वृद्धावस्था में आहार

वृद्धावस्था में आहार

देश की एक चौथाई आबादी वृद्धों की है जो 60 वर्ष से ऊपर की आयु के हैं। यहां की औसत जीवन आयु में वृद्धि हुई है। अब चिकित्सा सुविधा के चलते 75 वर्ष या उससे अधिक आयु तक लोग जीवित रहते हैं।
वैसे यहां के वृद्ध 60 वर्ष की आयु के उपरांत अपना पूरा जीवन जी लिया मानकर अपने आपको निष्क्रिय व निठल्ला कर लेते हैं। खाने-पीने व बचे जीवन के प्रति उदासीनता बरतने लगते हैं। अपनी गतिविधियां सीमित व न्यून कर लेते हैं जबकि शरीर के साथ ऐसा नहीं हुआ रहता। वह और जीवित रहने में सक्षम होता है।
जीवन के सभी पड़ावों में खान पान की जरूरत बनी रहती है। भले ही खाने के लिए न जिएं पर जीवित रहने के लिए खाना पड़ता है। इस आयु में शारीरिक व मानसिक विकास थम जाता है एवं शारीरिक क्रियाएं धीमी पड़ जाती हैं अतएव वृद्धों को ऐसे में बहुत कम मात्रा में एवं उपयुक्त पौष्टिक भोजन की जरूरत पड़ती है ताकि उनका शरीर एवं उसकी शारीरिक क्रियाएं चलती रहे।
उचित पोषण मूल्य का भोजन सेहतमंद रहने की कुंजी है। हर आयु अवस्था में कम ज्यादा खानपान की जरूरत बनी रहती है। बुढ़ापे में कम मात्रा में एवं पौष्टिकता से परिपूर्ण भोजन उसकी धीमी शारीरिक क्रियाओं को भी निष्पादित करने में सहायक सिद्ध होता है। फिर भी खान पान की कुछ बातों को सदैव ध्यान रखना चाहिए।
भोजन कम कैलोरी वाला हो:-
इस उम्र में कम ऊर्जामान वाले भोजन की जरूरत पड़ती है। अतएव तले हुए या ज्यादा तेल से बने हुए खाद्य पदार्थ कम लेने चाहिए। साथ ही मिठाई, गुड़ व शक्कर के सेवन में कमी करनी चाहिए ताकि शरीर एवं सेहत सही रहे। शरीर का भार न बढ़े और न शरीर पर भोजन भारी न पड़े।
कम मात्रा में प्रोटीन भी जरूरी:- भोजन में दैनिक कम मात्रा में प्रोटीन का समावेश होना चाहिए। यह सभी दालों में एवं दूध के माध्यम से मिल जाता है। भोजन के साथ दाल एवं रात्रि में एक कप या एक पाव दूध लेना चाहिए। यह प्रोटीन कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत करता है।
वसा भी कम मात्रा में हो:- भोजन में वसा भी कम मात्रा में होनी चाहिए। इससे जरूरत के योग्य वसा की पूर्ति हो जाएगी। इसकी अधिकता को शरीर पचा नहीं पाता।
कैल्शियम से हड्डियां मजबूत होती हैं:- इस उम्र में कमजोर हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम भी जरूरी होता है जो दूध, दाल, दही, पनीर में मौजूद होता है। यह कैल्शियम शरीर व जोड़ों के दर्द से राहत भी दिलाता है। मलाई रहित दूध एक कप या एक पाव प्रतिदिन रात को हल्का गर्म अवस्था में लेना चाहिए।
लौह तत्व खून के लिए जरूरी:- खून का बनना व स्वमेव समाप्त होना जीवन के हर पड़ाव में साथ साथ चलता रहता है। यह हमें हरी साग सब्जियों से मिल जाता है जबकि फल-फूल से विटामिन, खनिज तत्व एवं अन्य जरूरत की चीजें मिल जाती हैं। इनका उपयुक्त सेवन करना चाहिए।
रेशेदार आहार पाचन में मददगार:- भोजन में फाइबर अर्थात रेशेदार चीजों का समावेश भी जरूरी है। ये पाचन में सहायक होते हैं एवं पेट को साफ रखते हैं। ये शुगर को तेजी के साथ बढऩे नहीं देते एवं कोलेस्ट्राल को नियंत्रित रखते हैं। यह फाइबर हमें पूर्ण अनाज, चोकर समेत आटा, एवं छिलकों काली दालों तथा फल-फूल, सब्जी, सलाद के माध्यम से मिलता है।
विशेष बातें:- दूध सीमित मात्रा में लें नहीं तो कब्ज बनेगा। रेशेदार वस्तुएं भी सीमित मात्रा में हों। जितना पचा सकें, उतना ही खाएं। तेल, नमक, शक्कर, की मात्रा न्यून हो। पानी थोड़ा-थोड़ा करके भरपूर पिएं। किसी भी आवेग को नहीं रोकें। धूम्रपान, नशापान, कोल्ड ड्रिंक, फास्ट फूड कदापि न लें। अचार, चटनी, मिर्च, मसाला भी कम लें।
दिन में ज्यादा न सोएं। कफ बन सकता है। रात का भोजन दिल की तुलना में कम व हल्का हो। हल्का फुल्का श्रम वाला काम, टहलना, घूमना मिलना जारी रखें। क्रोध तनाव व निराशा से दूर रहें। सदकर्म को जारी रखें।
सबसे घुल-मिलकर रहें। यदि कोई शारीरिक परेशानी है तो डॉक्टरी निर्देशों का पालन करें। बुढ़ापे को सुखमय बनाएं।
- सीतेश कुमार द्विवेदी

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