एसिडिटी: खानपान ही दोषी

एसिडिटी: खानपान ही दोषी

खट्टी डकारों को ही डॉक्टरी शब्दों में एसिडिटी कहते हैं। हमारा खानपान ही इसके लिए दोषी है और बेहतर दवा भी खानपान ही है। हमारे खानपान में दो चरित्र के खानपान मौजूद हैं। इनमें से कुछ क्षारीय चरित्र के हैं तो कुछ अम्लीय चरित्र के हैं।
पेट में भोजन को पचाने के लिए स्वयंत: पाचक अम्ल मौजूद हैं। जब खानपान में गड़बड़ी करने या अम्लीय चरित्र के भोजन को अधिक करने से पेट में अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है तब अम्ल की बहुलता ही एसिडिटी के रूप में परेशान करती है। खट्टी डकारें आती हैं। छाती में जलन होती है एवं अपच की परेशानी होती है।
कारण:- वर्तमान जीवनशैली से हमारा खानपान प्रभावित हुआ है। हम सदैव हड़बड़ी में रहते हैं। दिन भर आपाधापी मची रहती है। हम जरूरत के मुताबिक सो नहीं पाते हैं। शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। भूख लगने पर समय पर भोजन नहीं कर पाते और जब अवसर मिलता है कुछ भी ठूंस-ठूंस कर गले तक खाते हैं। कार्यस्थल में फास्ट फूड, चाय, काफी, कोल्डड्रिंक्स को पीने का भरपूर मौका मिलता है। इन सबकी प्रधानता ही पेट में एसिडिटी को पनपने का मौका देती है।
भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव एवं हड़बड़ी के कारण हम ज्यादा देर भूखे पेट रहते हैं। फास्ट फूड जैसे गरिष्ठ चीज बर्गर, पैटीज, पिज्जा, नूडल्स, समोसा, पकौड़ा पावभाजी, इडली, डोसा आदि को खाने में ऐसे समय पर महत्त्व देते हैं। कई बार चाय काफी, कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं। रात को डटकर खाते हैं। यही एसिडिटी का कारण बनता है।
लक्षण:- खट्टी डकारें आना, पेट और छाती में जलन, सिर दर्द, ब्लड शुगर, थकान, भूख न लगना, जी मिचलाना जैसे लक्षण प्रकट होते हैं।
बचाव:- भूख लगने पर तनाव मुक्त शांत चित्त होकर चबा-चबा कर संतुलित मात्र में धीरे-धीरे खाएं। एक बार अधिक न खाकर दो बार भोजन व दो बार नाश्ता करें। एक भोजन दोपहर के समय तो दूसरा रात में करें। प्रात: 8-9 बजे के आसपास नाश्ता लें। एवं सायं 4-6 बजे के बीच स्नैक्स लें। तला, भुना न खाएं या कम खाएं। सलाद अंकुरित अनाज, छाछ, फल या फलों का जूस, नींबू पानी लें।
24 घंटे की अवधि में 10 से 12 गिलास पानी पिएं। योग, ध्यान, प्राणायाम, व्यायाम करें। चाकलेट, चीज, चाय, काफी, कोल्डड्रिंक्स, फास्ट फूड, सिगरेट, तंबाकू, सुपारी, शराब का पूर्ण त्याग करें। अधिक मीठा न खाएं। सप्ताहांत के दिन विश्राम कर लें। यदि फिर भी एसिडिटी से राहत न मिले तो डॉक्टर की शरण में जाएं पर अपनी मर्जी से एसिडिटी भगाने वाली गोली कदापि नहीं लें।
अम्लीय चरित्र के खाद्य पदार्थ जिसे कम खाएं:- पालिश्ड चावल, मैदा, पास्ता, चोकर विहीन आटा, अरहर समेत समस्त दाल, पका हुआ पालक, खट्टे फल, कोल्डड्रिंक्स, चाय, काफी, पेस्ट्री, केक, कुकीज, शराब, डिब्बाबंद फलरस, मीठे पदार्थ, अचार, पापड़, तले-भुने समस्त पदार्थ, मैदे से बनी समस्त वस्तुएं, बादाम, ताजा नारियल, सिरका, इडली डोसा, क्रीम, बटर, चाकलेट, काफी आदि कम खाएं।
क्षारीय चरित्र के खाद्य पदार्थ जिसे ज्यादा खाएं:- ज्वार, बाजरा, अंकुरित दाल, सभी सब्जियां, पत्तागोभी, बैंगन, भिंडी, मशरूम, कद्दू, लौकी, खीरा, मटर टमाटर, गाजर, ककड़ी, प्याज, नींबू, संतरा, पपीता, सेब, तरबूज, आम, केला, अंगूर, चीकू , हर्बल चाय, अदरक वाली चाय, सलाद आदि।
- सीतेश कुमार द्विवेदी

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