ऑस्टियोआर्थराइटिस: रखें ध्यान

ऑस्टियोआर्थराइटिस: रखें ध्यान

ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है, जब हड्डियों और जोड़ों के लिगामेंटस यानी हड्डियों के बीच के पैडस की स्थिति में बदलाव आ जाए या अपने स्थान से हट जाएं और हड्डियां व जोड़ों में दर्द बना रहे तो उसे आस्टियोआर्थराइटिस कहा जाता है। लिगामेंटस हमारी हड्डियों को एक दूसरे के साथ टकराने से बचाव करते हैं। अगर लिगामेंटस खराब हो जाएं तो हड्डियां एक दूसरे से रगड़ कर जोड़ों पर विशेष प्रभाव डालती हैं।

यह रोग किसी भी आयु के लोगों को अपनी जकड़ में ले सकता है। अधिकतर 25-35 वर्ष के आयु के लोगों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है। इससे मोटे लोग जल्दी प्रभावित होते हैं। हिप, घुटने, रीढ़ की हड्डी, कंधों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ता है क्योंकि मोटे लोगों का मांस इन स्थानों पर एकत्रित होता है। इस रोग से पीडि़त लोग अपने दैनिक रूटीन के कामों को पूरा करने में दर्द महसूस करते रहते हैं खाली बैठे रहने या आराम करने से भी समस्या में बढ़ोत्तरी होती है।

कारण:- 60 प्रतिशत लोग इससे पीडि़त आनुवंशिक होते हैं क्योंकि माता पिता में से कोई न कोई न कोई इसका शिकार होता है। बाकी लोग गलत पोस्चर में बैठने उठने के कारण, मोटापे और गलत लाइफ स्टाइल के कारण इसके शिकार होते हैं। मधुमेह रोगी भी ऑस्टियो आर्थराइटिस की चपेट में शीघ्र आ जाते हैं।

बचाव:-

. नियमित व्यायाम कर हम इस रोग से दूरी रख सकते हैं।

. उचित खान पान और उचित लाइफस्टाइल अपना कर भी हम बचाव कर सकते हैं।

. सड़क पर चलते समय और घर पर जक्र्स का विशेष ध्यान रखें।

. व्यायाम प्रारंभ करने से पूर्व डॉक्टर से पूरी जानकारी ले लें कि कौन से व्यायाम करने उचित हैं।

. सही पोस्चर में उठे-बैठें और सोयेंं।

. अपने वजन पर नियंत्रण रखें विशेषकर जांघों, कमर और पेट के भागों पर।

. हड्डियों पर अतिरिक्त बोझ न डालें विशेषकर जिनकी हड्डियां कमजोर हैं।

. खिलाड़ी को खेलते समय विशेष नी पैडस और अन्य जोड़ों के बचाव हेतु चीजों का प्रयोग अवश्य करें।

. जिनके परिवार में ऑस्टियोआर्थराइटिस पहले से है, उन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए अपने जोड़ों का।

. नियमित योग कर के भी आप स्वयं को बचा कर रख सकते हैं।

क्या करें:-

. रसदार फलों का अधिक सेवन करें विशेषकर संतरों का। विटामिन सी कार्टिलेज के विकास में बहुत मदद करता है।

. कैल्शियम की सही मात्रा का सेवन करें। डॉक्टर से बोन डेंसिटी टेस्ट करवा कर अपना डाइट चार्ट बनवा लें और आवश्यकता अनुरूप कैल्शियम का सेवन करें। अगर अलग से दवा लेनी पड़े तो अवश्य लें।

. जोड़ों के जिस भाग में दर्द हो जैसे घुटनों पर तो गर्म जुराबें घुटनों पर पहनें और नीकैप्स लगाएं। अन्य जोड़ों पर गर्म वैक्स या सिंकाई करें। सर्दियों में ऐसे रोगी विशेष ध्यान दें।

. दर्द अधिक होने पर फिजिशयन से संपर्क करें। रोगी को अपने आप दर्द निवारक गोलियां नहीं लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक गोलियां लें। अधिक दर्द होने पर एक्सरसाइज न करें।

. फिर भी दर्द लगातार बना रहे तो हड्डियों के आराम के लिए जो भी उपकरण डॉक्टर द्वारा बताए जाएं उन्हें प्रभावित दर्द वाली जगह प्रयोग करते रहें। अगर व्हील चेअर, स्टिक कुछ भी जरूरत हो तो शर्माएं नहीं। उनका सही प्रयोग करें।

जो न करें:- अधिक घी-तेल वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें, खाना कम से कम तेल में पका लें क्योंकि कोई भी एक्स्ट्रा फैट्स आपके जोड़ों को नुकसान ही पहुंचाएंगे। ठंडे खाद्य और पेय पदार्थ न लें। अधिक गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ भी न लें। जंक फूड को अपने खाने से विदा कर दें।

- नीतू गुप्ता

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