तनाव रहित जीवन सुख का सार है

तनाव रहित जीवन सुख का सार है

आज आप को कोई एक भी व्यक्ति संतुष्ट नजर नहीं आयेगा। आज का जीवन समस्याओं से घिरा है। कारण है हमारी आधुनिक जीवन शैली और हमारी बढ़ती महत्त्वाकांक्षाएं जिन पर कोई लगाम नहीं। पैसे से बढ़ता मोह और उसके फेर में रिश्तों को भुला देना, उन रिश्तों को जो हमारा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच हो सकते थे। नतीजा आज असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

तनाव में तो आज सभी जी रहे हैं मगर शॉक सहने की क्षमता सब में अलग-अलग होती है इसीलिए सौ फीसदी लोग तनाव से बीमारी में नहीं पहुंचते।

जो लोग तनाव को नियंत्रित नहीं कर पाते, उनमें मोटापा बढऩे लगता है। ज्यादातर शारीरिक प्रॉब्लम्स के लिए तनाव जिम्मेदार है। कैंसर, एग्जिमा, एक्ने, ब्लडप्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम, आर्थराइटिस, सिरदर्द जैसी अनेक बीमारियां तनाव जनित हैं। योगा, मेडिटेशन तनाव का अचूक इलाज हैं। इसके अलावा भरपूर नींद और व्यायाम से भी तनाव दूर होता है।

अगर शरीर में सिरोटोनिन का लेवल कम हो जाता है तो दिमाग तनावग्रस्त रहने लगता है। इसके लिए प्रोटीन से भरपूर फूड लेने के बाद हाई कार्बोहाइड्रेट युक्त फूड लेने से शरीर की ऊर्जा बढ़ती है। फल और सब्जियों के अलावा खट्टे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां शरीर में इम्युनिटी बढ़ाती हैं। तनाव में पसीना अत्यधिक आने से डिहाइडे्रशन हो सकता है इसके लिए पानी अधिक मात्र में पियें।

शरीर के साथ मन पर भी ध्यान दें। आशावादी दृष्टिकोण जीवन संवारता है। चिंता, भय, आशंका, लालच, निराशा, घृणा, ईष्र्या, शक, अविश्वास, नकारात्मक भाव हैं। इनसे बचें। मन का शुद्धिकरण समय-समय पर होते रहना चाहिए जिससे दिमाग के जाले भी साफ होते रहें।

हम यह सोचें कि हम साधु संतों की तरह संसार से निर्लिप्त रहकर महान बन जाएं तो संभव नहीं क्योंकि साधु संत भी पूरी तरह निर्लिप्त नहीं हो पाते। दरअसल तनाव की पॉजिटिव साइड भी है। यह ऊर्जा प्रदान करता है। जरूरत है उसे सही दिशा में चैनेलाइज करने की।

काम में मन लगाइए। मनपसंद कार्य कर सकते हैं। प्रकृति से लगाव रखें। प्रकृति की गोद में सुख चैन है। अच्छा साहित्य पढ़ें। मन के विचार दूर होंगे। इनडोर या आउटडोर गेम अपनी रूचि और सुविधानुसार खेलें। खेल से बढ़कर साफ सुथरा मनोरंजन नहीं। अच्छी फिल्म देख सकते हैं।

मंदिर में कईयों को असीम शांति मिलती है। वहां जा सकते हैं। संगीत प्रेमियों के लिए संगीत प्रार्थना है। उन्हें ईश्वर से एकाकार करने का जरिया है। इसी तरह नृत्य भी एक तरफ का मेडिटेशन है। सुर, ताल, लय बॉडी मूवमेंट्स जब एकाकार हो जाते हैं तो वहां टैंशन का क्या काम।

तनाव के लिये दवाइयों पर निर्भर होना कोई समझदारी नहीं होगी। प्राकृतिक तरीके अपनायें। इससे न पैसा खर्च होगा, न साइड इफैक्टस, न लती बन जाने का डर। तनाव पर काबू पाने के लिए मन से मजबूत होना पड़ेगा। तभी आप सुख की राह पर निरंतर चलने में कामयाब होंगे।

- उषा जैन शीरीं

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