व्यर्थ में डाक्टरी न करें

व्यर्थ में डाक्टरी न करें

हमारे देश की एक विशेषता यह भी है कि यहां सलाह जरूरत से ज्यादा उपलब्ध है। अनुभवी लोगों की बात थोड़ी अलग है। फिर भी अपना इलाज खुद करने की चेष्टा करना हितकारी नहीं कहा जाएगा। मेडिकल स्टोर्स से लोग बगैर डॉक्टर के परामर्श से अंग्रेजी दवाइयां खरीद लाते हैं और अपना इलाज व दूसरों का इलाज भी शुरू कर देते हैं। कुछ पल के लिए आराम भी मिलता है। यहीं हमें कन्फयूजन हो जाता है किन्तु हम हैं कि अपनी गलती मानने को तैयार नहीं होते।

अपने मन से अथवा किसी के कहे अनुसार दवाइयों का सेवन जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है। अच्छा होगा यदि आप 'विक्स' और 'बाम' तक ही अपने को सीमित कर लें। बुखार आने पर कोई भी टिकिया (विज्ञापनवाली) बगैर डॉक्टरी परामर्श के न खायें। कोई भी मलहम कहीं भी न लगाएं।

मोच की स्थिति हो अथवा सूजन की पीड़ा, पेट दर्द हो अथवा कान की तकलीफ, ऐसी अवस्था में पैसे बचाने का प्रयास या फिर स्वयं को ही डॉक्टर सिद्ध करने की चेष्टा बड़ी मुसीबत में आपको फंसा सकती है। हो सकता है तब डॉक्टर का बिल देखकर आप को हार्ट अटैक भी आ जाए। भीख भी मांगनी पड़े।

कमजोरी छुपाने की जरूरत नहीं, न ही उसे दूर करने के लिए खुद ही दवा-दारू अथवा टॉनिक का चयन करना। खुद ही कुछ करना चाहते हैं तो फलों पर खर्च कीजिए। हरी ताजी सब्जियों, सलाद पर पैसा बहाइये। दवा की नौबत न आये, परहेज कीजिए किन्तु ध्यान रहे कि यहां भी डॉक्टरी परामर्श जरूरी है।

पेट दर्द हो अथवा जोड़ों का दर्द, डॉक्टर ही सही जांच कर सकता है और संभव इलाज भी। नुस्खे और फार्मूलों के इस्तेमाल से बचें। यहां दूरदर्शिता जरूरी है। सच कड़वा होता है और कड़वाहट जरूरी भी है क्योंकि तभी हमें मिठास का महत्त्व भी समझ में आता है। आप के साथ मैं भी पूरा विश्वास करूंगा कि प्रयास यही होगा कि हम व्यर्थ में डॉक्टरी नहीं करेंगे।

- राजेन्द्र मिश्र 'राज'

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