चैन की नींद क्यों जरूरी है

चैन की नींद क्यों जरूरी है

नींद न आना यदि एक समस्या है तो ठीक ढंग से नींद पूरी न हो पाना उससे भी बड़ी समस्या हैै। वैज्ञानिकों का मत है कि दिनभर के कामकाज से थककर मस्तिष्क की कुछ परतें निष्क्रि य पड़ जाती हैं, तभी नींद आती है। मस्तिष्क की ये परतें रक्त-संचार की कमी होने और रक्तचाप कम होने पर निष्क्रिय होती हैं।

नींद की कमी का सबसे पहला असर मस्तिष्क और स्नायविक तंतुओं पर पड़ता है। बेचैनी, घबराहट और स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी नींद की कमी के कुप्रभाव के ही लक्षण हैं। शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं। पाचन क्रि या प्रभावित होती है। पेट साफ न रहना, गैस की शिकायत, कब्ज की समस्या और चेहरे पर तेज लुप्त हो जाना नींद न आने के ही कुप्रभाव हैं। इन सब चीजों का मिला-जुला असर हमारी कार्यक्षमता पर भी पड़ता है।

युवावस्था में कम सोकर भी काम चल जाता है किंतु वृद्धावस्था में पूरी नींद जरूरी है। चार घंटे की गहरी नींद आठ घंटे की अशांतिपूर्ण नींद से कहीं अधिक अच्छी है। बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए नींद का पूरा होना बहुत जरूरी है।

बहुत जल्दी सोना भी लाभप्रद नहीं

'जल्दी सोना जल्दी उठना' स्वास्थ्य के लिये बहुत जरूरी है। कितना सोना जरूरी है और बहुत जल्दी सोना क्यों लाभप्रद नहीं? कुछ लोगों को सांझ ढलते ही भूख लग जाती है और आठ बजे से पूर्व ही उनका रात का भोजन भी निपट जाता है। भोजन के बाद नींद आनी शुरू हो जाती है। 10 बजे से पूर्व सोना फायदेमंद नहीं, उसी तरह रात के 11 बजे के बाद जागना भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं। 9 बजे से पूर्व सोने वाले की 3 बजे नींद खुल जाएगी और फिर वह पूरे घर को जगायेगा। यह उचित नहीं।

रात में सात घंटे की नींद वृद्ध एवं घरेलू महिलाओं के लिए बहुत है। इतना ही नहीं, स्कूली विद्यार्थियों के लिए भी जरूरत है सूर्योदय से पूर्व उठने की। हमारे देश में सुबह आठ बजे तक सोने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। इनमें शहरी और ग्रामीण दोनों ही लोग सम्मिलित हैं। वजह है देर रात तक घर के बाहर भटकना, टी.वी. देखना, क्लब संस्कृति वगैरह......वगैरह......।

दोपहर की नींद से झपकी जरूरी

आपाधापी की दिनचर्या में बहुत कम ही खुशनसीब ऐसे हैं जो दोपहर भी घर पर बिताते हैं। भोजन करने के बाद एक झपकी ले लेना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा है। दोपहर में आधे-एक घंटे तक नींद की आदत बुरी नहीं है। इससे स्नायविक तनाव में काफी कमी हो जाती है लेकिन यह नींद 4 बजे से पूर्व ही ठीक है। उसके बाद यदि आप सोते हैं तो रात में जल्दी नींद नहीं आएगी और आप बेवजह ही देर रात तक जागते रहेंगें।

शयनकक्ष कैसा हो

शयन-कक्ष साफ सुथरा होना बहुत जरूरी है। शयनकक्ष तक जितनी कम आवाजें पहुंचें, उतना ही अच्छा है। बिस्तर पर लेटकर न तो पढऩा अच्छा है और न ही गपशप करना। इससे आंखों पर भी कुप्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से तकिया न रखना या बिलकुल पतला-सा तकिया रखना ही बेहतर है। उच्च रक्तचाप वाले सिर के नीचे ऊंचा तकिया रख सकते हैं। जमीन पर गद्दे बिछाकर सोना स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक नहीं है। पलंग सही दिशा में होना चाहिए।

दवाओं का प्रयोग कहां तक उचित

अनिद्रा बीमारी न भी हो किंतु कई बीमारियां का कारण जरूर है। तनाव ही अनिद्रा का एक प्रमुख कारण है। नींद के लिए दवाएं हानिप्रद होती हैं।

किसी न किसी बीमारी का संकेत जरूर है अनिद्रा, अत: नींद जरूरी है। नींद की दवाएं चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए। दवाओं की आदत डालना उचित नहीं।

नींद की वैज्ञानिकता

नींद में शरीर के सभी अंगों तथा पेशियों को पूरा आराम मिलता है। कामकाज में लगे रहने पर शरीर थकावट महसूस करता है। थकावट पैदा करने वाले कुछ विष छनकर रक्त से अलग हो जाते हैं। नींद शरीर को एक तरह का विश्राम प्रदान करती है। शरीर को ताजा होने में मदद मिलती है। शरीर चुस्त एवं दुरूस्त रहता है।

नींद जरूरी है और इसके प्रति लापरवाही बरतना उचित नहीं। तभी तो कहा भी गया है कि साउंड स्लीप-साउंड बॉडी।

- राजेन्द्र मिश्र 'राज'

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