बच्चों का सिर दर्द, अभिभावकों की परेशानी

बच्चों का सिर दर्द, अभिभावकों की परेशानी

'मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा है मम्मी।' बच्चे ने कराह कर मां से कहा। मां इस बात से परिचित है कि बच्चे के सिर में दर्द हो रहा है किन्तु उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे, डाक्टर की राय के लिए बाहर जाए या फिर घर में रखी गोली जो स्वयं कभी आवश्यकता पडऩे पर खाती है, वह खिला दे या फिर कोई बाम लगा दे। बच्चे का यह सिर दर्द उससे देखा नहीं जा रहा है। बच्चे के कारण समस्त परिवार में तनाव हो जाता है। उसकी तकलीफ देख कर अभिभावक अधिक चिंतित हो उठते हैं।

सिर दर्द केवल बड़ों को ही नहीं होता वरन् शिशुओं से लेकर उन बच्चों में भी देखा जाता है जो अभी भाषा नहीं सीखे हैं, ऐसे बच्चे सिर दर्द के कारण अधिक रोते हैं, बार-बार अपने सिर पर हाथ फेरते हैं, दूध नहीं पीते और निस्तेज लगते हैं। अपने दर्द को प्रकट कर पाने में असमर्थ होने के कारण अभिभावकों को उनके सिर दर्द का पता लगाना अधिक मुश्किल हो जाता है।

चिकित्सकों का कहना है कि तनाव, सिरदर्द तथा आधे सिर का दर्द बड़ों के साथ-साथ छोटे बच्चों को भी होता है। तनाव से हल्का सिर दर्द करीब तीन मिनट से लेकर सात घन्टे तक भी हो सकता है और आधे सिर का दर्द 72 घन्टे तक रहता है।

कई स्थितियों में यह भी देखा गया है कि सिरदर्द महीनों तक भी चलता है। उल्टी, खाने की अनिच्छा, चिड़चिड़ापन आदि लक्षणों के साथ बच्चे अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बनते हैं। इस विषय में अनेक चिकित्सकों ने अपने विभिन्न मत प्रकट किए हैं किन्तु अधिकतर चिकित्सकों का ऐसा कहना है कि सिर दर्द की उपेक्षा आधे सिर का दर्द अधिक दर्दनाक होता है।

सिर दर्द का कारण:- चिकित्सकों ने बच्चों के सिर दर्द के अनेक कारण बताए हैं जैसे बच्चे के सिर में पहले कभी गहरी चोट लगी हो, पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाने के पश्चात भी कभी-कभी दर्द होता है, कान या नाक में यदि कोई संक्रमण रोग हो गया हो तो सिर दर्द रहता है। इस परिस्थिति में आधे सिर का दर्द भी रहता है। सर्दी लग जाने के कारण वातावरण में परिवर्तन, तेज आवाज, प्रदूषण, तेज रोशनी आदि प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त बड़ों की भांति चिंता, तनाव व उदासीनता के कारण भी आठ साल से अधिक उम्र के बच्चों में सिर दर्द देखे गए हैं।

इलाज की आवश्यकता कब:- चाहे वह हल्का सिर दर्द हो या अत्यधिक सिर का दर्द, हर स्थिति में सिर दर्द नियंत्रण किया जा सकता है। यह आवश्यक नहीं कि हर प्रकार के सिर दर्द में आपके बच्चों को चिकित्सीय राय की आवश्यकता हो। हल्के सिर दर्द का उपाय आप स्वयं घर में कर सकते हैं। कुछ कारण जैसे बच्चों का अधिक समय तक धूप में खेलना, अधिक रात तक जागना, दूर तक आवाज तेज कर बोलना, टी. वी. देखना आदि बातों से सिरदर्द हो तो वह सामान्य है जो स्वत: ठीक हो जाते हैं किन्तु वह सिरदर्द जो हफ्तों, महीनों तक रहते हैं उन पर ध्यान देने योग्य बात है। इन बच्चों को यथाशीघ्र चिकित्सीय राय देने की आवश्यकता होती है।

ध्यान देने योग्य बातें:-अभिभावकों को चाहिए कि पहले से ही सतर्कता बरती जाए जिससे बच्चे को इस प्रकार की स्थिति का शिकार न होना पड़े। अगर ऐसी स्थिति हो भी जाती है तो सिरदर्द की आरंभिक अवस्था में ही बच्चे को अंधेरे कमरे में सुलाएं ताकि पूरी नींद लेने के पश्चात वह स्वयं को हल्का महसूस कर सके। उनकी छोटी सी छोटी चिंता व तनाव की अवहेलना न करते हुए यथाशीघ्र समाधान कर उससे उन्हें निदान दिलवाएं।

देर तक धूप में खेलने की अनुमति न दें। देर तक टी. वी. देखने, तेज रोशनी या एकदम धीमी रोशनी में पढऩे से रोकें। टेबल लैंप आदि में पढऩे पर प्रतिबंध लगाएं। जहां तक संभव हो, ट्यूब लाइट का प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त पांच वर्ष के पश्चात ध्यान व योग का अभ्यास करवाएं। इससे वे सर्दी, खांसी, सिर दर्द, या अपच की स्थिति से दूर रहेंगे।

-रूबी

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