सुपर सेहत के लिए जीवनशैली

सुपर सेहत के लिए जीवनशैली

सेहत कोई बाजारू वस्तु नहीं है कि उसे जब चाहा, बाजार से खरीद कर ले आये। संसार का सारा सुख तभी भोगा जा सकता है जब सेहत अच्छी हो। आज के समय में सेहत को बनाए रखने के लिए भी कठिन संघर्ष करना पड़ता है। खान-पान, रहन-सहन व दैनिक दिनचर्या को व्यवस्थित करके ही सेहत को सुपर बनाया जा सकता है।

सेहत ही ऐसी वस्तु है जिसमें थोड़ी-सी भी कमी होने पर बड़े से बड़ा सुख फीका पड़ जाता है। सेहत में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी आने पर सबसे पहले थकावट महसूस होती है। थकावट होते ही शरीर में ऐंठन बढऩे लगती है और आलस्य का साम्राज्य छाने लगता है। इस प्रकार के लक्षण आते ही समझना चाहिए कि शरीर संचालन की प्रक्रिया में कहीं न कहीं कोई गड़बड़ी आनी प्रारंभ हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक थकावट अधिकतर तनावों के कारण भी होती है। तनाव के अनेक कारण हो सकते हैं। दिनचर्या के नियमित ढंग से न होने पर भी तनाव उत्पन्न हो जाता है। यौन विशेषज्ञों का मानना है कि सहवास की इच्छा होने पर अगर उसकी पूर्ति नहीं होती तो भी मस्तिष्क तनावग्रस्त होकर थकावट महसूस करने लगता है।

तनाव, उत्तेजना व चिंता को व्यक्ति जितने लंबे समय तक अपने ऊपर ढो कर ले जाता है, उसे उतनी ही थकावट महसूस होती है। इन नकारात्मक संवेगों के कारण शारीरिक व मानसिक क्षमता कम हो जाती है और थकावट घेर लेती है। थकावट से बचने के लिए हमेशा प्राकृतिक उपायों को अपनाया जाना चाहिए।

अपने अंदर आत्मविश्वास को जगाकर चिंता एवं तनाव से मुक्त हुआ जा सकता है। आत्मविश्वास के साथ किसी भी परिस्थिति से मुकाबला किया जा सकता है। आत्मविश्वास एक ऐसा साधन है जिससे तन-मन की थकावट से बचा जा सकता है।

मांसपेशियों को तनाव से मुक्त रखने के लिए मसाज अर्थात् मालिश बहुत ही आवश्यक होती है। सिर से लेकर पांव तक के सभी अंगों की बारी-बारी से मसाज करने पर मांसपेशियों का तनाव कम होता है और शरीर चुस्त रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में 'कोरटिसोल' नामक हारमोन के कारण तनाव उत्पन्न होता है। मसाज द्वारा इस हारमोन पर काबू पाया जा सकता है।

हर किसी के काम करने की एक सीमा होती है। अपनी सीमाओं को पहचान कर ही किसी काम का आयोजन करना चाहिए। जरूरी कामों को निबटाने में प्राथमिकता देकर तनाव से बचा जा सकता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उसे आराम देने की भी आवश्यकता होती है। सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक आराम की भी आवश्यकता होती है अत: काम को प्राथमिकता के आधार पर ही निबटाना लाभदायक होता है।

अच्छी सेहत के लिए खान-पान भी अच्छा होना आवश्यक है। तली-भुनी व चिकनाईयुक्त अधिक चीजों के खाते रहने से पाचन में रूकावट हो सकती है और शरीर आलसी बन सकता है। स्वस्थ रहने के लिए हमेशा ऐसी वस्तुओं को ही खाना चाहिए जो खून में चीनी की मात्र को नियमित रखें और सम्पूर्ण शरीर की ऊर्जा को बनाए रखकर उसे फुर्तीला बनाएं। गाजर, मूली, शलगम, चुकन्दर, पालक, लाल साग आदि को अपने भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में लेकर शरीर को तंदुरूस्त बनाये रखा जा सकता है।

नियमित व्यायाम शरीर के स्टेमिना को बढ़ाने और तनाव से लडऩे में लाभदायक होता है। थकावट महसूस होने पर कुछ देर चहलकदमी कर लेनी चाहिए। प्रात: काल नियमित रूप से 20 से 30 मिनट तक टहलना चाहिए। हफ्ते में 2 से 3 बार तक एरोबिक एक्सरसाइज अर्थात् चलना, दौडऩा, तैरना, साइकिल चलाना आदि करते रहने से शरीर की स्फूर्ति बरकरार रहती है।

चाय, काफी, शराब, सिगरेट आदि के अधिक इस्तेमाल से शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है। इनके सेवन से नींद प्रभावित होती है जिससे तनाव बढ़ता है। इसके अधिक सेवन से शरीर निस्तेज होने लगता है, यौन शक्ति कमजोर हो जाती है तथा चेहरे की रौनक गायब होने लगती है अत: इन वस्तुओं का सेवन यथासंभव कम कर देना चाहिए।

प्रतिदिन कम से कम 8-10 गिलास ताजा पानी अवश्य पीना चाहिए। पानी अधिक पीने से शरीरगत विकार पेशाब के माध्यम से निकलते रहते हैं और शारीरिक तंत्र अच्छी तरह से कार्य करने लगता है। इससे शरीर चुस्त रहता है और थकावट शरीर को अपने कब्जे में नहीं ले पाती है। रात को जल्दी सोकर दिन (सुबह) में सूर्योंदय से पूर्व उठने पर शरीर पूरे दिन चुस्त-दुरूस्त बना रहता है।

- आनंद कु. अनंत

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