एड्स रोग लापरवाही से बढ़ता है

एड्स रोग लापरवाही से बढ़ता है

एड्स आज का एक भयावह रोग है जो असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है। यह रोग एच आई वी वायरस द्वारा फैलता है। स्त्री-पुरूष दोनों में से किसी एक के रोग ग्रस्त होने पर दूसरे सहभागी को भी रोग लग जाता है। एड्स एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिसिएंसी सिंड्रोम का संक्षिप्त रूप है।

ज्यादातर लोगों का मानना है कि यह रोग अवैध शारीरिक संबंधों के जरिए फैलता है। कुछ लोग इसे बुरे लोगों की बीमारी मानते हैं। कई लोगों का मानना है कि यौन बीमारियां और संक्रमण से होने वाली एड्स जैसी कई बीमारियां केवल पेशेवर यौनकर्मियों तथा ड्रग्स की लत वाले लोगों को ही होती हैं। ऐसी बीमारियों को बुरे कर्मों का फल भी माना जाता है। कुछ लोग इसे प्राकृतिक न्याय भी कहते हैं जो सही नहीं है।

एड्स का प्रसार उत्तरी अमेरिका यूरोप, अफ्रीका, लेटिन अमेरिका तथा दक्षिणपूर्वी एशिया के देशों में भारत से पहले हुआ था। भारत से एड्स को खत्म करने के लिए इन देशों के अनुभवों को जानना समझना तथा उनसे कुछ सीखना होगा। यह रोग बुरे लोगों से बल्कि लापरवाह लोगों से फैलता है। एच आई वी से बचाव के लिए शिक्षा और जिम्मेदाराना व्यवहार महत्त्वपूर्ण है।

इसके प्रसार को रोकने के लिए सैक्स, कंडोम का इस्तेमाल, ड्रग्स का सेवन और यौन दुर्व्यवहार जैसे मुद्दों पर बातचीत करना सीखने के साथ एच आई वी वायरस से ग्रसित लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

एड्स के रोगी के साथ अछूतों जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोगों का मानना है कि एड्स अवैध यौन संबंधों का परिणाम है। इसलिए कुछ लोग एड्स रोगियों के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार करते हैं जो ठीक नहीं है। यह रोग संक्रमित रक्त चढ़ाने से भी हो सकता है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध से फैलता है।

रोगी के साथ काम करने, शादी-विवाह जैसे समारोहों में उठने-बैठने, साथ खाने और उनकी निराशा हताशा में उन्हें गले लगाने से रोग स्वस्थ आदमी को नहीं लगता। रोग के बारे में जानने के बाद रोगी का बहिष्कार न करें और न उस पर कलंक लगाए। इस बीमारी का मुकाबला संगठित होकर ही संभव है।

प्रेस को चाहिए कि वह अपने लाभ के लिए एड्स से संबंधित कहानियां सनसनीखेज रूप में न छापे। सरकारी अस्पताल एड्स के रोगी का इलाज करने से मना न करें, तभी इस रोग को खत्म किया जा सकता है।

एच आई वी का संक्रमण कैसे होता है। एच आई वी वायरस रक्त और यौन द्रव्यों में मौजूद रहता है। इसलिए इसका निम्न तरीके से संक्रमण होता है:-

- संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध कायम करने से।

- एच आई वी संक्रमित रक्त असंक्रमित व्यक्ति के शरीर में चढ़ाने से।

- एच आई वी संक्रमित गर्भवती महिला से उसके गर्भस्थ शिशु को।

- संक्रमित इंजेक्शन से स्वस्थ व्यक्ति को इंजेक्शन लगाने से।

- राजा तालुकदार

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