जान भी ले सकता है निमोनिया

जान भी ले सकता है निमोनिया

निमोनिया बैक्टीरिया के माध्यम से फैलने वाली ऐसी बीमारी है जिसमें उपचार में देरी होने पर पीडि़त की मृत्यु तक हो जाती है। वैसे अपने यहां शिशु इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। भारत के निमोनिया पीडि़तों में 50 प्रतिशत शिशु होते हैं जो 5 वर्ष से कम आयु के होते हैं। निमोनिया को शिशु हत्यारा भी कहा जाता है।

अपने यहां शिशु मृत्यु दर दुनियां में सर्वाधिक है। निमोनिया इनकी मौतों के पीछे प्रमुख जिम्मेदार माना जाता है। शिशु मृत्यु दर में भारत विश्व के अग्रणी देशों में से है। यहां प्रति वर्ष 20 लाख से ज्यादा बच्चे मृत्यु के शिकार होते हैं। इनमें से 5 लाख लगभग ऐसे बच्चे होते हैं जिनकी मौत निमोनिया जैसी बीमारी के कारण होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यहां प्रति मिनट 100 बच्चे निमोनिया से प्रभावित होते हैं। इनमें से 50 बच्चों की मौत एक घंटे के भीतर हो जाती है। यह प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख बच्चों को मौत की नींद सुला देता है। इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है जबकि उचित सुरक्षा बचाव एवं चिकित्सा के माध्यम

से निमोनिया पीडि़तों को बचाया जा सकता है। रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

निमोनिया क्या है:- यह बैक्टीरिया के माध्यम से होने वाली एक बीमारी है यह बीमारी ज्यादातर लग्स को प्रभावित करती है जिससे लंग्स में संक्रमण, कफ, फीवर और सांस लेने में तकलीफ होती है। यह बीमारी एक से दूसरे में फैलती है। छींक, सांस, यूरिन, ब्लड के माध्यम से यह दूसरे तक फैलती है। हिब और न्यूमोफोकस बैक्टीरिया के कारण 50 प्रतिशत निमोनिया की बीमारी 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को होती है।

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अधिक उम्र के लोगों तक को निमोनिया की बीमारी होती है पर बड़ों को डायबिटीज, कैंसर, एड्स और हार्ट की बीमारी होने पर भी निमोनिया से मिलते-जुलते लक्षण पाए जाते हैं।

निमोनिया डब्ल्यू. एच.ओ. की नजर में:- यह बीमारी अधिकतर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की होती है। इससे इन्हें बचाया जा सकता है। जन्म के समय बच्चों को वजन कम होने पर निमोनिया रोग संभावित है। यह निमोनिया कई प्रकार का होता है पर इनसे कुछ ऐसे हैं जिनसे पीडि़त बच्चों को बचा पाना असंभव होता है।

इम्यून सिस्टम की कमजोरी के कारण बड़ों को यह निमोनिया रोग होता है। दुनियां में प्रति वर्ष 30 लाख लोग निमोनिया पीडि़त होते हैं। इनमें से 5 प्रतिशत पीडि़त उपचार के अभाव में मर जाते हैं। यह मौत के छह प्रमुख कारणों में से एक है।

अमेरिका भी इससे पीडि़त व मौत के मामलों से अछूता नहीं है किन्तु भारत की स्थिति नाइजीरिया, इथोपिया, चीन, कांगों आदि कई देशों से बदतर है। सबसे ज्यादा लोग हमारे यहां निमोनिया से पीडि़त व मारे जाते हैं। निमोनिया की रोकथाम की जा सकती है। इसका उपचार है। पीडि़त मरीज समय पर अस्पताल में पहुंच जाए तो उसे बचाया जा सकता है।

बच्चों की निमोनिया से सुरक्षा के उपाय:- शिशु के पैदा होने के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करवाने और छह माह तक आगे लगातार स्तनपान करवाने से बच्चों की निमोनिया सहित अनेक रोगों से रक्षा हो सकती है। इस दौरान मां के दूध में पर्याप्त पोषण और अनेक रक्षण घटक मिलते हैं। साथ ही खसरे एवं कुकुर खांसी का रूटीन टीका लगवाने से इन बीमारियों के कारण निमोनिया की जटिलताओं से रोकथाम होती है।

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- छह माह स्तनपान के उपरान्त उसे बाहरी पोषक तत्वों से भरपूर भोजन दें।

- निमोनिया के लक्षण दिखते ही अस्पताल ले जाएं।

- उसे वैक्सीन के सही डोज समय पर लगवाएं।

- सर्दी, जुकाम, खांसी, फीवर होने पर उसे तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।

- खांसी आने पर मुंह पर रूमाल रखें।

- सिगरेट के धुएं से बचें व बचाएं।

- बड़े व्यक्ति तम्बाकू सेवन से बचें।

- प्रदूषण वाले क्षेत्र में सुरक्षा अपनाएं।

- सीतेश कुमार द्विवेदी

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