धूम्रपान यानी मौत को निमंत्रण

धूम्रपान यानी मौत को निमंत्रण

हालांकि धूम्रपान की लत व्यक्ति के स्वस्थ शरीर के लिए हर लिहाज से हानिकारक साबित हुई है लेकिन इसके बावजूद आज की तारीख में अधिकांश लोग धूम्रपान मात्र केवल आनंद हेतु ही नहीं बल्कि शौकिया तौर पर भी प्रयोग कर रहे हैं। धूम्रपान की दिन-पर-दिन बढ़ती प्रवृत्ति के कारण लोगों में चिड़चिड़ाहट, आंखों में रक्त संचार का घट जाना, उच्च रक्तचाप, श्वास नलियों में सिकुडऩ तथा दमा इत्यादि बीमारियां परिलक्षित होती दर्शायी पड़ती हैं परंतु मुख्य रुप से पेट में तेजाब का बढ़ जाना, विभिन्न अंगों की एक धमनियों में अवरोध के अतिरिक्त फेफड़े, मुंह, गले, खाने की नली एवं मूत्र प्रणाली के कैंसर आदि नामक बीमारियां विशेष रूप से धूम्रपान की भयंकरता को प्रतिबिंबित करती हैं।

एक अनुमान के अनुसार देश में 15 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 50 फीसदी पुरूष सिगरेट के शौकीन हैं और हमारे देश में प्रत्येक वर्ष 90 अरब सिगरेटें बनती एवं फूंकी जाती हैं जबकि हर सिगरेट पीने वालों से न पीने वाले व्यक्ति को कैंसर ग्रस्त होने की 27 गुना अधिक संभावना होती है। भारत में सिगरेट पीने वालों की तादाद लगभग छह करोड़ आंकी गयी है।

यह कहना गलत साबित नहीं होगा कि बुजुर्गों के मुकाबले किशोरों पर सिगरेट एवं धूम्रपान का असर ज्यादा तेजी से होता हैं जिनमें महिलाओं की भागीदारी भी शामिल है। लेडी डॉक्टरों के मतानुसार, धूम्रपान करने की लत महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर बुरा प्रभाव डालती है। उनके अनुसार सिगरेट पीने वाली महिलाओं में अंडाशय की खराबी की आशंका बढ़ती है जिससे उनकी प्रजनन अवधि घट जाती है और उनमें रजोनिवृत्ति समय से पूर्व आरंभ हो जाती है।

यहां चौंकाने वाली बात यह है कि वैसे तो सिगरेट में एक हजार रसायन होते हैं लेकिन इनमें निकोटीन, कार्बन डाई ऑक्साइड और तार नामक तीन रसायन सबसे अधिक खतरनाक होते हैं। जैसा कि ज्ञात है कि निकोटिन में नशा होता है, कार्बन डाईआक्साइड से फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी होती है और तार फेफड़ों और समस्त दूसरे अंगों में जमा होकर उन्हें नष्ट कर देता है।

वास्तव में धूम्रपान करने से लोगों को कितना नुकसान है और स्वास्थ्य कर्मियों की कही बेशकीमती बातों का लोगों पर कितना असर होता है, समझाने के बावजूद, यह तो वहीं जानें मगर आप लोगों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि धूम्रपान तो एक है परंतु इससे उत्पन्न होने वाली बीमारियां अनेक हैं। धूम्रपान के विभिन्न रूप जैसे तम्बाकू, गुटखा, सिगरेट इत्यादि ऊपरी तौर पर निष्कपट सा प्रतीत होने वाला एक अत्यंत मीठा घातक नशा है जो लोगों को समय से पहले मौत का ग्रास बना सकता है और तो और, मुंह और गले के कैंसर की भयावहता से अब भारत ही नहीं, दुनियां का हर देश चिंतित है। भले ही आज की तारीख में अब अंतिम अवस्था तक इसके रोगियों का जीवन बचाने की तकनीकें अस्पतालों में उपलब्ध हैं किंतु इससे बहुत हद तक बचना ही बेहतर और एकमात्र निदान है। इससे पहले कि यह धूम्रपान आपकी जि़ंदगी तबाह करे और आप भी नशे की लत का शिकार हो जायें, धूम्रपान की लत को छोड़ देना ही बेहतर है। - अनूप मिश्रा

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