हरड़ के विभिन्न प्रकार

हरड़ के विभिन्न प्रकार

जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण वनौषधियों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। नैतिक पतन की वजह से कुछ लोग असली द्रव्यों के नाम पर नकली और घटिया द्रव्य बेच कर खूब पैसे कमा रहे हैं। ऐसे व्यापारियों व दुकानदारों से सावधान रहने की जरूरत है। हरड़ एक महत्त्वपूर्ण वनौषधि है। इसे हरीतकी भी कहा जाता है। कुछ धूर्त पंसारी हरड़ के नाम पर कोई अन्य औषधि ही दे देते हैं। यहां असली हरड़ की पहचान बताई जा रही है ताकि हरड़ खरीदते समय आप ठगे न जा सकें। हरड़ को हरीतकी और हर्रे आदि नामों से जाना जाता है। बाजार में तीन प्रकार के हरड़ मिलते हैं:-
1. बड़ी हरड़
2. पीली हरड़
3. छोटी हरड़ या जंगी हरड़
वैसे तो आयुर्वेद में हरड़ की सात जातियां बतलाई गई हैं लेकिन बाजार में इसकी तीन जातियां ही मिलती हैं।
1. बड़ी हरड़:- बड़ी हरड़ का आकार लम्बा गोलाकार और रंग पीला होता है। इसकी लम्बाई 4-5 अंगुल बड़ी होती है। यह सस्ती होती है इसलिए पंसारियों के यहां आसानी से मिल जाती है। कुछ बेइमान पंसारी जलापा के कंद को बड़ी हरड़ के नाम से बेचते हैं। कुछ व्यापारी जलापा और हरड़ चूर्ण को मिलाकर 5-6 तोले वजन का कृत्रिम हरड़ बनाकर बेच देते हैं। असली हरड़ सा दिखाने के लिए वे इस पर पालिश कर देते हैं।
2 पीली हरड़:- बड़ी हरड़ पीले रंग की, डेढ़ इंच लंबी तथा आधा इंच चौड़ी होती है तथा इस पर पांच रेखाएं होती हैं।
3. छोटी हरड़:- छोटी हरड़ बिना पका फल होती है। छोटी हरड़ के लिए फल में गुठली बनने से पहले तोड़ लिया जाता है और उसे मिट्टी से ढक दिया जाता है। 3-4 दिन में स्वाभाविक गर्मी से अधपका होने से इसका रंग काला हो जाता है। सुखाने पर यह काले रंग की हो जाती है। बड़ी और छोटी हरड़ दोनों एक ही वृक्ष के फल होते हैं। डेढ़ से 2 तोला वजन की बड़ी हरड़ को उत्तम माना गया है। पानी में डूब जाने वाली छोटी हरड़ को उत्तम माना जाता है। काले रंग की छोटी हरड़ को सबसे अच्छा माना गया है। व्यवहारिक दृष्टि से हरड़ 3 प्रकार की होती है:- 1. बड़ी हरड़ 2. पीली हरड़ 3. छोटी हरड़, तीनों हरड़ एक ही वृक्ष के फल होते हैं जो अवस्था भेद के अनुसार भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। हरड़ के वृक्ष से कच्चे कोमल फल गुठली होने से पहले स्वयं गिर जाते हैं या तोड़कर सुखा लिए जाते हैं। वही छोटी हरड़ है। गुठली होने के बाद प्रौढ़ अधपके फल तोड़ लिए जाते हैं। वे पीली हरड़ हैं। पूरी तरह पके फल को बड़ी हरड़ कहा जाता है।
- राजा तालुकदार

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