जरूरी है चीनी पर नियंत्रण

जरूरी है चीनी पर नियंत्रण

आधुनिक युग में लोगों में चीनी का सेवन अपरोक्ष रूप से बढ़ा है। पुराने लोग सीधे से गुड़,शक्कर, चीनी का सेवन करते थे मिठाई के रूप में, चाय, दूध, लस्सी और शिकंजी के रूप में पर आज के युवा ब्रेड,कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बाबंद जूस, टमाटर की सॉस, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम,कैंडी, कुकीज, चाकलेट के शौकीन हैं। इसके जरिए उन्हें इतनी चीनी मिल जाती है जो मोटापा और डायबिटिज को निमंत्रण देती है।

युवा तो युवा, छोटे बच्चे भी बचपन से इन्हें खाना-पीना पसंद करते हैं। वैसे युवा पीढ़ी मिठाई आदि से परहेज करती है पर सॉफ्ट ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड की दीवानी है पर अब यह सोचना है कि हमें चीनी पर विराम कैसे लगाना है।

- हम नाश्ते में नियमित रूप से ब्रेड, बटर, सैंडविच, अंडा ब्रेड लेते हैं तो हमें सप्ताह में दो से तीन दिन तक कुछ भिन्न नाश्ता करना चाहिए जैसे दूध ओट्स, नमकीन ओट्स या स्टफ्ड परांठा और स्टफ्ड फुलका जिससे हम ब्रेड में युक्त शुगर से स्वयं को बचा सकें।

- कुछ भी फ्राई खाते समय या स्नैक्स खाते समय हम टोमेटो सॉस का प्रयोग खूब मजे लेकर करते हैं। माना इससे खाने का मजा ज्यादा बढ़ जाता है पर शरीर को अपरोक्ष चीनी मिलती है वो भूल जाते हैं। इससे बचने के लिए टोमेटो कैचअप के स्थान पर हरे धनिया, पुदीने की चटनी लें। अगर वो उपलब्ध नहीं तो ऐसे ही खाएं। स्वाद कम आएगा तो कम खाया जाएगा। इससे शरीर में कैलोरी भी कम जाएगी और फालतू चीनी की मात्रा भी नहीं जाएगी।

- सॉफ्ट ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड, ड्रिंक्स, काफी पीने से खून में मौजूद ग्लूकोस की मात्रा तेजी से बढ़ती है। इस पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

- यह सच है चीनी से ऊर्जा तो मिलती है पर पोषक तत्व नहीं मिलते। इसलिए मीठे में फलों का सेवन करें। चीनी की जगह जिन चीजों में शहद मिलाकर सेवन कर सकते हैं करें क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन और खनिज शरीर के लिए लाभदायक हैं और ऊर्जा तो मिलेगी ही।

- चीनी व मैदे इनमें पोषकता नहीं होती। बस कैलोरी की मात्रा होती है। इसलिए मैदे के स्थान पर हमें गेहूं की रोटी खानी चाहिए। हमारा शरीर कार्बोहाइडे्रट को शक्कंर में बदल देता है। यह शक्कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है और नुकसान नहीं पहुंचाती।

- प्रतिदिन स्वस्थ इंसान को चीनी का सेवन 40 ग्राम से ऊपर नहीं करना चाहिए, चाहे मिठाई के रूप में लें या बिस्किट, चाय में चीनी आदि के रूप में लें।

- बिस्किट भी मैदे से बने न खाएं। हाई फाइबर बिस्किट लें। फाइबर अतिरिक्त शुगर को रक्त में अवशोषित होने से रोकता है और शुगर लेवल को भी नियंत्रण में रखता है।

- दूध में ऊपर से चीनी न मिलाएं क्योंकि दूध में लैक्टोज और फलों में फ्रूक्टोज के रूप में चीनी होती है। इसलिए अतिरिक्त चीनी के सेवन से बचें।

- प्रोस्टेड फूड के सेवन से परहेज करें जैसे आइसक्रीम, कैडी, मिठाई, कुकीज, केक, पेस्ट्रीज आदि।

- फैट फ्री उत्पाद किशोरों, युवाओं और हैल्थ कांशियस लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। शोध के अनुसार इन उत्पादों से वसा निकालने की प्रक्रि या में स्वाद बदल जाता है। उसी स्वाद को बनाए रखने के लिए कई बार चीनी का प्रयोग किया जाता है इसलिए फैट फ्री उत्पादों का सेवन न करें।

- शुगर के ज्यादा सेवन से इंसुलिन बनता है जो वजन बढ़ाने मे मदद करता है। जो लोग पतला होने का या स्वयं को मेनटेन रखने का प्रयास करते हैं उन्हें चीनी युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।

- प्रोटीन युक्त आहार लें। कार्बोहाइडे्रट की मात्र का सेवन कम से कम करें।

- शुगर फ्री उत्पादों का सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इनकी मिठास में भी कैलोरी की मात्रा लगभग उतनी ही होती हे। शुगर फ्री के प्रयोग से अधिकतर लोगों को डायरिया होने का खतरा बना रहता है।

- नीतू गुप्ता

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