दिनभर बने रहें तरोताजा

दिनभर बने रहें तरोताजा

हर इंसान चाहता है कि वह दिन भर तरोताजा बना रहे, थकावट उसके पास फटके तक नहीं। वैसे तो डॉक्टरों के पास भांति-भांति के मरीज़ आते रहते हैं। कोई मानसिक थकान से परेशान है तो कोई शारीरिक थकान से।

रोगी उसका समाधान चुटकियों में करवाना चाहते हैं टॉनिक और विभिन्न विटामिन्स की दवाएं लेकर पर ये सब तो अस्थाई इलाज हैं जिसके सेवन से कुछ दिन तक तो आराम मिलता है, फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी ये दवाएं शरीर को नुकसान भी पहुंचाती हैं।

इन सब चीजों से छुटकारा पाने के लिए कारण जानिए कि आप शारीरिक या मानसिक रूप से अक्सर क्यों थक जाते हैं। शारीरिक थकान अक्सर तभी होती है जब शरीर में ऊर्जा कम उत्पन्न होती हो और मेहनत अधिक करनी पड़ती हो।

इससे शारीरिक थकान होना स्वाभाविक होता है और शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता चला जाता है।

मानसिक थकान अक्सर तब होती है जब मनुष्य तनावग्रस्त हो या संतुलित पौष्टिक आहार न लेता हो और क्षमता से अधिक मानसिक काम करता हो। इन कारणों से शरीर और दिमाग दोनों शिथिल पड़ जाते हैं। यदि आप चाहते हैं कि दिनभर आपका शरीर और दिमाग ऊर्जा से भरा रहे और स्फूर्ति बनी रहे तो निम्न सुझावों को अपनाएं।

- क्षमता से अधिक भाग दौड़ न कर सीमा में रहें।

- नींद पूरी लें ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रह सके।

- काम को व्यवस्थित ढंग से करें। अपनी क्षमतानुसार काम पूरा करने की योजना ही बनाएं।

- सुबह की सैर या कुछ शारीरिक व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनायें।

- तनावमुक्त रहने का पूरा प्रयास करें।

- खाली समय को व्यर्थ में न गंवा कर स्वयं को किसी रचनात्मक कार्य में लगा लें।

- अपने स्नायुतंत्र को स्वस्थ रखने हेतु खुलकर हंसें। इससे दो लाभ होंगे, एक तनाव कम होगा और दूसरा जबड़े का व्यायाम भी होगा।

- बीच-बीच में मसाज करते या करवाते रहें ताकि शरीर में ऊर्जा बनी और रोग प्रतिरोधक शक्ति बनी रह सके।

- अपनी कार्य शैली में सक्रि यता बनाए रखें। आप पास जाने के लिए वाहन का प्रयोग न कर पैदल चलें और हो सके तो लिफ्ट के स्थान पर सीढिय़ों का प्रयोग करें।

- प्रतिदिन स्नान करें ताकि रोमछिद्र खुले रहें और शरीर और मन शिथिल न होकर तरोताजा बना रहें।

इन सब प्राकृतिक उपायों से स्वयं को स्फूर्तिवान बना सकते हैं। इसके अलावा सही खान पान भी शरीर में ताजगी पैदा करता है। खान-पान सही रखने पर भी पूरा ध्यान रखें।

- दिन में पानी खूब पिएं। अधिक मसाले, मीठे और नशे के सेवन से बचें।

- नाश्ता अवश्य लें पर बहुत पेट भर भारी नाश्ता न लें क्योंकि इससे भी शरीर सुस्त होता है। हल्का व पौष्टिक नाश्ता लें।

- भोजन समय पर लें। शरीर को अधिक समय तक भूखा न रखें। इससे शरीर में ऊर्जा शक्ति कम होकर कमजोरी बढ़ती है जिससे शरीर थका-थका रहता है।

- बाहरी भोजन का सेवन कम से कम करें।

- रेशेदार भोजन अवश्य करें।

- प्रयास करें कि भोजन ताजा ही खाएं। इससे पौष्टिकता अधिक बनी रहती है।

- भोजन जल्दी जल्दी न कर शांत स्वभाव से करें।

- अपने आहार में ध्यान रखें कि कार्बोहाइडे्रट, पंटीन, लवण, खनिज और वसा सीमित मात्र में रहे।

- फलों और हरी सब्जियों में अधिक विटामिन और रेशे होने के कारण शरीर में ऊर्जा का संचार अधिक होता है और पेट की सफाई भी अच्छी तरह से हो जाती है। भोजन में सोयाबीन को भी स्थान दें। प्रोटीन सीमित मात्रा में लें क्योंकि ये देर से पचते हैं।

- सुनीता गाबा

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