कैसे उबरें मधुमेह की आपात्कालीन स्थितियों से

कैसे उबरें मधुमेह की आपात्कालीन स्थितियों से

मधुमेह एक महाव्याधि है जो छोटे से रूप से उत्पन्न होकर धीरे-धीरे अपना विकराल रूप प्रकट करने लगती है और एक स्थिति ऐसी आती है जब बड़े से बड़े आधुनिक चिकित्सक भी थक-हारकर अपने हाथ खड़े कर देते हैं और इस विकट स्थिति में रोगी भगवान भरोसे ही रह जाता है।

मधुमेह अर्थात् डायबिटीज में दो तरह की आपात्कालीन स्थितियां होती हैं, प्रथम मधुमेह के कारण होने वाली बेहोशी तथा दूसरी इंसुलिन की वजह से होने वाली प्रतिक्रिया। प्रथम को 'हाइपर ग्लेसिमिया' कहा जाता है तथा दूसरे को 'हाइपोग्लेसिमिया'। प्रथम स्थिति में मरीज के शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है जिससे रक्त में शक्कर की मात्रा बढ़ जाती है तथा दूसरी स्थिति में इंसुलिन की मात्रा अधिक हो जाती है जिससे रक्त में शक्कर कम हो जाती है। इसलिए मधुमेह के मरीज को दोनों ही परिस्थितियों से निपटने की कला आनी चाहिए।

मधुमेह के कारण बेहोशी तब आती है जब इस बीमारी का निदान न हुआ हो और उपचार न चल रहा हो। अगर मरीज ने इंसुलिन न लिया हो या ज्यादा खाना खा लिया हो जिससे शरीर में कार्बोहाइडे्रट की मात्रा बढ़ जाए या उसे कोई छूत (इन्फेक्शन) लग गया हो, जिससे शक्कर (इंसुलिन) का संतुलन बिगड़ जाए, तब भी वह बेहोश हो सकता है। दूसरी ओर अगर ज्यादा इंसुलिन ले लिया जाए या अपर्याप्त भोजन के कारण शक्कर की कमी हो जाए तो 'इंसुलिन शॉक' लग सकता है। यह प्रतिक्रिया अत्यधिक थकान के कारण रक्त में ग्लूकोस की मात्र कम हो जाने या उल्टियां होने पर भी हो सकती हैं।

उपरोक्त दोनों ही स्थितियों मे मरीज होश खो देता है लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिनके जरिए इनके बीच का अंतर पहचाना जा सकता है। अगर मधुमेह की बेहोशी होगी तो श्वांस की गति धीमी होती है और इसमें 'एसीटोन' की विशेष गंध आती है। रोगी को उल्टियां भी हो सकती हैं। अगर 'इंसुलिन शॉक' के कारण बेहोशी हुई हो तो मरीज को अत्यधिक पसीना आएगा और उसके दिल की धड़कनें बढ़ी होंगी।

यह बेहोशी मधुमेह के कारण है या 'इंसुलिन शॉक' के कारण, इसे जांचने के लिए मरीज को कुछ शक्कर खिलाइये। सीधे शक्कर (चीनी) खिलाने की बजाय दूध या चाय के साथ देना बेहतर होता है। अगर मरीज को इंसुलिन का शॉक लगा होगा तो शक्कर लेते ही उसमें फौरन सुधार नजर आने लगता है। अगर रोगी की स्थिति में कोई सुधार नहीं होता तो इसका मतलब यह है कि रोगी मधुमेह बेहोशी का शिकार हुआ है। इस स्थिति में रोगी को बिना विलम्ब किए तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

इन दोनों ही स्थितियों में 'मधुमेह बेहोशी' अधिक खतरनाक होती है, अतएव अस्पताल ले जाने में विलम्ब नहीं करना चाहिए। अगर मधुमेह के रोगी का कोई अंग कट जाए और तेजी से खून बह रहा हो तो सबसे पहले जख्म को पूरी तरह साफ कर दें ताकि इन्फेक्शन का खतरा न रहे। मधुमेह के रोगियों को इन्फेक्शन का खतरा बहुत रहता है। जख्म पर साफ रूई या कपड़े को रखकर हाथ से दबाइए। इससे खून बहना रोकने में मदद मिलेगी। जख्मी हो गए मरीज को जितनी जल्दी संभव हो, टिटनेस की सुई लगवा देनी चाहिए।

मधुमेह की चरम स्थिति में उल्टियां हो सकती हैं। जब शरीर में अपर्याप्त इंसुलिन होता है, तब रक्त की शक्कर शरीर की कोशिकाओं में नहीं जा पाती। ऐसी स्थिति में कोशिकाएं ऊर्जा के लिए शरीर के दूसरे पोषक तत्वों, खासकर चरबी का इस्तेमाल करती हैं। इससे शरीर की अम्लीयता बढ़ जाती है और उल्टियां शुरू होने लगती हैं। इस स्थिति में रोगी को मीठा पेय नहीं देना चाहिए तथा उसे पीठ के बल लिटाकर तुरन्त चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।

अगर मधुमेह का रोगी मदिरा लेने का आदी हो तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है क्योंकि अल्कोहल की वजह से उसके लिवर में गड़बड़ी हो सकती है। इस कारण मधुमेह की औषधि ठीक से काम नहीं कर सकती क्योंकि चयापचयी प्रक्रिया यकृत में ही होती है। चयापचयी प्रक्रिया में गड़बड़ी होने से 'हाइपरग्लेसिमिया'और 'हाइपोग्लेसिमिया' दोनों ही स्थितियां गंभीर हो जाती हैं।

अगर गर्भवती महिला मधुमेह से ग्रस्त हो तो यह आपात्कालीन मामला होता है, उसे फौरन डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति में मां-बच्चे दोनों की ही जान खतरे में रहती है।

मधुमेह के रोगियों को आपात्कालीन स्थितियों में संयम एवं धैर्य से काम लेना चाहिए तथा तनावमुक्त होकर आवश्यक उपचार करवाना चाहिए।

-आनंद कुमार अनंत

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