स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं बीस सूत्री कार्यक्रम

स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं बीस सूत्री कार्यक्रम

- सूर्योदय के पहले उठें। इससे स्वास्थ्य ठीक रहता है।

- मल-मूत्र के वेग को रोकने से स्वास्थ्य को हानि होती है।

- खुली हवा में टहलना मन तथा तन दोनों को प्रफुल्ल रखता है।

- त्वचा की चमक बरकरार रखने के लिए सप्ताह में कम से कम एक बार मालिश करें।

- स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए प्रात: गुरू आहार, दोपहर में मध्यम और रात्रि में लघु आहार लें। कभी कभी फलाहार, रसाहार और उपवास भी रखना हितकर होता है।

- दिन में सोना हितकर नहीं होता। बस ग्रीष्म ऋतु में आप दिन में सोयें। अन्य ऋतुओं में दिन में न सोयें। रात्रि में 6 से 8 घंटे तक की नींद आयु अनुसार लें। अधिक सोना और कम सोना, दोनों ही नुकसानदेह होते हैं। रात्रि में जागरण न करें।

-भोजन के उपरांत जल का सेवन न करें। भोजन के मध्य में लिया गया जल भोजन पचाने में मदद करता है।

- स्वयं को तन्दुरूस्त रखने के लिए दो भाग अन्न और एक भाग जल से पेट को भरें। एक भाग पेट को भोजन पचाने के लिए खाली रखें।

- दूध का सेवन करते समय किसी अम्ल पदार्थ का सेवन न करेें। दही भी प्रात: और दोपहर को ही लें। रात्रि में दही का सेवन न करें।

- अत्यधिक शारीरिक थकान के उपरान्त भोजन का सेवन न करें। ऐसा करने से उल्टी आ सकती है।

- मनुष्य को अति उष्ण, शीत, अम्ल और लवणयुक्त भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। उनके अति प्रयोग से स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता।

- भोजन शीघ्रता से न करें। उससे भोजन ऊपर नासिका आदि छिद्रों में चला जाता है जो अवसाद उत्पन्न करता है। भोजन शान्त मन से करें।

- मनुष्य को भोजन वही करना चाहिए जो स्वास्थ्य रक्षक हो। स्वास्थ्य भक्षक भोजन नहीं करना चाहिए।

- अधिक नमक के सेवन से झुर्रियां असमय हो जाती हैं, इसलिए नमक का सेवन कम करें।

- पैरों के तलुवों पर तेल मालिश करने से आंखों को लाभ होता है।

- चिन्ता, शोक, भय, क्र ोध आदि में किया गया भोजन अच्छी तरह से नहीं पचता।

- शीत ऋतु में जठराग्नि तेज होती है। ऐसे में अपने शरीर की भूख को शान्त करना चाहिए नहीं तो शरीर शिथिल पड़ जाता है।

- वर्षा ऋतु में खाने पीने के पदार्थों के साथ उचित मात्रा में शहद का प्रयोग करते रहें।

- स्वस्थ रहने के लिए आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य, इन तीन मुख्य कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

- अग्नि के सामने काम करने के बाद और तेज धूप से आने के बाद एकदम शीतल जल से स्नान न करें। इससे चमड़ी तथा दृष्टि को नुकसान पहुंच सकता है।

- नीतू गुप्ता

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