बचिए मधुमेह की विभीषिका से

बचिए मधुमेह की विभीषिका से

एशियाई देशों में मधुमेह (डायबिटिज) रोग इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि यह देश भले ही गरीबी जैसी विकट समस्या से निपट भी ले किंतु मधुमेह से निपटना बहुत कठिन होगा। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भलेे ही इसका कोई सटीक उपचार न हो परन्तु वैकल्पिक चिकित्सा, विशेष रूप से आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा तथा योग के द्वारा सहज ही इस पर नियंत्रण किया जा सकता है।

मधुमेह क्या है:- हमारे शरीर में शर्करा नामक तत्व होता है। जब यह तत्व रोगी के रक्त और मूत्र में निश्चित से अधिक मात्रा में बढ़ जाता है तो मधुमेह रोग हो जाता है। यह स्थिति एक महत्त्वपूर्ण हार्मोन, जिसको इंसुलिन कहा जाता है, की कमी के कारण उत्पन्न होती है। इंसुलिन का निर्माण अग्नाशय नामक ग्रंथि से होता है। शुगर नामक यह तत्व इंसुलिन की मदद से ही शक्ति का निर्माण करता है। इंसुलिन की मात्रा कम या न होने की स्थिति में शुगर का इस्तेमाल नहीं हो पाता और वह रक्त में जमा होने लगता है। रक्त में सामान्य तौर पर शुगर की मात्र 80 मिलीग्राम डेकालीटर और 120 मिली ग्राम प्रति डेकालीटर के बीच होती है।

मधुमेह के लक्षण:- मधुमेह से ग्रसित रोगियों में बहुत अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बहुत अधिक भूख लगना, तालु, जीभ, और दांतों में अधिक मैल जमना, दांत दर्द, मुंह से दुर्गन्ध आना, हाथ-पैर के तलवों में दाह, थकावट, वजन तेजी से घटना, अधिक नींद आना, आदि लक्षण विशेष रूप से देखे जाते हैं।

मधुमेह के कारण:- मधुमेह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक बहुत आसानी से पहुंच जाता है, इसलिए यह जरूरी है कि जिनके परिवार में कुछ सदस्य मधुमेह से ग्रसित हैं, उन्हें समय-समय पर जांच करवा लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त मैथुन से शुक्र के निरंतर स्राव से शुक्र प्रमेह तथा शुक्र प्रमेह के पुराने होने पर शर्करा की वृद्धि होना, अतिरिक्त परिश्रम न करना, मदाग्नि, यकृत दौर्बल्य, भय, चिंता, लंबे समय तक कब्ज और खानपान में अनियमितताएं, उष्ण वसायुक्त भोजन की अधिकता, अधिक भोजन, अधिक मात्रा में मिठाई, शक्कर का सेवन, मोटापा, वायरल संक्रमण, अग्नाशय में सूजन आना व अनेक प्रकार के औषधियों का प्रयोग भी मधुमेह के कारणों में से होते हैं।

मधुमेह के उपद्रव:- मधुमेह के होते ही रोगी की मुखाकृति मुरझाने लग जाती है और थकी-सी प्रतीत होती है। कान में सनसनाहट की आवाजें आने लगती हैं। आंखों की ज्योति निरंतर कम होने लगती है। स्वाद एवं गंध करने वाली इंद्रियां (ज्ञानेंद्रियां) कमजोर हो जाती हैं। बल का हृास होता है, रोगी अत्यन्त क्षीण हो जाता है, साथ ही मैथुन की शक्ति अति क्षीण हो जाती है। पिंडलियों में दर्द व ऐंठन का शुरू होना, शरीर में जहां-तहां घाव-फुंसी होने लगती है, अतिसार, शीत-पित्त, खुजली, वृक्क शोथ हो जाती है। रक्तचाप में वृद्धि, पक्षाघात, स्नायु और किडनी का क्षतिग्रस्त होना, नपुंसकता, मोतियाबिंद, अन्य नेत्र विकार आदि हो जाते हैं। पेशाब का वेग अनियंत्रित हो जाता है अर्थात कपड़ों तक में पेशाब होने लगता है।

मधुमेह नियंत्रण कैसे करें:- मधुमेह के नियंत्रण के लिए मुख्य तौर पर पांच आयामों पर गौर करना चाहिए। इसके लिए खाने-पीने का परहेज, औषधियों का सेवन, व्यायाम आदि को नियमित करना चाहिए। स्वास्थ्यवर्धक भोजन, प्रात: काल का टहलना, नियमित व्यायाम शूगर का स्तर कम करने में मदद करते हैं और शरीर का वजन भी सामान्य रहता है।

मधुमेह के दुष्प्रभाव:-

- मधुमेह के रोगियों को उच्च रक्तचाप आम आदमी की तुलना में दोगुना हो जाता है।

- मधुमेह के रोगियों को आम जनों की तुलना में हृदय का दौरा पडऩे की संभावना 2-3 गुणा अधिक होती है।

- मधुमेह के रोगियों में गुर्दे से संबंधित कुप्रभाव होने लगते हैं, फलस्वरूप गुर्दे के नष्ट होने का भय बना रहता है।

- मधुमेह के रोगियों में पक्षाघात होने का खतरा बना रहता है।

- नेत्रों से संबंधित रोगों में अंधता, मोतियाबिंद आदि का खतरा बना रहता है।

- मधुमेह के रोगियों को दुष्प्रभाव के कारण बदन में दर्द, झनझनाहट, सुइयां चुभने व सुन्नता का आभास होने लगता है।

- आम लोगों की तुलना में मधुमेहियों को एम्प्यूटेशन का खतरा 15 गुना अधिक होता है।

- मधुमेह के रोगियों में सेक्स की अधिकता बढ़ जाती है परन्तु सक्रिय सेक्स नहीं हो पाता।

घरेलू उपचार:- मधुमेह एक खतरनाक रोग अवश्य है परन्तु उत्तम नियंत्रण से असाध्य नहीं है। योग एवं उपचार के साथ-साथ खान-पान पर नियंत्रण करके इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। उपचार से पूर्व रक्त की जांच कराकर इसका निदान आवश्यक होता है।

- वज्रासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, हलासन, मत्स्यासन, आदि योग की क्रियाएं मधुमेह को नियंत्रित रखती हैं।

- जामुन की गुठली और करेले का चूर्ण 5-5 ग्राम दोनों वक्त भोजन के बाद पानी के साथ फांक लें तथा दिन में 15-20 बेलपत्र चबा-चबा कर पान की तरह खा लेने से मधुमेह नियंत्रित होता है।

ह्म्मधुमेह के रोगियों को गेहूं के आटे के बजाय जौ एवं चना के आटे की मिश्रित रोटी के साथ हरी शाक-सब्जियां खाना हितकर होता है।

- आनंद कुमार अनंत

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