घरेलू औषधि का काम करते हैं करेला और आंवला

घरेलू औषधि का काम करते हैं करेला और आंवला

करेला
करेला कितना ही कड़वा या नीम चढ़ा क्यों न हो, उसकी उपयोगिता का इतिहास असंदिग्ध है। कितने ही रोगों की रामबाण दवा है यह करेला। भारतीय होम्योपैथिक औषधावलि में वर्णित मोमरंडिका कैरष्टिया होम्योपैथिक औषधि करेले से ही बनी है।
गठिया - करेले के रस को गठिया पर लगाने व करेले की सब्जी खाने से इसमें लाभ होता है। जोड़ों में दर्द हो तो करेले के पत्तों के रस की मालिश करें।
रक्तशोधक - साठ ग्राम करेले का रस नित्य कुछ दिनों तक सेवन करने से शरीर का गंदा रक्त साफ हो जाता है।
मधुमेह - रोगी को 15 ग्राम करेले का रस 100 ग्राम पानी में मिलाकर रोज तीन बार करीब तीन महीने तक पिलाना चाहिए।
रक्तश्रावी बवासीर - एक चम्मच करेले के रस में शक्कर मिलाकर पीने से लाभ होता है।
तिल्ली - करेले का रस 25 ग्राम पानी में मिलाकर नित्य तीन बार पीने से तिल्ली कट जाती है।
आंवला
- हाथ पैर में जलन होने पर गन्ने के रस में एक चम्मच आंवला चूर्ण मिलाकर लें।
- अम्लपित्त होने पर 2-6 ग्राम आंवला चूर्ण एवं समान मात्र में शर्करा मिलाकर लें।
- जीभ में छाले हों तो भोजन के बाद आंवले का चूर्ण लें।
- प्रमेह के रोगी आंवला चूर्ण एवं हल्दी समान मात्रा में मिलाकर नियमित लें।
- मूत्रदाह एवं मूत्र के साथ रक्त आने पर आंवले का रस 5-10 मि.ग्रा. प्रयोग करें।
- नेत्रों में जलन होने पर आंवले को रात भर पानी में भिगो कर उस पानी से आंखों को धोएं।
- बालों को चमकदार बनाने के लिए आंवले के फल को रात भर पानी में भिगो दें, सुबह सिर धो लें।
-मीना जैन छाबड़ा

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