सावधान, शीत ऋतु आ गयी है

सावधान, शीत ऋतु आ गयी है

अब जाड़े की सिहरन से शरीर कंपकंपाने लगा है। अगर आप इस मौसम का पूरा लुत्फ उठाना चाहते हैं तो अभी से सजग हो जाइए। इस मौसम में आपकी जरा सी लापरवाही आपको रोगी बना सकती है। मुख्यत: इस ऋतु में वात के कुपित होने के कारण खांसी, जुकाम, टान्सिल्स का बढऩा और बुखार आदि रोग होने की तीव्र सम्भावना होती है। आप निम्न सुझावों को अपनी दिनचर्या में स्थान दें तो काफी हद तक शीतजन्य रोगों से बचा जा सकता है।

ठंडी तासीर की चीजों से परहेज रखें जैसे मौसंबी और गन्ने का रस। खास तौर से अपने नौनिहालों के प्रति सतर्क रहें क्योंकि खेल कर आने के बाद उनकी प्रिय वस्तु ठंडा पानी होती है।

घर से बाहर जाते समय त्वचा का ठंडी हवा से बचाव जरूरी है। इसलिए गर्म कपड़े पहनें और चेहरे पर कोई अच्छी क्र ीम लगाएं। अगर स्कूटर या मोटरसाइकिल से जा रहे हों तो सर को हेलमेट या किसी टोपी से ढकें।

फर्श पर दरी या कालीन बिछाकर रखें। इससे कमरा भी गर्म रहेगा और फर्श की ठंडक से आपका बचाव होगा। खास तौर से यह उपाय छोटे बच्चों और बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए बहुत उपयुक्त रहेगा।

अगर आपकी ताजे पानी से स्नान करने की आदत है तो अच्छा है पर जहां आप स्नान करें, वह स्थान चारों तरफ से बन्द होना चाहिए। अधिक बूढ़े व्यक्ति और छोटे बच्चे गुनगुने पानी से नहाएं तो बेहतर रहेगा क्योंकि उनमें ठंड प्रतिरोधक शक्ति बहुत कम रहती है। नहाने के बाद सूखे तौलिए से शरीर को भली-भांति पोंछें।

जाड़ों में साबुन का प्रयोग बहुत कम करें। इसके अधिक प्रयोग से त्वचा रूखी हो जाती है। दिन में शयन का निषेध करिए।

शीत ऋतु में मच्छरों से बचाव बहुत जरूरी होता है। रात में मच्छरदानी लगा कर सोएं। 'मासकिटो रिपेलैंटÓ का प्रयोग यथा-संभव न करें। इसमें से कुछ में हानिकारक रासायनिक पदार्थों का अनुपात ज्यादा पाया जाता है और उससे उडऩे वाला धुआं रात भर हमारे फेफड़ों में जाता रहता है। इसके दूरगामी परिणाम घातक होते हैं।

रात में पूरी बांह के कपड़े जरूर पहनें। प्राय: गहरी नींद में कम्बल इधर-उधर हो जाने का पता नहीं लगता और ठंड लग जाती है।

अगर हाथ पैरों में फटन होती हो तो रात में सोने से पहले उन्हें भली-भांति गर्म पानी से धोकर क्र ीम या बादाम के तेल से मालिश करें और ऊपर से दस्ताने पहन लें।

सुबह कम से कम आधा घंटा व्यायाम जरूर करें। अगर आप व्यस्त रहते हों तो व्यायाम के साथ-साथ इस समय का उपयोग संगीत अथवा समाचार सुनने में भी कर सकते हैं। नियमित व्यायाम से रक्ताभिसरण क्रि या तेज होती है और चुस्ती आती है। एक 95 वर्ष के प्रसिद्व ब्रिटिश अभिनेता जार्ज बर्न्स की अच्छी कार्य क्षमता और जिन्दादिली का राज भी नियमित व्यायाम करना है।

वृद्ध व्यक्तियों को अक्सर इस मौसम में गठिये की शिकायत हो जाती है, अत: इससे बचने के लिए तकिए का प्रयोग बन्द कर दें। हल्का व्यायाम करें। ठंड से पूरी तरह बचें और प्रोटीन तथा लौह तत्व युक्त आहार लें।

शीत ऋतु को शरीर बनाने के लिए उत्तम मौसम माना गया है। आयुर्वेदानुसार शीत ऋतु में जठराग्नि प्रबल रहती है, इस कारण खाया पिया जल्दी पच जाता है। शीत ऋतु में अपनी पाचन शक्ति के अनुकूल पौष्टिक, बलवर्धक व बाजीकारक आहार अवश्य लेना चाहिए। इस ऋतु में विटामिन 'ए' तथा 'डी' की विशेष आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति दूध, अण्डे, हरी सब्जी, टमाटर आदि से पूरी हो जाती है। विटामिन 'डी' की पूर्ति धूप सेंकने से होती है।

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्वति के अनुसार रोगों का कारण शरीर में मौजूद बारह प्रकार के लवण का असंतुलित अनुपात होता है। ऋतुओं के समय भी शरीर में कुछ प्रकार के लवण की कमी हो जाती है। अगर विशेष लवण 'होम्योपैथिक औषधि' का सेवन पहले कर लिया जाए तो रोग होने की संभावना नगण्य हो जाती है। मुख्यत: वे लवण फेरम फास तथा कालीम्योर में पाए जाते हैं। उपरोक्त औषधियां नाक, गले तथा फेफड़ों आदि के रोगों से सुरक्षित रखती हैं।

मुझे पूरी उम्मीद है कि उपरोक्त छोटे-छोटे परन्तु महत्त्वपूर्ण उपायों पर अमल करके आप कुदरत के इस हसीन मौसम का पूरा लुत्फ उठा पाएंगे।

- मनीष खेमका

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