बचें बीमारी नंबर वन हृदय रोग से

बचें बीमारी नंबर वन हृदय रोग से

मानव का दिल उसके शरीर का सबसे महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील अंग है। जब तक दिल काम करता है, मनुष्य जीवित रहता है। जहां दिल ने काम करना बंद किया, सब खेल खत्म!

दिल एक पंप के समान है जिसका कार्य है पूरे शरीर को रक्त सप्लाई करना। हमारे शरीर में रक्त-वाहिकाएं ट्यूब की तरह होती हैं। दिल इनमें रक्त पहुंचाता है। ये ट्यूब्स शरीर के सभी मुख्य अव्यवों मस्तिष्क, गुर्दे, फेफड़े, दिल की मांसपेशियों और शरीर के अन्य पाटर्स में रक्त लाने ले जाने का कार्य करती हैं।

दिल की मांसपेशियों को भी अन्य मांसपेशियों की तरह सतत ऑक्सीजन और पोषण की जरूरत रहती है। दिल की मुख्यत: तीन नलियां वृक्ष की टहनियों की तरह आगे जाकर कुछ हिस्सों में बंट जाती हैं। ये शरीर के सभी भागों में ऑक्सीजनयुक्त रक्त पहुंचाने में सहायक होती हैं।

एंजाइना:- एंजाइना के लक्षणों की पहचान अत्यंत आवश्यक है। अगर एंजाइना के प्रति लापरवाही बरती जाए तो हार्ट अटैक का जबर्दस्त खतरा रहता है। इसलिए इससे आराम पाने के लिए और जीवन को खतरे से बचाने के लिए त्वरित पहचान और एक्शन जरूरी हैं।

एंजाइना का शक तब होता है जब व्यक्ति को शारीरिक या मानसिक श्रम करने तथा ठंड में एक्सपोजर से छाती में दर्द, भारीपन और टाइटनेस (जकडऩ) तथा सांस लेने में कठिनाई होने लगे और ये लक्षण आराम करने या दस मिनट के भीतर सारबिटे्रट या एंगाइज्ड जीभ के नीचे रखने से गायब हो जाएं।

एंजाइना का पेन हल्का या तेज दोनों तरह से हो सकता है जबकि हार्टअटैक में होने वाला पेन बहुत तेज होता है।

आमतौर पर यह पेन छाती के मध्य में होकर बायें हाथ तक फैल जाता है। कभी कभी यह निचले जबड़े या सीधे हाथ तक महसूस हो सकता हैं

दर्द अमूमन पांच से दस मिनट तक रहता है। एंजाइना के लक्षण हैं:-

. श्वास अवरूद्ध होना या उसकी कमी महसूस होना।

. पसीना आना।

. कमजोरी महसूस होना।

. चक्कर आना, मूर्छित हो जाना।

. उल्टी होना या उल्टी की फीलिंग होना।

. छाती और पेट के ऊपरी भाग में असाधारण भारीपन।

. दम घुटता महसूस होना।

हार्ट अटैक:- शरीर में कोलेस्ट्रॉल जो वैक्स की तरह का एक पदार्थ होता है, के दिल की धमनियों में जमा होने से धमनियां सिकुड़ जाती हैं। धमनियों में कोलेस्ट्रॉल के जमा होने का प्रोसेस बचपन से शुरू होकर धीरे-धीरे बढ़ता है। जब एक या एक से अधिक धमनियां 70 प्रतिशत से ज्यादा अवरूद्ध हो जाती हैं तब रक्त का संचार असामान्य होने से हृदय की मांसपेशियों को पंपिंग के लिए कम ऑक्सीजन मिल पाती है। इस तरह की हालत को एंजाइना कहते हैं।

जब एक कॉरोनरी धमनी पूर्णत: अवरूद्ध हो जाती है तो उस धमनी द्वारा हृदय को रक्त सप्लाई रूकने लगती है और हृदय के एक हिस्से को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे वो हिस्सा मर जाता है। कॉरोनरी धमनी के ब्लॉकेज से हृदय की मांसपेशी के मरने को ही हार्ट अटैक कहते हैं।

कारण:- आनुवंशिक कारण इस बीमारी में एक मेजर फैक्टर है। पेरेंट्स या रक्त संबंधी रिश्तेदारी में किसी को यह बीमारी हो तो इस बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।

हृदय रोग के लिए मौजूदा समय की जटिलतर जीवनचर्या, अत्यधिक मानसिक दबाव, खानपान की अनियमितता और बेतरतीब रहन सहन वाली जीवन शैली काफी हद तक जिम्मेदार है। आज का सेडेंटरी लाइफस्टाइल, काउच पटेटो बने रहना, शादी ब्याह पार्टियों में अनाप शनाप अधिक कैलोरी वाले आयली फूड और स्नैक्स खाना, घरों में जंक फूड का बढ़ता चलन, शराब सिगरेट, नींद पूरी न लेना और शारीरिक श्रम की कमी ऐसी नुकसानदेह बातें हैं जो दिल पर भारी पड़ती हैं।

. डायबिटीज से भी हृदय रोग का खतरा बढ़ता है।

. हाई ब्लड प्रेशर हृदय रोग का एक बड़ा कारण है

. मोटापा भी हृदयरोग इनवाइट करता है

. बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

बचाव के लिए:- वजन पर कंट्रोल रखें। खान पान संतुलित रखें। जंक फूड टाइम बेटाइम खाने से बचें। भूख होने पर ही खायें अन्यथा मुंह यूंही न चलाते रहें। खाने में स्किम्ड मिल्क की दही, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां, सलाद फ्रूट्स आदि लें। शराब से तौबा करें। तंबाकू सेहत पर क्या कहर बरसाता है, ये आज सभी जानते हैं। डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को गंभीरता से लें। इनका उचित इलाज करवायें और डॉक्टरी सलाह पर चलें।

व्यायाम उतना ही करें जितना आप आराम से कर सकते हैं। जिम वहीं जॉइन करें जहां एक्सपर्ट इंसट्रक्टर हो।

अपनी सोच पॉजिटिव रखें। सेहत के लिये क्रोध ठीक नहीं। अनावश्यक अत्यधिक क्रोध से सदा बचें। क्रोध पर कंट्रोल लाने के लिए ध्यान एक कारगर विधि है।

काम के साथ आराम भी जरूरी है। सात आठ घंटे की नींद तरोताजा रहने के लिए जरूरी है।

यह करें:- हार्ट अटैक होने पर त्वरित मेडिकल सहायता जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है। तब तक पेशंट को फर्स्ट एड मिलना चाहिए सी पी आर (कार्डियों पल्मनरी रिससिटेशन) से स्थिति बच सकती है। पेशंट को जमीन या हार्ड बेड पर सीधे लिटायें।

पैर ऊपर रखें जिससे मस्तिष्क तक खून पहुंचे।

ताजी हवा आने दें। आसपास भीड़ इकटठी न होने दें। सिर के नीचे से तकिया हटा दें और सी पी आर के एबीसी (एयरवे, ब्रीदिंग और सर्कुलेशन) शुरू करें ये आसान टेक्निक सब को सीख लेनी चाहिए।

लेकिन यह न करें:-

पेशंट को खड़ा न करें, न बैठाएं।

पानी आदि न पिलायें।

मेडिकल एड दिलाने में समय न लगाएं जल्दी से जल्दी उपचार करवाएं।

- उषा जैन शीरीं

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