चटनी जरूर खाएं

चटनी जरूर खाएं

'चटनी नहीं बनायी?' सारा खाना टेबिल पर आ गया, तब उसे देखते हुये प्रवीण बोला था।

'बनायी है। अभी लायी' रमा फुरती से प्लास्टिक का डिब्बा उठा लायी थी। छोटा सा डिब्बा जिसमें करीब ढाई-तीन सौ ग्राम धनिये की चटनी भरी थी।

'चटनी लो भाई साहब', प्रवीण ने चटनी का डिब्बा मेरे सामने कर दिया था।

'इतनी चटनी' मैं चटनी थाली में डालते हुये बोला' - इतनी चटनी रोज खत्म हो जाती है।'

'हम सभी को चटनी का शौक है। खाने के साथ चटनी जरूरी चाहिये। रमा डिब्बा भरकर चटनी बना लेती है। तीन-चार दिन चल जाती है।'

'तीन चार दिन में खराब नहीं होती-?'

'फ्रिज में रखते हैं।'

धनिया या पुदीने की चटनी अगर खाने में हो तो खाने का स्वाद बढ़ जाता है। ज्यादातर घरों में सिर्फ एक ही सब्जी बनती है। खाने में रोटी के साथ एक सब्जी या दाल हो तो स्वाद कम आता है। खाने को रूचिकर बनाने के लिये अगर साथ में सलाद और चटनी भी हो तो क्या कहने?

धनिये या पुदीने की चटनी पीसना पहले मेहनत का काम था। धनिये-पुदीने में सारे मसाले डालकर सिल बट्टे पर पीसना पड़ता था। आजकल सभी घरों में मिक्सी और फ्रिज होते हैं। अगर रोज-रोज आपको चटनी पीसने में आलस्य आता है तो आप भी रमा की तरह तीन चार दिन के लिये इक_ी चटनी पीसकर फ्रिज में रखें।

चटनी सिर्फ खाने के साथ ही काम नहीं आती। नाश्ते में समोसा, पकौड़े, कचौड़ी के साथ भी चटनी अच्छी लगती है। अचानक आपका मन कुछ बनाकर खाने को हो जाये तो अगर चटनी तैयार होगी तो उसे बनाने की मेहनत तो बचेगी।

- किशन लाल शर्मा

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