नृत्य एक खूबसूरत व्यायाम है

नृत्य एक खूबसूरत व्यायाम है

मोटापा एक औरत के लिए अभिशाप से कम नहीं। औरत के लिए खूबसूरत होना बहुत अहमियत रखता है। वह चाहे माने या न माने पर हर औरत खूबसूरत दिखना चाहती है। आज केवल चेहरे की खूबसूरती बेमानी है। आज फिगर पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। उसका महत्त्व ज्यादा है। चेहरे की खूबसूरती फिगर की खूबसूरती के मुकाबले गौण है।

मोटापा दूर रखने या दूर करने के दो ही मुख्य उपाय हैं डायट यानी उचित आहार और वर्जिश यानी व्यायाम।

व्यायाम का एक खूबसूरत जरिया है नृत्य। तिस पर शास्त्रीय नृत्य जो बरसों की सूझबूझ, साधना व प्रवीणता का परिणाम है। योगाभ्यास जैसे साइंटिफिक तरीके कम नहीं हैं। यह शरीर एवं स्वास्थ्य को आकर्षक व संतुलित बनाए रखने का संतुलित अचूक नुस्खा है।

शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न मुद्राएं एवं पोज कसरती मुद्राओं के आधार पर ही दिखाई देंगी। इनमें समानता स्पष्ट है। नृत्यांगनाएं आपको कभी डिप्रेशन का शिकार होते नहीं मिलेंगी क्योंकि नृत्य न केवल शरीर बल्कि मन को भी चुस्त दुरूस्त व स्वस्थ रखता है। मन में नकारात्मक भावनाएं नहीं पनपती। नृत्य मन को बूढ़ा नहीं होने देता। प्रौढ़ नृत्यांगना या नर्तक प्रणय के भावों को भी खूबसूरती से दर्शा सकते हैं।

इसके अलावा कई बीमारियों का नृत्य प्राकृतिक इलाज कर सकता है अगर सही गाइडेंस मिले तो जोड़ों का दर्द और पेट की कई बीमारियां नृत्य द्वारा दूर की जा सकती हैं। इसके अलावा कई बीमारियों को यह दूर रख सकता है जैसे ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी आदि। मानसिक रोगों को तो नृत्य दूर रखता ही है। मानसिक कार्य करने वाले कई बार मानसिक रोगों को आमंत्रण दे बैठते हैं किंतु कभी कोई नृत्यांगना अपना मानसिक संतुलन खो बैठी हो, ऐसा सुनने में नहीं आया।

नृत्य में हाथ पैर के संचालन के साथ ही मुद्राओं के एक्सप्रेशन में आंखों की बहुत अहमियत है, विशेषत: भरत नाट्यम में आंखों की पुतलियों तथा पलकों को नृत्य के समय दाएं बाएं, ऊपर नीचे तथा गोलाई में घुमाने से एलर्टनेस के साथ ही आंखों की ज्योति भी तेज रहती है और नेत्रों की प्राकृतिक नमी बनी रहती है। सजल नयनों की अपनी चमक होती है। गर्दन की भी नृत्य के दौरान अच्छी वर्जिश होने से वहां पर अनावश्यक मांस नहीं चढ़ पाता। साधारण व्यायाम में गर्दन उपेक्षित रह जाती है। शास्त्रीय नृत्य अपने में संपूर्ण व्यायाम है जिसमें शरीर के सभी अंगों की अच्छी खासी वर्जिश हो जाती है।

शुरूआत पंद्रह मिनट के नृत्याभ्यास से की जा सकती है। शनै:-शनै: इसे बढ़ा सकते हैं। नृत्य करने के लिए उम्र या लिंगभेद कोई रूकावट नहीं है। इसमें आप व्यायाम कर शरीर तो सुडौल रखती ही हैं, एक कला को अपनाकर प्रतिभा का विकास भी करती हैं। समय का यह बढिय़ा सदुपयोग है।

- उषा जैन शीरीं

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