तांबे के बर्तन में पानी और सावधानियां

तांबे के बर्तन में पानी और सावधानियां

यह नसीहत देने वाले बहुत मिल जाएंगे मगर...टम्र्स एंड कंडीशंस कौन बताएगा?

रात भर तांबे (कापर) के संपर्क में रहने से तांबे का कुछ अंश पानी में चला जाता है जो एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए और भी फायदेमंद होता है मगर यही पानी अगर एक डायबेटिक पी ले तो उसके लिए यह नुकसानदेह होता है।

उस पानी में मौजूद कापर कोशिकाओं के अंदर पहुंचकर नई ब्लड वेसल्स बनने की प्रक्रिया जिसे 'एंजियोजेनेसिस' कहते हैं, उसे रोक देता है। इसके अलावा ब्लड वेसेल्स की फ्लेक्सिबिलिटी को खत्म कर देता है, उनको लीकी बना देता है और उनके अंदर प्लेक जमने की प्रवृत्ति बढ़ा देता है।

इन सबका परिणाम क्या हो सकता है?

डाईबेटिक व्यक्ति को हार्ट अटैक आ सकता है। उसे पैरालिसिस हो सकता है जिसके कारण उसे अपना कोई हाथ या पैर खोना पड़ सकता है या फिर उसे घाव न भरने की समस्या आ सकती है।

वैसे तो एंजियोजेनेसिस के लिए कापर आवश्यक है मगर कापर की अधिकता में यह प्रोसेस रुक जाती है।

एक होता है ATPIA यह कुली का काम करता है। कोशिका के अंदर कापर कम है तो बाहर से कापर अंदर ले आएगा और अगर किसी भी वजह से कोशिका के अंदर कापर ज्यादा हो गया तो बाहर छोड़ आएगा

मगर डाईबेटिक लोगों में ये ATPIA नामक कुली कम होता है। इसकी कमी के कारण कोशिका के अंदर कापर इकटठा होने पर यह बाहर नहीं ले जाया जा सकता और इसके कारण एंजियोजेनेसिस की प्रोसेस रुक जाती है।

इसलिए बेहतर होगा कि डाईबेटिक लोग जिनके अंदर ये ATPIA नामक कुली का पहले से ही अभाव है, कापर का बहुत ज्यादा इस्तेमाल न ही करें वरना अधिक कापर को बाहर तक छोड़कर कौन आएगा?

वैसे कापर कम होने पर भी आयरन का अपटेक कम होता है और अनीमिया हो जाता है और इसके अलावा कई सारे लक्षण दिखाई देते हैं जिनमें बालों का सफेद होना भी शामिल है, इसलिए कापर का बैलेंस बहुत जरूरी है और थोड़ा सोच समझकर ही कापर का इनटेक बढ़ाना चाहिए। यह नहीं कि किसी ने कह दिया और आप लग गए पानी पीने तांबे के बर्तन में रखकर।

- संजीव कुमार वर्मा

Share it
Top