रोग से आरोग्य की ओर

रोग से आरोग्य की ओर

रोग शरीर की असामान्य स्थिति है। यह वह स्थिति है जिसमें शरीर अपने अन्दर संचित गंदगी को विभिन्न तरीकों यथा-ज्वर, फोड़े फुंसी, दस्त, आंव आदि के द्वारा बाहर निकालने का प्रयास करता है। दूसरे शब्दों में रोग शरीर को विषमुक्त करने की एक प्राकृतिक प्रक्रि या है।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोग का कारण कोई न कोई जीवाणु माना जाता है जिसे मारने के लिये जहरीली सुईयों, कैप्सूल, गोलियों आदि का प्रयोग किया जाता है लेकिन क्या वास्तव में सुई, कैप्सूल और गोली रोग के जीवाणुओं को मारती हैं? नहीं, बल्कि ये रोगी की जीवनी शक्ति को मारती हैं ताकि वह शरीर के अन्दर संचित गंदगी के प्रति अपनी प्रतिक्रि या न कर सके।

रोग का मुख्य कारण जीवाणु नहीं बल्कि शरीर में विजातीय द्रव्यों (गंदगी) का एकत्र होना है। विजातीय द्रव्य शरीर के साथ समन्वय स्थापित नहीं कर पाते हैं। ये विजातीय द्रव्य जीवाणुओं के लिए भोजन का कार्य करते हैं और जब तक विजातीय द्रव्य रूपी जीवाणुओं का भोजन शरीर में उपस्थित है, रोग के जीवाणुओं को शरीर में दवाओं द्वारा समूल नष्ट करना सम्भव नहीं है।

आरोग्य की प्राप्ति

रोग से छुटकारा पाना ही आरोग्य की प्राप्ति करना है। इसके लिये शरीर को विजातीय द्रव्यों से मुक्त करना होगा। शरीर को विजातीय द्रव्यों से मुक्त करने के लिए सर्वप्रथम ऐसे भोजन का चुनाव करना होगा जो शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकलने में सहायता प्रदान करे। चोकर सहित आटे की रोटी, ताजे फल, हरी तरकारियां, सलाद आदि ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो शरीर से विजातीय द्रव्यों को शरीर से बाहर निकालने में सहायता प्रदान करने के साथ-साथ शरीर को उचित पोषण भी प्रदान करते हैं।

इसके विपरीत कृत्रिम ठण्डे पेय, मदिरा, कॉफी, चाय, तली-भुनी वस्तुएं, मसालेदार, एवं मैदे से बनी वस्तुएं ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो शरीर में गंदगी पहुंचाने के साथ-साथ अस्वस्थ करते हैं।

रोग से छुटकारा पाने के लिए रोगी को सुपाच्य भोजन, सतत न थकाने वाला व्यायाम जैसे सूर्य नमस्कार, प्रात:काल एवं सायंकाल खुली हवा में टहलना एवं गहरी सांस लेना चाहिए। इससे जीवनी शक्ति बढ़ेगी तथा आरोग्य की प्राप्ति होगी।

रोग के बढऩे पर एनिमा द्वारा आंतों की सफाई करनी चाहिए। प्रात: काल की धूप सेंकनी चाहिये, रक्त संचालन ठीक करने के लिए मालिश करनी चाहिए एवं खिलखिलाकर हंसना चाहिए। इससे शरीर में संचित गन्दगी बाहर निकलेगी।

आरोग्य के लिए ये बातें याद रखें भूख से अधिक एवं भूख न रहने पर न खाएं। काफी मात्र में पानी पिएं। टट्टी पेशाब की हाजत न रोकें। सदैव प्रसन्नचित रहें। इससे आपको पूर्ण आरोग्य की प्राप्ति होगी।

- अनीता देवी

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