छरहरा बदन, लुभाए सबका मन

छरहरा बदन, लुभाए सबका मन

आज की जीवन शैली समृद्ध घर की स्त्रियों को खासकर विवाहोपरांत गुब्बारे की तरह फुला देती है। ऐशो आराम पूर्ण जिंदगी में तरह-तरह के जंकफूड का मजा तो खूब लिया जाता है लेकिन व्यायाम के नाम पर सिर्फ डनलप के गद्दों या सोफों पर आराम फरमाना ही होता है।

वजन बढ़ाने व घटाने में व्यायाम और आहार, ये दो चीजें बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। संतुलित आहार लिया जाये और शरीर की वर्जिश होती रहे तो कोई कारण नहीं कि वजन बढ़ता रहे और शरीर मोटा और थुलथुल हो।

शरीर को ऊर्जा कैलोरी से प्राप्त होती है। कैलोरीज की जरूरत उम्र के अनुसार तो अलग अलग मात्रा में होती ही है, मेहनत और आराम की जिंदगी के अनुसार भी जरूरतें कम ज्यादा होती हैं। वैसे एक वयस्क स्वस्थ व्यक्ति के लिए पंद्रह सौ से लेकर दो हजार कैलोरी की आवश्यकता होती है। फिट रहने के लिए सात हजार कैलोरी जल जानी चाहिए। यह काम करती है वर्जिश। तीव्र गति से चलना, सीढिय़ा चढऩा उतरना, आउटडोर गेम्स इत्यादि। गृहकार्यों से भी अच्छी वर्जिश हो जाती है। नृत्य भी एक अच्छा व्यायाम है।

जिन औरतों को गृहकार्यों की जहमत से निजात मिली होती है, उनके लिये नियमित व्यायाम बहुत जरूरी है। आजकल क्या बड़े, क्या छोटे शहरों में जगह जगह जिम खुले हुए हैं जहां पर व्यायाम एक्सपर्ट टे्रंड लोग सिखाते हैं तरह-तरह की मशीनें जिम में लगी होती हैं जिन से कैलोरीज जलाने में सहायता मिलती है। कई तरह की शारीरिक व्याधियों से भी छुटकारा मिलता है।

यह तो हुई 'व्यायाम द्वारा फिट' रहने की बात लेकिन केवल व्यायाम से ही बात नहीं बनेगी। आहार पर ध्यान देना भी उतना ही अहम् है। अच्छा चटपटा जायकेदार खाना हर किसी की कमजोरी होती है लेकिन अगर हम जीभ पर कंट्रोल करना सीख लें तो यह हमारे हक में सदा ही फायदेमंद रहेगा। खाना हमेशा भूख से कुछ कम खाना चाहिए तथा केवल भूख लगने पर ही खाना चाहिए।

किसी ने भी मेहमानदारी करते हुए इसरार किया और आप भरपेट खाना खाने के पश्चात भी मना करने की समझ नहीं रखते तो अपना बहुत बड़ा नुकसान करते हैं क्योंकि यह एक दो बार की बात न होकर आपकी आदत में शामिल हो जाता है। इससे अतिरिक्त कैलोरी इकटठी हो जाती हैं।

हरी सब्जी और फल की हमारे लिए कितनी अहमियत है यह सब जानते हैं। इन्हें खूब खाएं। पचास ग्राम पत्तेदार हरी सब्जी से केवल तीस ग्राम कैलोरी ही आप ग्रहण करते हैं। अच्छी सेहत के लिए मांसाहारी होना कतई जरूरी नहीं है इसलिए अच्छा है कि हम शाकाहारी ही रहें। अधिक चिकनाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है और बीमारियों को न्यौता देती है इसलिए घी, मक्खन, तेल आदि का कम इस्तेमाल करते हुए तली हुई चीजें कम खाएं।

रात में देर से खाना भी सेहत के लिये ठीक नहीं होता। इस मामले में जैनियों का यह नियम कि सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए, बहुत ही अच्छा नियम है। यह नहीं कि यहां भूखे पेट सोने की सलाह दी जा रही है। वैसा करना भी उचित नहीं है। बस ध्यान इतना रहे कि रात्रि को हल्का फुल्का ही खाया जाए। दूध, फल, दलिया, खिचड़ी आदि लिए जा सकते हैं।

आजकल कोला पेयों का बहुत प्रचलन है। फैशन के नाम पर शुरू हुए ये पेय आजकल जरूरत बन गये हैं। इनसे होने वाली हानि को देखते हुए अगर इन्हें न ही लिया जाए तो ठीक है या फिर बहुत कम लिया जाए।

अंकुरित मोठ, मूंग, दाल, चिवड़े सेहत के लिए अच्छे हैं। इनसे बी काम्पलैक्स खूब मिलता है।

टी. वी. सिनेमा कम देखें। तनावमुक्त रहें, तनाव मुक्ति के लिए योगसाधना की जा सकती है।

- उषा जैन 'शीरीं'

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