अगडी जाति से हो गया। पिछड़ों और दलितों का महत्व घटा है। उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जागरुकता का आलम यह है कि यहां लोग चाय बाद में पीते हैं, अखबार पहले पढ़ते हैं। अब किसी वर्ग को बहुत दिनों तक उपेक्षित नहीं रख सकते हैं।
फूलपुर: उत्तर प्रदेश में फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कौशलेन्द्र पटेल को 59460 मतों से पराजित किया। उप चुनाव में सपा को 342922 मत मिले, जबकि भाजपा को 283462 मतदाताओं ने समर्थन दिया। कांग्रेस उम्मीदवार मनीष मिश्रा को 19353 मत प्राप्त हुए जबकि जेल में रहकर चुनाव लड़े निर्दलीय अतीक अहमद को 48094 वोट मिले। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2014 में भाजपा उम्मीदवार के रुप में 218308 मतों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरु की सीट रही फूलपुर में आजादी के बाद भाजपा को पहली बार जीत मिली थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपचुनाव में भाजपा की हार स्वीकार करते हुए जीते उम्मीदवारों को बधाई दी।

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