रोग से पूर्व मस्तिष्क चेतावनी देता है

रोग से पूर्व मस्तिष्क चेतावनी देता है

ईश्वर ने हमारे शरीर की रचना कुछ ऐसी की है कि रोग के आसार बनते ही हमारा मस्तिष्क इस की सूचना दे देता है। जो व्यक्ति अपनी व्यस्तता का बहाना बना कर इस संदेश की परवाह नहीं करता, वह रोग से बच नहीं सकता।

रोग के आरंभ में कहीं पीड़ा होगी, कहीं बुखार होगा जिस का मतलब है रोग की संभावना होने पर प्रकृति ही रोग से लडऩे, इसे उखाड़ फेंकने के प्रयत्न शुरू कर देती है। साथ ही हमें सही उपचार करने का संकेत देती है।

शरीर की रोग प्रतिरोधक ताकतें आराम से नहीं बैठती और घमासान में लग जाती हैं मगर जब हम ही उपचार करने की ओर कदम नहीं उठाते, तब बीमार पड़ जाना निश्चित हो जाता है। हमें यह स्थिति नहीं आने देनी चाहिए। ऐसा न हो कि हम अपने काम धंधों में फंसे रहें और रोग जटिल ही हो जाए। जो रहेगा सचेत, वही होगा स्वस्थ।

यदि पहले ध्यान नहीं दिया तो यह समय है कि स्वास्थ्य रक्षा के पूरे प्रयत्न करें। अच्छी दवा दारू करें। रोग को गंभीर न होने दें। अच्छा तो इसी में है कि प्रारंभ में ही रोग को रोकें।

'आर्ट आफ लिविंगÓ संस्था द्वारा दरी बिछा कर पूरी तरह लेटने और कुछ गहरी सांसें लेने की शिक्षा दी जाती है। इसी के साथ शरीर को तानने को कहा जाता है। तने हुए, लेटेे हुए शरीर में हमें अपने प्रत्येक अंग की ओर ध्यान देने को कहा जाता है। वे बायें पैर से ध्यान केन्द्रित करते हुए कमर तक पहुंचने को कहते हैं।

फिर दायें पैर के अंगूठे से ऊपर को ध्यान लाते रहने को समझाते हैं। कमर तक पहुंच कर, अब कमर से धीरे-धीरे कंधों तक ध्यान ले जाने को कहते हैं। फिर गर्दन, चेहरे के प्रत्येक अंगों की ओर ध्यान करते हुए सिर की चोटी तक पहुंचने को कहते हैं। यदि कोई अंग रोग का संदेश दे तो इस की ओर ध्यान देने व उपचार करने की बात समझाते हैं। यह एक अच्छी विधि है। इसे रोजाना करें।

'आर्ट आफ लिविंग' की इस क्रिया से हमारा तन और मन पूरा विश्राम पाते हैं। इन्हें आराम मिलने से इन में शक्ति का संचार होता है। हम अपने प्रत्येक अंग के प्रति जागरूक हो जाते हैं।

हमें निराशावादी होने से बचना है। जल्दी ठीक होने की आशा करनी है। सही उपचार करना है। जब भी मस्तिष्क की चेतावनी मिले, एक्शन में आ जाना है।

तम्बाकू से मन मस्तिष्क कमजोर हो जाता है

प्रतिबंध बेअसर होने के कारण तम्बाकू का विविध रूपों में उपयोग बढ़ गया है। सेवनकर्ता के मस्तिष्क पर तम्बाकू का प्रभाव तेजी के साथ हावी हो जाता है इसीलिए तम्बाकू सेवनकर्ता जल्द ही इसका आदी हो जाता है। तम्बाकू मन-मस्तिष्क को कमजोर कर देता है। इसके विष के प्रभाव से क्रोध की प्रवृत्ति प्रबल हो जाती है।

तम्बाकू में चार प्रकार के ऐसे पदार्थ होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए विष का काम काम करते हैं।

यह मुंह, दांत एवं पाचन को प्रभावित करता है। यह रक्तचाप एवं धड़कन को बढ़ा देता है। इससे पाचन क्रिया बिगड़ जाती है। कब्ज एवं अपच की बीमारी होती है। तम्बाकू के खतरनाक प्रभाव को देखते हुए जन जागरूकता निहायत जरूरी हैै अन्यथा तम्बाकू जनित अनेक खतरनाक बीमारियों के कारण सालाना करोड़ों लोग असमय मरते रहेंगे।

- सुदर्शन भाटिया

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