ओस्टिओपोरोसिस से पाएं सुरक्षा

ओस्टिओपोरोसिस से पाएं सुरक्षा

ओस्टिओपोरोसिस एक ऐसा रोग है जिसमें हड्डियां इतनी भुरभुरी हो जाती हैं कि उनके टूट जाने की संभावना भी बढ़ जाती है। ओस्टिओपोरोसिस केवल महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरूषों को भी होता है। प्राय: वृधावस्था में यह रोग देखने को मिलता है। एक अनुमान के अनुसार 6 करोड़ भारतीय ओस्टिओपोरोसिस का शिकार हैं जिनमें से 60 प्रतिशत महिलाएं हैं।
महिलाओं में इसके होने का मुख्य कारण है एस्ट्रोजन की कमी। मेनोपॉज के दौरान ओवरीस एस्ट्रोजन बनाना कम या बंद कर देती हैं जिससे हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। पुरूषों में इस रोग के कम होने का कारण यह भी है कि जिस प्रकार महिलाओं में एस्ट्रोजन पाया जाता है, पुरूषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पाया जाता है और महिलाओं में एस्ट्रोजन की अपेक्षा पुरूषों में टेस्टोस्टेरोन अधिक लम्बे समय तक उत्पादित होता रहता है।
यही नहीं, पुरूष महिलाओं की अपेक्षा अधिक सक्रिय रहते हैं परन्तु 50-65 वर्ष की आयु में महिलाओं की तरह पुरूषों में भी हड्डियों का क्षय आरंभ हो जाता है और हड्डियों का टूटना अधिक हो जाता है।
हार्मोन्स के स्तर के अतिरिक्त भी कई ऐसे कारण हैं जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इनमें कैल्शियम की कमी, विटामिन डी का कम सेवन, अधिक धूम्रपान, अल्कोहल का अधिक सेवन, वंशानुगत कारण, मेनोपाज का जल्दी होना, बहुत अधिक पतले होना, काफी का अधिक सेवन प्रमुख हैं। धूम्रपान अधिक करने से आंतों में कैल्शियम ग्रहण होने में रूकावट आती है।
अगर कम उम्र में सिगरेट का सेवन प्रारंभ कर दिया जाए तो वृेावस्था में ओस्टिओपोरोसिस होने की संभावना अधिक होती है। ऐसा माना जाता है कि सिगरेट का धुआं बोन सेल्स को नुकसान पहुँचाता है। छोटी आयु में शरीर में हड्डियों का निर्माण होता रंहता है और सिगेरट नई हड्डियों की निर्माण प्रक्रिया को रोकता है।
अल्कोहल का अधिक सेवन विटामिन डी के चयापचय में भी बाधा पहुँचाता है। ओस्टिओपोरोसिस की संभावना का एक कारण हाइपरथायराइडिस्म है। इसमें थायराइड हार्मोन थायराक्सिन आवश्यकता से अधिक उत्पन्न होता है जिससे शरीर की चयापचय क्रिया की गति तेज हो जाती है और शरीर में हड्डियां जल्दी टूटती हैं।
शरीर में कैल्शियम की सही मात्र का होना भी बहुत आवश्यक है। जब शरीर में किसी कारण से कैल्शियम की कमी होती है तो शरीर अपनी आवश्यकता के लिए हड्डियों से कैल्शियम ग्रहण कर लेता है ताकि रक्त में कैल्शियम का स्तर सामान्य रहे। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
अगर आप सामान्य वजन से पतले हैं तो भी आपको यह रोग हो सकता है। मोटे लोगों में यह रोग कम देखने को मिलता है।
पतली महिलाओं में मोटी महिलाओं की अपेक्षा मेनोपॉज के बाद 'बोन बिल्डग एस्ट्रोजन कम बनता है और उनकी मांसपेशियां मोटी महिलाओं की मांसपेशियों की तुलना में हड्डियों को सुरक्षा नहीं दे पाती, इसलिए वे फ्रेक्चर का जल्दी शिकार हो जाती हैं।
निष्क्रिय जीवन शैली भी ओस्टिओपोरोसिस का कारण है। जब हम व्यायाम या शारीरिक श्रम करते हैं तो हमारी हड्डियों को कैल्शियम ग्रहण करने में आसानी होती है। डिप्रेशन होने पर भी वृे महिलाओं को ओस्टिओपोरोसिस होने की संभावना भी बढ़ जाती है क्योंकि डिप्रेशन की स्थिति में कोर्टिसोल अधिक बनता है और इस हार्मोन का संबंध हड्डियों के क्षय से है।
ओस्टिओपोरोसिस से बचाव पानेे के लिए प्रारंभ से ही कुछ बातों को ध्यान में रखें। प्रतिदिन 2 गिलास दूध पिएं। कैल्शियम के अच्छे स्रोतों दही, पनीर आदि का सेवन करें। हड्डियों व मांसपेशियों की मजबूती के लिए व्यायाम करें व खेलें। डायटिंग न करें क्योंकि वह हड्डियों पर बुरा प्रभाव डालती हैं। धूम्रपान, अल्कोहल व कॉफी का सेवन न करें।
- सोनी मल्होत्रा

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